टमाटर की कीमतों में गिरावट, 10 रुपये किलो रेट.. अब MSP तय करने की उठी मांग

कर्नाटक के कोलार एपीएमसी में टमाटर की बंपर आवक से कीमतें धराशायी हो गई हैं. 15 किलो का हाइब्रिड टमाटर बॉक्स 200 रुपये और खराब गुणवत्ता वाला केवल 80 रुपये में बिक रहा है. लागत भी नहीं निकलने से किसान फसल उखाड़ रहे हैं और टमाटर के लिए MSP जैसी व्यवस्था की मांग तेज हो गई है.

नोएडा | Published: 29 Jul, 2026 | 09:04 AM

कर्नाटक के कोलार एपीएमसी में टमाटर की कीमतों में भारी गिरावट से किसान संकट में हैं. आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के अन्य जिलों से बड़ी मात्रा में टमाटर की आवक होने के कारण मंडी में भाव लगातार गिर रहे हैं. इससे किसानों को अपनी लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है. कोलार को एशिया की दूसरी सबसे बड़ी टमाटर मंडी माना जाता है. इस समय यहां टमाटर की आवक चरम पर है. नीलामी में 15 किलो के एक बॉक्स हाइब्रिड टमाटर का अधिकतम भाव 200 रुपये मिल रहा है, जबकि देसी टमाटर का भाव 150 रुपये प्रति बॉक्स तक है. यानी देसी टमाटर 10 रुपये किलो हो गया है. वहीं, कीमतों में गिरावट के बाद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करने की मांग उठने लगी है.

वहीं, छोटे आकार और खराब गुणवत्ता वाले टमाटर  सिर्फ 80 रुपये प्रति 15 किलो बॉक्स में बिक रहे हैं. किसानों का कहना है कि मंडी शुल्क, कमीशन, मजदूरी और ढुलाई का खर्च निकालने के बाद उन्हें लागत भी नहीं मिल रही है. हालात इतने खराब हैं कि कई किसान कम गुणवत्ता वाले टमाटर सड़कों के किनारे फेंकने को मजबूर हो गए हैं. दूसरी ओर, खुदरा बाजार में टमाटर 15 से 20 रुपये प्रति किलो बिक रहा है.

टमाटर की खेती में लागत बढ़ गई

कोलार जिला पहले से ही कम बारिश के कारण सूखे जैसे हालात का सामना कर रहा है. वहीं, कृषि उपकरण, उर्वरक और कीटनाशकों  की बढ़ती कीमतों ने टमाटर की खेती की लागत भी काफी बढ़ा दी है. ऐसे में लगातार गिरते भाव किसानों की परेशानी और बढ़ा रहे हैं. कर्नाटक की कोलार एपीएमसी में टमाटर की रिकॉर्ड आवक से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. सोमवार को मंडी में 34,350 क्विंटल, यानी करीब 2.29 लाख टमाटर के बॉक्स पहुंचे. अधिक सप्लाई और मांग घटने के कारण टमाटर के दाम लगातार गिर रहे हैं.

टमाटर की आवक सामान्य से कहीं अधिक

कोलार एपीएमसी के सचिव प्रशांत ने डेक्कन हेराल्ड से कहा कि इस सीजन में टमाटर की आवक सामान्य से कहीं अधिक है. वहीं, बांग्लादेश और नेपाल को टमाटर का निर्यात फिलहाल बंद होने से मांग कम हो गई है. उनका कहना है कि आने वाले दिनों में कीमतों में और गिरावट आ सकती है. कोलार मंडी में चल्लाकेरे, सीरा, पावगड़ा, चिक्कबल्लापुर और आंध्र प्रदेश के कई इलाकों से टमाटर पहुंच रहा है. यहां से हर दिन औसतन 64 ट्रक टमाटर उत्तर प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, झारखंड, राजस्थान और पश्चिम बंगाल समेत 15 राज्यों में भेजे जाते हैं.

कई किसान अब टमाटर के पौधे उखाड़ने लगे हैं

लगातार गिरते दामों से परेशान कोलार और मालूर के कई किसान अब टमाटर के पौधे उखाड़ने लगे हैं. किसानों का कहना है कि मंडी तक फसल लाने का ढुलाई खर्च भी नहीं निकल रहा, इसलिए खेती जारी रखना घाटे का सौदा बन गया है. किसानों ने बताया कि पिछले साल इसी समय टमाटर के अच्छे दाम मिले थे. इसी उम्मीद में इस बार अधिक रकबे में खेती की, लेकिन इस सीजन में कीमतों में भारी गिरावट से उन्हें बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है.

खेती की लागत भी तेजी से बढ़ी

टमाटर व्यापारियों का कहना है कि खेती में इस्तेमाल होने वाले सामान भी काफी महंगे हो गए हैं. टमाटर व्यापारी सीएमआर श्रीनाथ के अनुसार ड्रिप सिंचाई के लिए PVC पाइप की कीमत 300 रुपये से बढ़कर 350 रुपये हो गई है. मल्चिंग पेपर का भाव 280 रुपये से बढ़कर 330 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है. प्लास्टिक की रस्सी (ट्वाइन) की कीमत 160 रुपये से बढ़कर 280 रुपये प्रति किलो हो गई है. 15 किलो क्षमता वाली टमाटर की क्रेट की कीमत 140 रुपये से बढ़कर 240 रुपये हो गई है. श्रीनाथ ने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने और टमाटर के लिए समर्थन मूल्य (MSP) जैसी व्यवस्था करने की मांग की है.  उनका कहना है कि खेती की बढ़ती लागत और बाजार में गिरते दाम ने टमाटर किसानों को गहरे आर्थिक संकट में डाल दिया है.

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