भारत ही नहीं दुनियाभर में चीनी संकट, ब्राजील में 26 फीसदी और थाइलैंड में 15 फीसदी उत्पादन घटा
भारत में चीनी का मौजूदा भाव एक महीने में 25 फीसदी से अधिक चढ़ गया है. वहीं, वैश्विक बाजार में चीनी के भाव में 2 महीने के अंदर 16 फीसदी का उछाल देखा गया है. इसके पीछे भारत, ब्राजील, थाइलैंड समेत कई देशों में कम उत्पादन को भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है.
भारत में चीनी के दाम लगातार बीते दो सप्ताह से ऊपर जा रहे हैं. सालाना आधार पर घरेलू बाजार में चीनी का खुदरा मूल्य लगभग 31 फीसदी महंगा हुआ है. वहीं, देश का चीनी भंडार 9 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है. देश में चीनी संकट के लिए इथेनॉल पॉलिसी को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है तो सरकार चीनी उद्योग को महंगाई लाने का जिम्मेदार बता रही है. हालांकि, भारत ही नहीं दुनियभर में चीनी की मांग के अनुरूप सप्लाई प्रभावित चल रही है. क्योंकि, मुख्य चीनी उत्पादक देश ब्राजील और थाइलैंड समेत कुछ अन्य देशों में चीनी के उत्पादन तेजी से नीचे गया है.
भारत में चीनी का 23 अगस्त को ताजा भाव
केंद्रीय उपभोक्ता मामले विभाग की मूल्य निगरानी समिति ने दैनिक खाद्य वस्तुओं की 23 अगस्त की खुदरा और थोक कीमतें जारी की हैं. इसके तहत आज राष्ट्रीय स्तर पर चीनी का खुदरा औसत मूल्य 60.26 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया है. जो बीते महीने के 48.52 की तुलना में करीब 12 रुपये प्रति किलो अधिक है. वहीं, सालाना आधार पर चीनी का खुदरा मूल्य 30.29 फीसदी बढ़ गया है. चीनी की थोक भाव 4104.77 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया है, जो बीते साल की तुलना में करीब 7 फीसदी अधिक है.
चीनी की कीमत बढ़ने के लिए उद्योग जिम्मेदार- सरकार
सरकार ने इस दावे को खारिज कर दिया कि इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल से इसकी कीमतों में तेज वृद्धि हो रही है. सरकार ने कहा कि घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त भंडार होने के बावजूद चीनी उद्योग ने कीमतें बढ़ाई हैं. इसके साथ ही सरकार ने चीनी की जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ राज्यों को कार्रवाई करने और चीनी मिलों में इस साल 15 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू कराने की तैयारी करने को कहा है.
देश में चीनी का भंडार नौ साल के निचले स्तर पर
देश में चीनी का मौजूदा स्टॉक 30 लाख मीट्रिक टन बताया जा रहा है, जो बीते 9 साल के सबसे निचले स्तर पर है. आमतौर पर हर साल इस वक्त पर 60 लाख मीट्रिक टन के आसपास चीनी का स्टॉक रहता है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने त्योहारों से पहले चीनी की कीमत में बढ़ोतरी और देश में चीनी का भंडार कथित तौर पर कम होने को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा और सवाल किया कि ऐसी स्थिति में भी पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिश्रण (ई20) की नीति की समीक्षा क्यों नहीं की जा रही. खरगे ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में यह दावा भी किया कि देश में चीनी का भंडार 9 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है और 10 लाख टन चीनी का शुल्क-मुक्त आयात करने की नौबत आ गई है.
ब्राजील में 26 फीसदी और थाइलैंड में 15 फीसदी चीनी उत्पादन घटा
केंद्र उपभोक्ता मामले मंत्रालय के अनुसार चीनी की सप्लाई में कमी एक ग्लोबल घटना है और यह सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. 2026-27 के लिए दुनिया भर में चीनी की कमी लगभग 33 लाख मीट्रिक होने का अनुमान है. ब्राजील का चीनी उत्पादन 26 फीसदी गिर गया है. जबकि, थाईलैंड का 15 फीसदी चीनी उत्पादन घट गया है. वहीं, भारत में भी अनुमान के मुकाबले 34 लाख मीट्रिक टन कम उत्पादन हुआ है. इसके चलते उम्मीद के मुताबिक ग्लोबल सरप्लस 33 लाख मीट्रिक टन चीनी घटने का अनुमान है.
वैश्विक स्तर पर चीनी की कीमतों में 16 फीसदी का उछाल
वहीं, मौसम की चिंताओं ने दुनिया भर के नजरिए पर और असर डाला है. इस वजह से इंटरनेशनल चीनी की कीमतें 30 जून 2026 को $474 प्रति टन (45,364 भारतीय रुपये) से बढ़कर 20 अगस्त 2026 को $552 प्रति टन (52,780 भारतीय रुपये) हो गई हैं. यानी दो महीने से भी कम समय में 16 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है.