भयंकर सूखा संकट झेल रहे मराठवाड़ा के किसान! 3.5 लाख हेक्टेयर जमीन पर नहीं बोई जा सकीं फसलें

Marathwada drought crisis : कम बारिश के चलते मराठवाड़ा क्षेत्र के किसान 3.5 लाख हेक्टेयर जमीन पर फसलों की बुवाई नहीं कर सके हैं. इस रीजन में आने वाले 8 जिलों में जिन किसानों ने बुवाई की भी है, उनपर पर्याप्त सिंचाई सुविधाएं नहीं होने के चलते फसल सूखने का खतरा बढ़ गया है.

नोएडा | Updated On: 25 Aug, 2026 | 12:11 PM

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र के किसान सूखा संकट की स्थितियों से गुजर रहे हैं. यहां पर खेती बारिश पर निर्भर है और इस मॉनसून में बेहद कम बारिश ने फसलों की बुवाई का रकबा घटा दिया है. कम बारिश के चलते यहां के किसान 3.5 लाख हेक्टेयर जमीन पर फसलों की बुवाई नहीं कर सके हैं. इस रीजन में आने वाले 8 जिलों में जिन किसानों ने फसलों बुवाई की भी है, उनपर पर्याप्त सिंचाई सुविधाएं नहीं होने का असर सूखती फसलों के रूप में देखा जा रहा है.

सामान्य से 20 फीसदी कम बारिश से सूखे जैसे हालात

भारतीय मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में इस मानसून सीजन में अगस्त 2026 तक 586.1 मिमी बारिश की उम्मीद थी, जो 479.1 मिमी ही दर्ज की गई है. यहां बारिश सामान्य से लगभग 20.3 फीसदी कम हुई है. वहीं, इस इलाके में आगामी सितंबर और अक्तूबर में बारिश की संभावना भी न के बराबर है. ऐसे में यहां बारिश पर निर्भर कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान होने का खतरा मंडरा रहा है.

लातूर और परभणी में सबसे कम बारिश

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र कुल 8 जिले आते हैं. इनमें छत्रपति संभाजीनगर, जालना, बीड, हिंगोली, लातूर, नांदेड़, धाराशिव और परभणी शामिल हैं. कम बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में लातूर और परभणी हैं. परभणी में बारिश सामान्य से 34.7 फीसदी कम दर्ज की गई है. और लातूर में 40.6 फीसदी कम बारिश हुई है. इसी तरह अन्य जिलों में भी बारिश की कमी दर्ज की जा चुकी है.

3.5 लाख हेक्टेयर जमीन पर नहीं बोई जा सकीं फसलें

महाराष्ट्र कृषि विभाग के आंकड़ों अनुसार मॉनसून में कम बारिश के चलते इन इलाकों में बुवाई का रकबा इस साल करीब 3.5 लाख हेक्टेयर कम हो गया है. यानी इतनी जमीन पर किसान फसलों की बुवाई ही नहीं कर पाए हैं. इस साल बुवाई का रकबा 46.19 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले पांच वर्ष के 49.72 लाख हेक्टेयर के औसत से 7 फीसदी कम है. यह पिछले साल की तुलना में भी 2 लाख हेक्टेयर कम है.

कपास और गन्ना की बुवाई क्षेत्रफल घटा

कृषि विभाग के अनुसार कपास की खेती का रकबा 2.65 लाख हेक्टेयर घटकर 12.14 लाख हेक्टेयर रह गया है. वहीं, इस साल गन्ने की खेती का रकबा 5 साल के औसत 3.24 लाख हेक्टेयर से घटकर सिर्फ 43,821 हेक्टेयर रह गया है.

सोयाबीन, मक्का और सूरजमुखी पर किसान निर्भर

किसानों ने अब सोयाबीन, मक्का और सूरजमुखी की खेती पर जोर दिया है. सोयाबीन की खेती के रकबे में 12 फीसदी की वृद्धि हुई है और यह बढ़कर 25.74 लाख हेक्टेयर हो गया है. वहीं, मक्का का रकबा 5 फीसदी बढ़कर 2.68 लाख हेक्टेयर और सूरजमुखी का रकबा 39 फीसदी बढ़कर 2,289 हेक्टेयर हो गया है।

Published: 25 Aug, 2026 | 12:05 PM

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