14 नए बागवानी केंद्रों की शुरुआत, किसानों को मिलेगी ट्रेनिंग और उन्नत किस्म के पौधे 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने बागवानी के लिए 13 उत्कृष्टता केंद्र भी स्थापित किए हैं. इन केंद्रों के जरिए किसानों को बागवानी फसलों की खेती की ट्रेनिंग के साथ ही उनका मार्गदर्शन किया जाता है, जिससे कम लागत में किसान ज्यादा उत्पादन और ज्यादा दाम हासिल कर पा रहे हैं.

नोएडा | Updated On: 29 May, 2026 | 01:05 PM

हरियाणा सरकार किसानों के लिए फसल विविधीकरण अपनाने पर जोर दे रही है. मुख्यमंत्री नायब सैनी ने किसान से कहा कि वे मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने के लिए फसल चक्र में बदलाव भी करते रहे. उन्होंने 14 नए बागवानी विज्ञान केंद्रों को किसानों के लिए समर्पित किया. उन्होंने कहा कि कृषि शिक्षा और अनुसंधान में युवाओं को लाने के लिए कृषि यूनिवर्सिटी में पीएचडी पाठ्यक्रमों की शुरूआत की जाएगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि भावांतर भरपाई योजना के तहत 21 बागवानी फसलों को भी शामिल किया गया है.

14 नए बागवानी विज्ञान केंद्रों किसानों के लिए खुले

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने करनाल में कहा कि फसलों में विविधता लाना और बागवानी-आधारित खेती किसानों की समृद्धि की कुंजी है. उन्होंने राज्य में बागवानी क्षेत्र के उत्पादन को बढ़ाने के लिए कई उपायों का सुझाव भी दिया. मुख्यमंत्री ने महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय को 14 नए बागवानी विज्ञान केंद्र समर्पित किए और कहा कि अब फसल कटाई के बाद के प्रबंधन (post-harvest management), पौधों में कीट नियंत्रण और बीमारियों जैसे विषयों में मास्टर और PhD कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे.

मुख्यमंत्री ने ‘बागवानी फसलों के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज और रोपण सामग्री का रणनीतिक प्रतिमान’ (Strategic Paradigm of Quality Seeds and Planting Material for Horticultural Crops) राष्ट्रीय सम्मेलन में कहा कि ये केंद्र किसानों तक नवीनतम तकनीकें, गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री और वैज्ञानिक मार्गदर्शन पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. सम्मेलन का आयोजन महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय, करनाल और लेफ्टिनेंट अमित मेमोरियल फाउंडेशन द्वारा किया गया. मुख्यमंत्री ने बागवानी वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों को शील्ड, शॉल और प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित भी किया.

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बागवानी उत्पादक

सीएम सैनी ने कहा कि भारत दुनिया में फलों और सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, और देश सालाना 360 मिलियन टन से अधिक बागवानी उपज का उत्पादन करता है. आज, भारत आम, केला, अमरूद और अनार जैसे फलों, और आलू तथा प्याज जैसी सब्जियों के उत्पादन में दुनिया के अग्रणी देशों में से एक है. उन्होंने कहा कि बागवानी फसलें किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं.

उन्नत बीज और पौध से 25 फीसदी उत्पादन बढ़ेगा

सीएम नायब सैनी ने कहा कि अधिक उत्पादन के बावजूद, देश को गुणवत्ता, ग्रेडिंग, रोग-मुक्त रोपण सामग्री और फसल कटाई के बाद के प्रबंधन में कमियों के कारण लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है. उन्होंने आगे कहा कि अब दुनिया यह मानती है कि गुणवत्तापूर्ण बीज और रोपण सामग्री कृषि उत्पादकता को 15 से 25 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है. इसलिए गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री, वैज्ञानिक प्रबंधन और आधुनिक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है.

उन्होंने कहा, और सुझाव दिया कि बदलते समय की मांग है कि हम नए दृष्टिकोण अपनाएं. जमीन के छोटे-छोटे टुकड़े, गिरता भूजल स्तर, जलवायु परिवर्तन और बढ़ती लागतों के कारण, केवल पारंपरिक खेती के माध्यम से किसानों की आय नहीं बढ़ सकती है. इसलिए, फसलों में विविधता और बागवानी-आधारित खेती के मॉडल भविष्य में किसानों की समृद्धि का मार्ग बनकर उभर रहे हैं.

भावांतर योजना के तहत 21 फसलें शामिल की गईं

उन्होंने यह भी कहा कि ‘भावंतर भरपाई योजना’ के तहत, फलों और सब्जियों सहित 21 बागवानी फसलों के लिए संरक्षित कीमतें (protected prices) निर्धारित की गई हैं. इसके अलावा, सरकार ने बागवानी क्षेत्र में किसानों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएँ शुरू की हैं. किसानों की आय बढ़ाने के लिए वर्ष 2030 तक बागवानी क्षेत्र को दोगुना करने और उत्पादन को तीन गुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर की आधारशिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 दिसंबर, 2024 को रखी थी. सैनी के अनुसार, विश्वविद्यालय ने इतने कम समय में ही उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने बागवानी के लिए 13 उत्कृष्टता केंद्र भी स्थापित किए हैं. इन केंद्रों के जरिए किसानों को बागवानी फसलों की खेती की ट्रेनिंग के साथ ही उनका मार्गदर्शन किया जाता है, जिससे कम लागत में किसान ज्यादा उत्पादन और ज्यादा दाम हासिल कर पा रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि यहां विकसित की गई तकनीकें, प्रशिक्षण कार्यक्रम और किसानों के साथ निरंतर संवाद हरियाणा की बागवानी क्रांति को नई ऊर्जा और गति प्रदान कर रहे हैं.

Published: 29 May, 2026 | 01:02 PM

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