फसल बीमा पर का बढ़ा भरोसा! 7.73 लाख किसानों ने कराया बीमा.. 8412 करोड़ की फसल सुरक्षित

आंध्र प्रदेश में खरीफ 2026 के दौरान फसल बीमा योजनाओं के प्रति किसानों का रुझान बढ़ा है. पीएम फसल बीमा योजना और मौसम आधारित बीमा योजना के तहत 7.73 लाख किसानों ने 16.18 लाख आवेदन किए हैं. गैर-ऋणी किसानों की भागीदारी में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई है और 8,412.90 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की फसलों को बीमा सुरक्षा मिली है.

नोएडा | Updated On: 1 Aug, 2026 | 04:00 PM

Andhra Pradesh News: आंध्र प्रदेश में खरीफ 2026 सीजन के दौरान फसल बीमा योजना के प्रति किसानों का रुझान तेजी से बढ़ा है. अब तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) और रीस्ट्रक्चर्ड वेदर बेस्ड क्रॉप इंश्योरेंस स्कीम (RWBCIS) के तहत 7.73 लाख किसानों ने 16.18 लाख बीमा आवेदन किए हैं. इनमें गैर-ऋणी (नॉन-लोनी) किसानों की भागीदारी में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखी गई है. इन योजनाओं के तहत 8,412.90 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की फसलों का बीमा किया गया है. इससे किसानों को सूखा, बाढ़, चक्रवात, कीटों के हमले और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा मिलेगी.

राज्य में अल नीनो के असर की आशंका को देखते हुए मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने किसानों से फसल बीमा  कराने की अपील की है. कृषि विभाग भी जागरूकता अभियान चला रहा है, ताकि अंतिम तिथि से पहले अधिक से अधिक किसान योजना का लाभ उठा सकें. पीएम फसल बीमा योजना के तहत अब तक 26 जिलों में 4.13 लाख से अधिक किसानों ने 8.71 लाख आवेदन किए हैं.

4.88 लाख हेक्टेयर फसल क्षेत्र का बीमा किया गया

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत आंध्र प्रदेश में इस खरीफ सीजन में 4.88 लाख हेक्टेयर फसल क्षेत्र का बीमा किया गया है. किसानों ने प्रीमियम के रूप में 31.73 करोड़ रुपये जमा किए हैं, जबकि बाकी प्रीमियम का भुगतान केंद्र और राज्य सरकार मिलकर करेंगी. इस साल योजना के तहत 4,511.67 करोड़ रुपये की फसलों का बीमा किया गया है, जो पिछले खरीफ सीजन  के 3,234.35 करोड़ रुपये से काफी अधिक है. हालांकि बीमा कराने वाले किसानों की संख्या पिछले साल के 4.52 लाख से घटकर 4.13 लाख रह गई है, लेकिन बीमित फसल क्षेत्र 3.37 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 4.88 लाख हेक्टेयर हो गया है. इससे पता चलता है कि इस बार ज्यादा खेती वाले क्षेत्र को बीमा सुरक्षा मिली है.

आवेदन 1.89 लाख से बढ़कर 6.40 लाख हो गए हैं

आंध्र प्रदेश में इस बार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत किसानों के जुड़ने का तरीका बदल गया है. पहले ज्यादातर किसान बैंक लोन लेने के साथ बीमा कराते थे, लेकिन अब बड़ी संख्या में किसान अपनी इच्छा से बीमा करा रहे हैं. खरीफ 2025 में जहां 10.35 लाख ऋणी (लोनी) आवेदन आए थे, वहीं इस बार यह घटकर 2.31 लाख रह गए हैं. दूसरी ओर, गैर-ऋणी (नॉन-लोनी) किसानों के आवेदन 1.89 लाख से बढ़कर 6.40 लाख हो गए हैं. किसानों की ओर से जमा किया गया प्रीमियम भी 25.02 करोड़ रुपये से बढ़कर 31.73 करोड़ रुपये हो गया है.

3.60 लाख किसानों ने 7.46 लाख आवेदन किए

वहीं, रीस्ट्रक्चर्ड वेदर बेस्ड क्रॉप इंश्योरेंस स्कीम (RWBCIS) के तहत 21 जिलों में अब तक 3.60 लाख किसानों ने 7.46 लाख आवेदन किए हैं. इस योजना के तहत 4.26 लाख एकड़ फसल क्षेत्र को बीमा सुरक्षा मिली है. किसानों ने 142.05 करोड़ रुपये प्रीमियम जमा किया है, जबकि केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर करीब 210 करोड़ रुपये का प्रीमियम दिया है. इस योजना के तहत बीमित राशि बढ़कर 3,901.23 करोड़ रुपये हो गई है, जो पिछले साल 3,661.51 करोड़ रुपये थी.

आवेदन 11,800 से बढ़कर 3.43 लाख हो गए हैं

इस योजना में भी गैर-ऋणी किसानों की भागीदारी तेजी से बढ़ी है. उनके आवेदन 11,800 से बढ़कर 3.43 लाख हो गए हैं, जबकि ऋणी किसानों के आवेदन 7.14 लाख से घटकर 4.03 लाख रह गए हैं. किसानों द्वारा जमा किया गया प्रीमियम भी 86.43 करोड़ रुपये से बढ़कर 142.05 करोड़ रुपये हो गया है. दोनों योजनाओं में फसल के अनुसार बीमा राशि अलग-अलग तय की गई है. पीएम फसल बीमा योजना  में धान के लिए 40,846 रुपये प्रति एकड़, उड़द के लिए 19,786 रुपये प्रति एकड़, हल्दी के लिए 96,000 रुपये प्रति एकड़ और लाल मिर्च के लिए 90,000 रुपये प्रति एकड़ तक का बीमा कवर उपलब्ध है.

75,000 रुपये प्रति एकड़ तक का बीमा कवर मिलता है

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) और मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS) में फसल और जिले के हिसाब से बीमा प्रीमियम अलग-अलग तय किया गया है. पीएमएफबीवाई के तहत किसानों को 76 रुपये से 2,880 रुपये प्रति एकड़ तक प्रीमियम देना होगा. वहीं, मौसम आधारित योजना में मूंगफली के लिए 29,000 रुपये प्रति एकड़ से लेकर अनार के लिए 75,000 रुपये प्रति एकड़ तक का बीमा कवर मिलता है. इसके अलावा कपास, केला, संतरा, टमाटर और नींबू जैसी फसलें भी इस योजना में शामिल हैं.

 

Published: 1 Aug, 2026 | 03:55 PM

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