गन्ना मूल्य और बकाया भुगतान पर किसानों में नाराजगी, नए पेराई सीजन से पहले कई मुद्दों पर सहमति नहीं
El Nino Effect on Sugarcane Farmers Karnataka : गन्ना उत्पादक संघ के अनुसार अल नीनो के चलते समय पर बारिश नहीं हुई है और जो हुई है वह पर्याप्त नहीं है. सूखे की वजह से खेती की लागत बढ़ गई है और गन्ने की पैदावार कम होगी. इससे किसानों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है.
कर्नाटक में गन्ना मिलों और गन्ना किसानों के बीच नए मूल्य और बकाया भुगतान को लेकर लंबी लड़ाई चली आ रही है. किसान गन्ना भुगतान मूल्य 3500 रुपये की मांग कर रहे हैं. जबकि, मिलें 3200 रुपये देने पर अड़ी हैं. हालांकि, बाद में 50-50 रुपये मिलें और सरकार ने किसानों को दिया है. लेकिन, नए पेराई सीजन से पहले कर्नाटक के कई हिस्सों में सूखा की स्थिति से फसल को नुकसान पहुंचा है. किसान की लागत बढ़ने और उत्पादन गिरने की चिंताओं को देखते हुए किसानों ने मिलर्स और सरकार के साथ बीतचीत करने की अपील की है.
कर्नाटक में सूखे से प्रभावित गन्ना किसानों ने मैसूरु प्रशासन से क्रशिंग सीजन से पहले बैठक करने की अपील की है. किसानों ने कहा कि उनकी समस्याओं को हल करने के लिए नए क्रशिंग सीजन यानी गन्ना पेराई के मौसम के शुरू होने से पहले एक जरूरी बैठक करें. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राज्य गन्ना उत्पादक संघ की ओर से डिप्टी कमिश्नर के कार्यालय में एडिशनल डिप्टी कमिश्नर ऐश्वर्या को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें कम बारिश से पैदा हुई चुनौतियों का जिक्र किया गया.
अल नीनो से लागत बढ़ी और उत्पादन घटने की आशंका
गन्ना उत्पादक संघ के अनुसार अल नीनो के चलते समय पर बारिश नहीं हुई है और जो हुई है वह पर्याप्त नहीं है. सूखे की वजह से गन्ने की पैदावार कम हुई है और खेती की लागत बढ़ गई है, जिससे किसानों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है. संघ का कहना है कि इस स्थिति के कारण उत्पादकता कम हुई है और उत्पादन का खर्च बढ़ा है, इसलिए तुरंत कार्रवाई जरूरी है.
बकाया राशि समेत कई बिंदुओं पर शासन का ध्यान खींचा
संघ ने जिला प्रशासन से अपील की है कि वह क्रशिंग सीजन शुरू होने से पहले तेजी से दखल दे और किसानों की चिंताओं पर चर्चा करे. संघ का कहना है कि गन्ना उत्पादकों के हितों की रक्षा के लिए समय पर कदम उठाने की जरूरत है. संघ ने गन्ना मूल्य में बढ़ोत्तरी, बकाया राशि के भुगतान समेत अन्य बिंदुओं पर भी प्रशासन का ध्यान खींचा है.
नए सीजन के लिए 3500 रुपये गन्ना मूल्य मिले
गौरतलब है कि मार्च में गन्ना किसानों ने मूल्य को लेकर आंदोलन किया था. तब गन्ना किसानों ने 3500 रुपये प्रति क्विंटल का मूल्य मांगा था, लेकिन चीनी मिलें अधिकतम 3200 रुपये भुगतान करने को तैयार हुई थीं. बाद में सरकार के हस्तक्षेप और मदद के बाद 100 रुपये बढ़ाए गए थे. संघ का कहना है कि इस बार नुकसान ज्यादा है औकर उत्पादन कम है. ऐसे में 3500 रुपये मूल्य का भुगतान पाना किसानों के लिए जरूरी है.
जल्द शुरू हो एथेनॉल उत्पादन इकाई
किसानों ने कर्नाटक सरकार से यह भी मांग की है कि ग्रामीण इलाकों में डेयरी सहकारी समितियों की तरह एथेनॉल उत्पादन इकाइयां शुरू की जाएं, ताकि किसानों की आय बढ़े और आयात पर निर्भरता कम हो सके. इसके अलावा, उन्होंने हाल ही में हुई बेमौसम ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान का मुआवजा देने, जिले के सिंचाई तालाबों को भरने के लिए ठोस कदम उठाने और कृषि पंप सेट के लिए अकर्मा-सक्रमा योजना को फिर से शुरू करने की मांग की है.
बिना ब्याज का मिले 10 लाख तक लोन
किसानों ने यह भी कहा कि उन्हें 10 लाख रुपये तक का बिना ब्याज वाला फसल ऋण दिया जाए, यानी प्रति एकड़ 1 लाख रुपये तक का कर्ज जिला सहकारी बैंकों के जरिए उपलब्ध कराया जाए. गन्ना उत्पादक संघ के अध्यक्ष हल्लिकेरेहुंडी भाग्यराज ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार तय समय में उनकी मांगें नहीं मानती, तो किसान जिला मंत्री महादेवप्पा के आवास के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेंगे.