मौसंबी की खेती में संताजी भोइटे को मिली कामयाबी, कीट के हमले से उत्पादन घटा पर कमाई नहीं

Sweet lemon Farming: किसान संताजी भोईटे ने कहा कि मौसम और कीटों के कारण नुकसान के बावजूद बाग से होने वाला उत्पादन उनके लिए काफी फायदेमंद साबित हो रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार की योजना के माध्यम से बाग तैयार करने में मदद मिली और अब इससे उन्हें नियमित आमदनी हासिल हो रही है.

Kisan India
नोएडा | Published: 19 Aug, 2026 | 05:17 PM

केंद्र सरकार की योजना का लाभ उठाकर महाराष्ट्र के जालना जिले के अंतरवाला गांव के किसान संताजी भोईटे ने मौसंबी की खेती शुरू की. योजना के तहत मिली सहायता से तैयार की गई उनकी फलबाग अब उत्पादन देने लगी है और इससे उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है. हालांकि, इस वर्ष अत्यधिक बारिश और अज्ञात कीट के प्रकोप के कारण क्षेत्र में फलों को नुकसान पहुंचा है, इसके बावजूद संताजी भोईटे ने बारिश से पहले मौसंबी की तुड़ाई कर अपनी उपज की अच्छी कीमत हासिल की.

केंद्रीय योजना का लाभ लेकर मौसंबी का बाग लगाया

महाराष्ट्र कृषि विभाग के अनुसार विकसित भारत-जी राम जी योजना की मदद से कुछ जिलों में कृषि कार्य कराए गए हैं. जालना जिले के अंतरवाला गांव के किसान संताजी भोईटे को मौसंबी का बाग लगाने के लिए मेड़बंदी समेत मिट्टी को समतल करने का काम योजना की मदद से हो गया है. संताजी भोईटे को जब योजना के बारे में जानकारी मिली, तो उन्होंने मौसंबी की खेती के लिए जालना के प्रखंड विकास अधिकारी (गट विकास अधिकारी) के पास निर्धारित प्रारूप में आवेदन किया.

किसान संताजी भोईटे ने समाचार एजेंसी आईएएनएस को बताया कि विकसित भारत जी रामजी योजना के तहत बाग तैयार कराने के काम के लिए आवेदन के साथ उन्होंने ग्रामसेवक के पास योजना के तहत काम की मांग से संबंधित पत्र, ग्राम पंचायत की ग्रामसभा के प्रस्ताव की प्रति, आधार कार्ड, बैंक पासबुक और अन्य जरूरी दस्तावेज जमा किए. प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें योजना का लाभ मिला और उन्होंने अपने खेत में मौसंबी का बाग लगाने का काम शुरू किया.

मौसंबी पौधों की खरीद पर मिली छूट

संताजी भोईटे ने उद्यान विभाग की पौधों पर सब्सिडी योजना का लाभ लेते हुए अपने खेत में 600 मौसंबी के पौधे लगाए. बाग तैयार करने के लिए योजना के तहत गड्ढे खोदने से लेकर पौधरोपण, खाद डालने और निराई-गुड़ाई जैसे विभिन्न कार्य किए गए. उन्हें योजना के तहत 40 रुपए प्रति पौधे की दर से 600 पौधों के लिए अनुदान भी मिला. इससे बाग तैयार करने में आने वाला खर्च कम हुआ और अपनी जमीन पर लंबे समय के लिए आय का एक अतिरिक्त साधन विकसित करने में मदद मिली.

अज्ञात कीट ने उत्पादन घटाया, फिर भी अच्छी कमाई हुई

संताजी भोईटे ने बताया कि पिछले दो वर्षों में बाग से हर साल लगभग 3 टन मौसंबी का उत्पादन हुआ. इससे उन्हें अच्छी आमदनी प्राप्त हुई. इस वर्ष उन्हें लगभग 5 से 6 टन मौसंबी के उत्पादन की उम्मीद थी. हालांकि, अज्ञात कीट के प्रकोप और अत्यधिक बारिश के कारण बाग को काफी नुकसान हुआ. इसके बावजूद बारिश से पहले की गई मौसंबी की तुड़ाई से उन्हें अच्छी-खासी आय प्राप्त हुई. संताजी भोईटे का कहना है कि मौसम और कीटों के कारण नुकसान के बावजूद बाग से होने वाली आमदनी उनके लिए काफी फायदेमंद साबित हो रही है. उन्होंने कहा कि सरकार की योजना के माध्यम से बाग तैयार करने में मदद मिली और अब इससे उन्हें नियमित आमदनी प्राप्त हो रही है.

Sweet lemon Farmer Santaji Bhoite

मौसंबी की तुड़ाई करते किसान संताजी भोइटे.

बाग से ही फल खरीद ले जाते हैं व्यापारी

किसान ने कहा कि उनके मौसंबी फलों को व्यापारी उनके खेत से ही बाजार भाव पर ले जाते हैं. इससे उन्हें बाजार जाने का खर्च और समय की बर्बादी बचती है. जबकि, कीमत अच्छी मिल जाती है. उन्होंने अन्य किसानों से भी ऐसी योजनाओं की जानकारी लेने और पात्रता के अनुसार उनका लाभ उठाने की अपील की. उनके अनुसार, सरकारी सहायता, मेहनत और खेती में सही विकल्प का चयन किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. मौसंबी की खेती लाभदायक साबित हुई है और अन्य किसान भी उपलब्ध सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर अपनी कृषि गतिविधियों को मजबूत कर सकते हैं.

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