कर्नाटक के मैसूर स्थित प्रसिद्ध सुत्तूर मठ में उस समय भव्यता और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला, जब केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने डॉ. शिवरात्रि राजेंद्र महास्वामी जी की 110वीं जयंती समारोह में हिस्सा लिया. यह आयोजन न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण था, बल्कि सेवा, शिक्षा और मानव कल्याण की प्रेरणादायक मिसाल भी पेश कर रहा था. शिवराज सिंह ने इस मौके पर धर्म, सेवा, शिक्षा और कृषि जैसे विषयों पर अपनी बात रखी और कहा कि मठ द्वारा किए जा रहे सेवा कार्य वास्तव में भगवान की सच्ची पूजा हैं.
शिवराज सिंह ने कहा– सेवा ही असली पूजा है
समारोह को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह ने कहा कि पीड़ित मानवता की सेवा करना ही भगवान की सच्ची पूजा है. उन्होंने कहा, राजनीति तोड़ती है, लेकिन धर्म जोड़ता है. आज हम सभी अलग-अलग विचारधाराओं से हैं, फिर भी यहां एक साथ इकट्ठा हुए हैं, यह धर्म की शक्ति है. उन्होंने कहा कि सुत्तूर मठ ने जो सेवा कार्य किए हैं, वे प्रेरणा देने वाले हैं– गरीब बच्चों की शिक्षा, अनाथों का पालन, सस्ते इलाज जैसे कार्य मठ वर्षों से करता आ रहा है.
सुत्तूर मठ को बताया सेवा का केंद्र
शिवराज सिंह ने मठ के योगदान को सराहते हुए कहा कि इस मठ की जड़ें हजार साल पुरानी हैं. आदि जगद्गुरु ने इसका बीजारोपण किया था, जो अब वटवृक्ष बन चुका है. उन्होंने कहा, यहां की हवा, पेड़, पौधे, फूल, सब सेवा का संदेश देते हैं. उन्होंने खुद को भगवान शिव का दास और गुरु का शिष्य बताते हुए कहा कि वे मंत्री बनकर नहीं, एक श्रद्धालु बनकर मठ में आए हैं.
400 से अधिक शिक्षण संस्थाएं हैं मठ से जुड़ीं
शिवराज सिंह ने बताया कि शिवरात्रि राजेंद्र महास्वामी जी ने किराए के छात्रावास से जो काम शुरू किया था, आज वो 400 से ज्यादा शिक्षण संस्थानों में बदल चुका है. उन्होंने कहा, सरकार से अगर कोई मेडिकल कॉलेज मांगे तो मुश्किल होती है, लेकिन यहां तो शिक्षण संस्थानों की बरसात हो रही है. मठ गरीबों के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा मुफ्त या बहुत कम कीमत में उपलब्ध करा रहा है, यही सच्ची सेवा है.
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में किसानों के लिए कई योजनाएं
कृषि मंत्री के रूप में शिवराज सिंह ने किसानों के बारे में भी बात की. उन्होंने कहा कि किसान भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और अन्नदाता भी हैं. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में खेती को लाभकारी बनाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं– जैसे उत्पादन बढ़ाना, लागत घटाना, फसल का उचित मूल्य दिलवाना और अगर नुकसान हो जाए तो मुआवजा देने की व्यवस्था भी की गई है.
कृषि में बदलाव की जरूरत पर दिया जोर
शिवराज सिंह ने कहा कि भारत में किसानों के पास छोटी जोत की जमीन होती है, जिससे लाभ कम होता है. उन्होंने कहा कि इंटीग्रेटेड फार्मिंग यानी खेती के साथ पशुपालन, बागवानी, फूलों की खेती जैसी चीजें जोड़ने की जरूरत है. उन्होंने बताया कि मठ द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र से भी वह कुछ नया सीखने की कोशिश करेंगे ताकि खेती को और अधिक लाभकारी बनाया जा सके.
देशहित में सभी को एकजुट होने की जरूरत
राजनीतिक मतभेदों पर बात करते हुए शिवराज सिंह ने कहा कि विचारधारा अलग हो सकती है, लेकिन जब बात देशहित की हो तो सबको साथ आना चाहिए. उन्होंने कहा कि कुछ देशों का अधिनायकवादी रवैया पूरी दुनिया के लिए खतरा बन गया है. ऐसे में अगर दुनिया को कोई शांति और स्थायित्व की राह दिखा सकता है तो वह है भारत. उन्होंने कहा, भारत को मजबूत बनाना हम सबकी जिम्मेदारी है.
स्वदेशी वस्तुएं अपनाने की अपील
शिवराज सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी की अपील को दोहराते हुए कहा कि हर देशवासी को स्वदेशी वस्तुओं के इस्तेमाल का संकल्प लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि विदेशी वस्तुओं पर टैरिफ लगाए जा रहे हैं, ऐसे में हमें अपने देश की बनी वस्तुओं का उपयोग करना चाहिए ताकि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो. उन्होंने भरोसा जताया कि देशवासी इस दिशा में नया इतिहास रचेंगे.
किसान श्रीराम के खेत पहुंचकर केले समेत अन्य फलों की खेती देखी
केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मैसूरु में श्रीराम जी के खेत पहुंचकर केले की फसल का अवलोकन किया. उन्होंने केले की विशिष्ट किस्म Nanjangud Rasabale लगाई है, जो न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि कम शुगर कंटेंट के कारण डायबिटीज़ पेशेंट भी इसे आराम से खा सकते हैं. लेकिन पिछले कुछ समय से केले की यह वैरायटी वायरस से जूझ रही है. इसीलिए हमने तय किया है कि यहां वैज्ञानिकों की एक विशेष टीम भेजी जाएगी. ताकि केले की ये विशिष्ट किस्म सुरक्षित रह सके और किसानों को लाभ मिले.
उन्होंने कहा कि आज मैं यहां लोकप्रिय सांसद महाराज यदवीर सिंह जी के साथ श्रीराम जी के फार्म हाउस पर आया हूं इसकी विशेषता यह है कि 4 एकड़ तो लैंड है इनके पास और इस 4 एकड़ में अगर आप देखेंगे तो कोकोनट ट्रीज भी आपको देखने को मिलेंगे. श्रीराम जी मुझे बता रहे हैं कि लगभग 2.5 लाख रुपए उनकी कोकोनट ट्रीज से होती है, 160 कोकोनट के पेड़ हैं उनमे से लगभग 100 अभी ईलड दे रहे हैं, फल उनमें हो रहे हैं, बाकी अभी ग्रोइंग स्टेज पर हैं. लेकिन, इसके अलावा पपीता यहां लगाया हुआ है, पपीता के साथ चीकू भी लगा हुआ है, अभी हम जिंजर देखकर आए हैं, केला भी है, यह जो टेक्टिस है कि स्वीटपटेटो लगा दो तो बाउन्ड्री पर ताकि बाकी फसल बच सके.