धान किसानों को बड़ी छूट का ऐलान, उपज बेचने के लिए फार्मर आईडी अब जरूरी नहीं होगी 

Farmer ID not mandatory for paddy farmers : ओडिशा में कई जगहों पर किसानों के विरोध-प्रदर्शन के बाद धान किसानों के लिए AgriStack पहचान संख्या (ID) जरूरी नहीं होगी. इस फैसले को लागू करने के लिए खाद्य आपूर्ति और उपभोक्ता कल्याण विभाग समेत कृषि अधिकारियों को निर्देशित किया गया है.

नोएडा | Updated On: 20 Aug, 2026 | 11:49 AM

फार्मर आईडी के जरिए किसानों को खाद दी जा रही है, कृषि योजनाओं का लाभ दिया जा रहा और उपज बिक्री के लिए भी कुछ जगहों पर फार्मर आईडी जरूरी की गई है. ऐसे में ओडिशा में बड़ी संख्या में धान किसानों को अपनी उपज बिक्री के लिए फार्मर आईडी रोड़ा बन गई है. जिन किसानों के पास जमीन का मालिकाना हक नहीं है या बटाईदार हैं, उनकी फार्मर आईडी नहीं बनी है. ऐसे में ये किसान उपज बेचने से वचिंत होने की चिंता में थे, जिसके चलते वे विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. अब राज्य सरकार ने उनकी मांग मान ली है और धान की बिक्री के लिए फार्मर आईडी जरूरी होने को हटा दिया है, यानी जिनके पास फार्मर आईडी नहीं है या गलतियां हैं, वे भी एमएसपी पर अपनी उपज बेच सकेंगे. इस फैसले को लागू करने के लिए जिला खाद्य आपूर्ति एवं वितरण विभाग समेत कृषि अधिकारियों को निर्देशित किया गया है.

किसानों के प्रदर्शन के बाद सरकार ने दी राहत

ओडिशा सरकार के निर्देश के बाद कृषि विभाग ने कहा है कि कई जगहों पर किसानों के विरोध-प्रदर्शन के बाद धान खरीद प्रक्रिया में शामिल होने के लिए किसानों के लिए AgriStack पहचान संख्या (ID) जरूरी नहीं है. AgriStack केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से संयुक्त रूप से लागू की गई एक प्रमुख डिजिटल पहल है. इसका मकसद एक ऐसा एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाना है जहां हर किसान को एक यूनिक ‘किसान ID’ मिले, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं, फसल संबंधी सलाह, फसल बीमा, संस्थागत ऋण, इनपुट सब्सिडी और अन्य सेवाओं का आसानी से लाभ मिल सके.

क्यों किसानों की बढ़ गई थी मुश्किलें

बरगढ़ और बोलांगीर जिलों के धान किसानों ने बीते सोमवार को विरोध-प्रदर्शन किया था. उनका आरोप था कि आने वाले खरीफ फसल सीजन के लिए रजिस्ट्रेशन के दौरान AgriStack ID या फार्मर ID मांगी जा रही थी. बरगढ़ जिले के एक प्रदर्शनकारी किसान सुदाम पात्रा ने कहा कि सिर्फ उन्हीं किसानों को AgriStack ID मिल सकती है जिनके नाम पर खेती की जमीन है. ज्यादातर किसानों के पास अपनी जमीन का ‘रिकॉर्ड ऑफ राइट्स’ (RoR) नहीं है. इसके अलावा बटाईदार किसानों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

खाद्य आपूर्ति और उपभोक्ता कल्याण विभाग ने क्या कहा

विरोध-प्रदर्शन के बाद खाद्य आपूर्ति और उपभोक्ता कल्याण मंत्री कृष्ण चंद्र पात्रा ने संबलपुर, बरगढ़ और बोलांगीर जिलों के विधायकों के साथ बैठक की. इस बैठक में खरीफ सीजन में धान की खरीद के लिए रजिस्ट्रेशन के दौरान किसानों को आ रही दिक्कतों पर चर्चा हुई. बाद में मीडिया से बात करते हुए पात्रा ने कहा कि सरकार को धान बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन कराने वाले किसानों के लिए AgriStack जरूरी नहीं है.

उन्होंने कहा कि फार्मर ID न होने की वजह से किसी भी किसान का रजिस्ट्रेशन नहीं रुकेगा. सभी किसानों का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा और उन्हें टोकन दिए जाएंगे. पात्रा ने बताया कि बटाईदार किसानों के मामले में जमीन के मालिक की सहमति जरूरी है. जो मालिक विदेश में रहते हैं, वे एक खास ऐप के जरिए अपनी सहमति दे सकते हैं.

94 हजार धान किसानों ने कराया रजिस्ट्रेशन

अधिकारियों ने बताया कि इसी तरह बटाईदार किसानों के लिए भी खास दिशा-निर्देश तैयार किए जा रहे हैं और सरकार संभावित चुनौतियों को हल करने के लिए काम कर रही है.  अधिकारियों ने बताया कि अब तक खरीफ 2026-27 के लिए धान बेचने के लिए 94,657 किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया है. उन्होंने कहा कि किसानों को अब दो तरह की रजिस्ट्रेशन पर्चियां दी जा रही हैं एक एग्रीस्टैक (AgriStack) के साथ और दूसरी उसके बिना, और दोनों ही मान्य हैं. साथ ही किसान 31 अगस्त तक रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं.

Published: 20 Aug, 2026 | 11:42 AM

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