सेब के फूल पर मौसम की मार.. किसानों की लागत बढ़ी, 3500 रुपये पेटी भाव मिला तो पटेगा खर्च
Apple Production : सेब की फसल के लिए फूल आने का समय बेहद अहम होता है. इसी दौरान इस साल मौसम बार-बार बदला. कई जगह बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और ठंड पड़ने से पेड़ों के फूल खराब हो गए. इसका सीधा असर फल बनने पर पड़ा.
हिमाचल प्रदेश के सेब किसानों के लिए इस साल का मौसम आसान नहीं रहा. कई इलाकों में मार्च के दौरान फूल आने के समय तेज हवाओं और बारिश ने तो नुकसान पहुंचाया ही कुछ हिस्सों में , ओलावृष्टि और अत्यधिक ठंड ने भी मुश्किल पहुंचाई है. देरी से होने वाली किस्मों में इन दिनों फूल निकल रहे हैं. लेकिन, अब भी बारिश ने फूलों को तोड़ दिया है. इससे उत्पादन घटने और छोटे फलों की क्वालिटी खराब होने का खतरा बढ़ गया है. हालांकि, अगर सेब की कीमत 3500 रुपये पेटी मिल गई तो किसानों को नुकसान और बढ़े खर्च को पाटना आसान हो जाएगा.
सेब की फसल के लिए फूल आने का समय बेहद अहम होता है. इसी दौरान इस साल मौसम बार-बार बदला. कई जगह बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और ठंड पड़ने से पेड़ों के फूल खराब हो गए. इसका सीधा असर फल बनने पर पड़ा. शुरुआत में बागों में अच्छी फसल की उम्मीद थी. लेकिन मौसम खराब होने के बाद कई पेड़ों पर फल कम लगे. निचले और मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में नुकसान ज्यादा देखने को मिला है. हालांकि कुछ ऊंचाई वाले क्षेत्रों में फसल की स्थिति बेहतर बताई जा रही.
सेब किसानों के लिए मुश्किल भरा रहा पूरा साल
हिमाचल उद्यान विभाग के अनुसार हिमाचल प्रदेश के सेब किसानों के लिए इस साल का मौसम मुश्किलों भरा रहा है. कई इलाकों में फूल आने के समय बारिश, ओलावृष्टि और ठंड ने फसल को नुकसान पहुंचाया. इसका असर अब सेब के उत्पादन पर साफ दिखाई दे रहा है. कई बागों में फल उम्मीद से काफी कम आए हैं. कृषि सलाह में कहा गया है कि देरी से होने वाली किस्मों के फूलों पर मौजूदा बारिश खतरनाक हो सकती है. नई कोपलों को सीधे नुकसान पहुंचा सकती है. किसान बचाव के लिए पौधों के ऊपर जाली या ग्रीन नेट का इस्तेमाल करें.
फूल और फल बचाने के लिए ये उपाय करें किसान
कृषि सलाह में कहा गया है कि मौसम की मार से बचाने के लिए किसानों को फूल आने के दौरान मौसम की नियमित निगरानी करनी चाहिए. पाला पड़ने की आशंका में बगीचे में धुआं करने, स्प्रिंकलर से हल्की सिंचाई और उपलब्ध एंटी-फ्रॉस्ट उपायों का इस्तेमाल किया जा सकता है. ओलावृष्टि वाले क्षेत्रों में एंटी-हेल नेट जैसे उपाय भी मददगार हो सकते हैं. इसके अलावा, बाग में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखना जरूरी है, ताकि बारिश का पानी जमा न हो और पौधों को अतिरिक्त नुकसान न पहुंचे.
बढ़े खर्च को पाटने के लिए कीमत 3500 रुपये पेटी होना जरूरी
दूसरी तरफ मौजूदा उत्पादन में किसानों को मजदूरी, खाद, दवाइयों, पैकिंग और ढुलाई का खर्च बढ़ गया है. इससे किसानों की कमाई पर भी दबाव बढ़ गया है. हालांकि, अच्छी क्लाविटी वाले सेब को शिमला की ढल्ली मंडी में 20 किलो की पेटी के लिए करीब 3,000 से 3,500 रुपये तक का भाव मिल रहा है. किसानों के लिए यह भाव फिलहाल संतोषजनक है, लेकिन उनका कहना है कि बढ़ते खर्च को देखते हुए लंबे समय तक अच्छे और स्थिर भाव मिलना जरूरी है.