बिहार के 629 स्कूलों में बनेंगी मिनी सॉयल टेस्टिंग लैब, छात्र सीखेंगे मिट्टी जांच की तकनीक

बिहार सरकार ने 629 विद्यालयों में मिनी सॉयल टेस्टिंग लैब स्थापित करने की योजना को मंजूरी दी है. इन लैब में छात्र मिट्टी जांच की प्रक्रिया सीखेंगे, जबकि किसानों को मृदा स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी और सॉयल हेल्थ कार्ड उपलब्ध कराए जाएंगे.

पटना | Updated On: 16 Jun, 2026 | 12:45 AM

बिहार में कृषि शिक्षा और मिट्टी की सेहत को लेकर एक नई पहल शुरू होने जा रही है. राज्य सरकार ने अगले वित्तीय वर्ष में 629 पीएम श्री और सरकारी विद्यालयों में मिनी सॉयल टेस्टिंग लैब स्थापित करने का फैसला किया है. इस पहल का उद्देश्य छात्रों को मिट्टी जांच की वैज्ञानिक प्रक्रिया से जोड़ना और किसानों को उनकी जमीन की सेहत के बारे में बेहतर जानकारी उपलब्ध कराना है.

बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने मीठापुर स्थित कृषि भवन में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना और मुख्यमंत्री बागवानी मिशन के तहत संचालित कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की. बैठक में कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने, छात्रों को प्रयोग आधारित शिक्षा से जोड़ने और किसानों को मिट्टी जांच के प्रति जागरूक बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई.

पिछले वित्त वर्ष में 160 स्कूलों में बने मिनी सॉयल टेस्टिंग लैब

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2025-26 में स्कूल सॉयल हेल्थ प्रोग्राम के तहत राज्य के 160 पीएम श्री और सरकारी विद्यालयों में मिनी सॉयल टेस्टिंग लैब स्थापित की जा चुकी हैं. इन प्रयोगशालाओं के माध्यम से छात्र मिट्टी के नमूने लेना, उनकी जांच करना और मिट्टी की गुणवत्ता को समझना सीख रहे हैं. सरकार का मानना है कि स्कूल स्तर पर शुरू की गई यह पहल भविष्य में वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.

कृषि मंत्री ने कहा कि वर्ष 2026-27 में इस कार्यक्रम का बड़े स्तर पर विस्तार किया जाएगा. इसके तहत राज्य के 629 विद्यालयों में नई मिनी सॉयल टेस्टिंग लैब स्थापित की जाएंगी. इन लैब में कक्षा 7, 8, 9 और 11 के छात्रछात्राएं मिट्टी परीक्षण, नमूना संग्रहण और मिट्टी की सेहत से जुड़ी गतिविधियों में भाग लेंगे. इससे बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ेगी और वे खेती तथा पर्यावरण से जुड़े विषयों को व्यवहारिक रूप से समझ सकेंगे.

हर स्कूल में लैब के लिए एक लाख रुपए तय

उन्होंने बताया कि प्रत्येक विद्यालय में लैब स्थापित करने के लिए एक लाख रुपये की लागत तय की गई है. इस राशि का 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी. भारत सरकार की ओर से प्रत्येक विद्यालय को 50 मिट्टी नमूनों के संग्रहण और परीक्षण का लक्ष्य दिया गया है. साथ ही किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी तय की गई है.

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्यक्रम छात्रों और किसानों के बीच एक मजबूत संबंध स्थापित करेगा. छात्र गांवों से मिट्टी के नमूने एकत्र करेंगे और उनकी जांच की प्रक्रिया को समझेंगे. वहीं किसानों को अपनी जमीन में मौजूद पोषक तत्वों और उनकी कमी की सही जानकारी मिल सकेगी. इससे उर्वरकों का संतुलित उपयोग बढ़ेगा, खेती की लागत कम होगी और उत्पादन में सुधार आने की संभावना बनेगी.

ड्रैगन फ्रूट विकास योजना की भी समीक्षा

समीक्षा बैठक के दौरान कृषि मंत्री ने मुख्यमंत्री बागवानी मिशन के तहत संचालित ड्रैगन फ्रूट विकास योजना की भी समीक्षा की. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही है. ड्रैगन फ्रूट जैसी अधिक लाभ देने वाली फसलों को प्रोत्साहित करने के साथसाथ मिट्टी जांच जैसी वैज्ञानिक व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है.

विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि कृषि के आधुनिकीकरण और किसानों की समृद्धि के लिए वैज्ञानिक तरीकों को अपनाना जरूरी है. स्कूलों में स्थापित होने वाली मिनी सॉयल टेस्टिंग लैब न केवल छात्रों को नई सीख देंगी, बल्कि किसानों को भी बेहतर खेती की दिशा में मदद करेंगी. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी योजनाओं को समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से लागू किया जाए ताकि विद्यार्थियों और किसानों को इसका पूरा लाभ मिल सके.

Published: 16 Jun, 2026 | 05:31 AM

Topics: