आपकी फसल से सरकार को मिला पैसा! 5.68 करोड़ रुपये राज्यों में बांटे, जानें किसे कितना मिला
भिंडी, खीरा और तरबूज जैसी फसलों की किस्मों के इस्तेमाल से मिली करोड़ों की रकम अब राज्यों तक पहुंची है. NBA ने ABS व्यवस्था के तहत 5.68 करोड़ रुपये जारी किए हैं. बिहार को 45.59 लाख रुपये और यूपी को 36.90 लाख रुपये मिले हैं. अब यह पैसा जैव विविधता संरक्षण पर खर्च होगा.
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने जैविक संसाधनों के इस्तेमाल से मिलने वाले लाभ को राज्यों और संबंधित संस्थानों तक पहुंचाने के लिए 5.68 करोड़ रुपये जारी किए हैं. यह राशि पहुंच और लाभ-बंटवारा (Access and Benefit Sharing-ABS) व्यवस्था के तहत दी गई है. इसमें भिंडी, खीरा और तरबूज जैसी फसलों की किस्मों के साथ कुछ सूक्ष्मजीवों और कृषि संसाधनों के उपयोग से मिली रकम शामिल है. यह पैसा राज्य जैव विविधता बोर्डों, केंद्र शासित प्रदेशों की जैव विविधता परिषदों और एक राष्ट्रीय शोध संस्थान को दिया गया है.
भिंडी की 167 किस्मों से मिले 3.51 करोड़ रुपये
NBA के आधिकारिक बयान के अनुसार इस भुगतान में सबसे बड़ा हिस्सा भिंडी से मिला है. भिंडी की 139 किस्मों और 28 हाइब्रिड किस्मों, यानी कुल 167 किस्मों के इस्तेमाल के लिए 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 3.51 करोड़ रुपये दिए गए हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह रकम मैसर्स नन्हेम्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से प्राप्त हुई थी. इसके अलावा तरबूज की 662 किस्मों और 15 हाइब्रिड, जबकि खीरे की 1009 किस्मों और 14 हाइब्रिड के इस्तेमाल से भी लाभ-बंटवारे की राशि मिली है. इन जैविक संसाधनों को नन्हेम्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, ईस्ट वेस्ट सीड्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और बायर साइंस एंड इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों ने बाजारों और व्यापारियों के जरिए हासिल किया था.
किसान की पहचान नहीं हुई, राज्यों में बांटी गई रकम
NBA ने बताया कि कंपनियों ने इन फसलों को सीधे किसी किसान से नहीं खरीदा था. इन्हें बाजार और व्यापारियों के माध्यम से हासिल किया गया था. ऐसे में यह पता लगाना संभव नहीं था कि इन फसलों को किस किसान, समुदाय या किसी खास क्षेत्र ने उगाया था. इसी वजह से विशेषज्ञ समिति की सिफारिश पर रकम को उन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने का फैसला किया गया, जहां इन फसलों की खेती होती है. इसमें गुजरात को 88,79,304 रुपये, पश्चिम बंगाल को 78,08,691 रुपये, मध्य प्रदेश को 64,90,418 रुपये और ओडिशा को 59,01,641 रुपये मिले हैं.
बिहार को 45.59 लाख रुपये, यूपी को 36.90 लाख रुपये
जारी राशि में बिहार को 45,59,602 रुपये, उत्तर प्रदेश को 36,90,952 रुपये, तमिलनाडु को 34,11,119 रुपये, आंध्र प्रदेश को 30,58,472 रुपये, छत्तीसगढ़ को 24,82,991 रुपये और महाराष्ट्र को 17,57,359 रुपये मिले हैं. इसके अलावा अन्य राज्यों और क्षेत्रों के लिए 87,77,728 रुपये की राशि रखी गई है. सभी मदों को मिलाकर कुल राशि 5.68 करोड़ रुपये है. राज्यों के अलावा पुणे स्थित CSIR-नेशनल केमिकल लेबोरेटरी-नेशनल कल्चर ऑफ इंडस्ट्रियल माइक्रोऑर्गेनिज्म को भी ABS के तहत फंड दिया गया है. यह राशि हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड से प्राप्त हुई थी.
जैव विविधता संरक्षण और गांवों में होंगे ये काम
नियमों के अनुसार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिली राशि का इस्तेमाल जैविक विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 32 के तहत किया जाएगा. इस पैसे से गांवों में पीपल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर (PBR) तैयार करने, पर्यावरण सुधारने, जंगली पौधों की सुरक्षा, जैव विविधता विरासत स्थलों को मजबूत करने, रिसर्च और स्थानीय समुदायों की आजीविका बढ़ाने जैसे काम किए जाएंगे. वहीं, शोध संस्थान इस राशि का इस्तेमाल जैविक संसाधनों के रखरखाव, रिसर्च, संरक्षण, इन-सीटू और एक्स-सीटू संरक्षण तथा क्षमता निर्माण के लिए करेंगे. NBA के मुताबिक, इस नए भुगतान के बाद अब तक बांटी गई कुल ABS राशि 191 करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुकी है. इसका उद्देश्य जैविक संसाधनों के व्यावसायिक इस्तेमाल से मिलने वाले लाभ को जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय समुदायों के हित में वापस लगाना है.