Natural Farming: खेती अच्छी हो तो किसान की कमाई बढ़ती है, लेकिन अच्छी खेती के लिए खेत की मिट्टी का स्वस्थ होना भी बहुत जरूरी है. लगातार रासायनिक खाद और दवाओं के इस्तेमाल से कई जगह मिट्टी की ताकत कम हो रही है. ऐसे में प्राकृतिक खेती और मिट्टी की सेहत सुधारने वाली खेती किसानों के लिए नई उम्मीद बन रही है. देशभर में किसान प्राकृतिक खेती, पेड़ों के साथ खेती, कम पानी में सिंचाई और खेती के साथ पशुपालन जैसे तरीकों को अपना रहे हैं. सरकार भी किसानों को इसके लिए आर्थिक मदद और प्रशिक्षण दे रही है.
मिट्टी को फिर से ताकतवर बनाने पर जोर
पुनर्योजी कृषि का आसान मतलब ऐसी खेती से है, जिसमें खेत की मिट्टी को खराब करने के बजाय उसकी ताकत बढ़ाने पर ध्यान दिया जाता है. इसमें मिट्टी की नमी बचाने, जैविक खाद का इस्तेमाल बढ़ाने, पानी की बचत करने और खेत में अलग-अलग तरह के पौधे लगाने जैसे तरीकों को अपनाया जाता है. इससे मिट्टी की सेहत बेहतर हो सकती है और खेती लंबे समय तक अच्छी बनी रह सकती है. किसान अब प्राकृतिक खेती, पेड़ों के साथ खेती, सूक्ष्म सिंचाई और खेती के साथ पशुपालन जैसे तरीकों को अपना रहे हैं. इन तरीकों से खेती की लागत कम करने और खेत के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने में मदद मिल सकती है.
प्राकृतिक खेती के लिए मिल रही आर्थिक मदद
किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने में मदद देने के लिए साल 2024 में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन शुरू किया गया. इस योजना का मकसद किसानों को धीरे-धीरे प्राकृतिक खेती की तरफ लाना है. योजना के तहत एक किसान को एक एकड़ जमीन पर दो साल तक हर साल 4,000 रुपये की मदद देने का प्रावधान है. इसके साथ ही किसानों को जीवामृत और बीजामृत जैसे प्राकृतिक खाद और घोल आसानी से मिल सकें, इसके लिए देशभर में 10,000 बायो-इनपुट सेंटर बनाने की योजना है.
18,786 क्लस्टर से जुड़े 18 लाख से ज्यादा किसान
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 5 मार्च 2026 तक देशभर में 18,786 प्राकृतिक खेती क्लस्टर बनाए जा चुके हैं. इन क्लस्टरों के तहत करीब 8.80 लाख हेक्टेयर जमीन को जोड़ा गया है. वहीं प्राकृतिक खेती से 18.19 लाख किसान जुड़ चुके हैं. एक क्लस्टर में दो ऐसे लोगों को जोड़ा जाता है, जो किसानों को प्राकृतिक खेती के तरीके समझाने में मदद करते हैं. इससे किसानों को अपने गांव और आसपास ही खेती से जुड़ी जरूरी जानकारी मिल सकेगी.
33,676 लोगों को दिया गया प्रशिक्षण
प्राकृतिक खेती को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए लोगों को खास प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है. कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि विश्वविद्यालय और प्राकृतिक खेती से जुड़े संस्थानों में 33,676 लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है. इन प्रशिक्षित लोगों की मदद से किसानों को प्राकृतिक खेती के सही तरीके बताए जाएंगे. इससे किसान मिट्टी की सेहत सुधारने, पानी बचाने और खेती की लागत कम करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं. सरकार की कोशिश है कि खेती सिर्फ आज के लिए फायदेमंद न रहे, बल्कि आने वाले वर्षों में भी खेत उपजाऊ और किसान मजबूत बने रहें.