आंधी-बारिश से बागवानी फसलों पर संकट, फफूंद रोग फैलने से उत्पादन घटने का खतरा

कृषि वैज्ञानिक एसके सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश, बिहार समेत कई हिस्सों में दो दिनों से रात में तेज आंधी और बारिश से बागवानी फसलों के उत्पादन पर खतरा मंडराने लगा है. सबसे ज्यादा नुकसान आम और लीची की फसल को हो रहा है. वहीं, पशुओं में भी बीमारियों के संक्रमण का खतरा बढ़ गया है.

नोएडा | Published: 30 May, 2026 | 12:09 PM

देश के कई हिस्सों में लगातार आंधी और बारिश का दौर बागवानी फसलों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. आम, लीची, केला, पपीता और सब्जियों जैसी फसलों पर इसका सबसे ज्यादा असर देखने को मिल रहा है. तेज हवाओं के कारण पेड़ों से फल समय से पहले गिर रहे हैं, जबकि बारिश से फलों की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है. इससे किसानों को उत्पादन और बाजार दोनों स्तरों पर नुकसान उठाना पड़ सकता है. वहीं, पशुपालकों के लिए भी बीमारियों और बाड़ा सुरक्षा पर खर्च बढ़ गया है.

बिहार स्थित राजेंद्र प्रसाद कृषि विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एसके सिंह ने किसान इंडिया को बताया कि उत्तर प्रदेश समेत कई हिस्सों में दो दिनों से रात में तेज आंधी और बारिश से बागवानी फसलों के उत्पादन पर खतरा मंडराने लगा है. सबसे ज्यादा नुकसान आम और लीची की फसल को हो रहा है. फलों के फटने और टूटकर गिरने से उत्पादन तो घट ही रहा है, किसानों का नुकसान हो रहा है. जबकि, केला और पपीता के साथ ही बेल वाली सब्जी फसलों पर आंधी बारिश का बुरा असर देखने को मिल रहा है.

दलहन फसलों के लिए फायदेमंद हुई बारिश

दलहन फसलों में मूंग और उड़द के लिए यह पानी ठीक है. मूंग और उड़द जैसी दलहनी फसलों के लिए इस समय हल्की से मध्यम बारिश आमतौर पर फायदेमंद मानी जाती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां बुवाई के बाद पर्याप्त नमी की जरूरत होती है. बारिश से मिट्टी में नमी बढ़ती है, जिससे बीजों का अंकुरण बेहतर होता है और शुरुआती वृद्धि को मदद मिलती है. इससे किसानों की सिंचाई पर निर्भरता और लागत भी कम हो सकती है. हालांकि, फफूंदजनित रोगों का खतरा भी है.

फफूंदजनित रोग बढ़ने से क्वालिटी खराब होने का खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि फलों के झड़ने और पौधों में नमी बढ़ने से कई तरह के फफूंदजनित रोग फैल सकते हैं. आम और लीची जैसी फसलों में फल सड़ने की समस्या बढ़ सकती है. कृषि वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है कि यदि मौसम का यह अस्थिर दौर लंबे समय तक जारी रहता है, तो बागवानी फसलों की पैदावार में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है.

गिरे फलों को बाग से तुरंत हटाएं

उत्पादन घटने की आशंका के बीच किसानों की चिंता भी बढ़ गई है. आम और लीची किसानों का कहना है कि उन्होंने फसल तैयार करने में भारी निवेश किया है, लेकिन मौसम की मार से उनकी मेहनत पर पानी फिर सकता है. कृषि विशेषज्ञ किसानों को बागों और खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था करने, गिरे हुए फलों को तुरंत हटाने और रोग नियंत्रण के लिए समय पर आवश्यक उपाय अपनाने की सलाह दे रहे हैं, ताकि नुकसान को कम किया जा सके.

पशुओं में रोग बढ़ने की चिंता से पशुपालक परेशान

आंधी और बारिश पशुपालकों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है. पशुपालकों को पशु शेड क्षतिग्रस्त होने, चारे के भीगने और नमी बढ़ने से पशुओं में संक्रमण, खुरपका-मुंहपका तथा श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. मौसम में अचानक बदलाव से दूध उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है, जिससे किसानों और पशुपालकों दोनों की आय प्रभावित होने की आशंका रहती है.

Topics: