गर्मी से फट रहे आम और लीची, बाग में तुरंत करें ये 3 उपाय… रस से भर जाएंगे फल

कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसके सिंह ने कहा कि फल के विकास के लिए आम और लीची में लगभग 35-38°C तापमान सबसे सही माना जाता है. लेकिन जब तापमान 40°C से ज्यादा हो जाता है, तो पौधों की सामान्य क्रियाएं प्रभावित होने लगती हैं. इस स्थिति में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया कम हो जाती है.

वेंकटेश कुमार
नोएडा | Updated On: 25 Apr, 2026 | 06:59 PM

Bihar News: उत्तर बिहार के प्रमुख फल उत्पादक जिले मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, मधुबनी, पूर्वी और पश्चिमी चंपारण, शिवहर, दरभंगा और समस्तीपुर इन दिनों भीषण गर्मी और लू की चपेट में हैं. 20 अप्रैल के बाद से यहां तापमान लगातार 40°C या उससे अधिक दर्ज किया जा रहा है, जो सामान्य से काफी ज्यादा है. मौसम पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले 10-15 दिनों में तापमान में और 2- 4 डिग्री की बढ़ोतरी हो सकती है. इससे लीची और आम के पैदावार पर असर पड़ सकता है. बिहार स्थित डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसके सिंह ने किसान इंडिया को बताया कि तेज गर्मी की वजह से लीची के फल छोटे रह रहे हैं, गुठली बड़ी हो रही है और गूदे की मात्रा भी कम हो गई है. इस स्थिति से किसानों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि अनुमान है कि उत्पादन में करीब 10 फीसदी तक की कमी आ सकती है.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में लगभग 1.65 लाख हेक्टेयर में आम और 36.5 हजार हेक्टेयर में लीची की खेती  होती है, जिससे कुल मिलाकर करीब 18.8 लाख टन उत्पादन होता है. लेकिन अगर इस तेज गर्मी के कारण सिर्फ 10 फीसदी उत्पादन भी घटता है, तो किसानों की आमदनी पर गंभीर असर पड़ेगा.

35-38°C तापमान सबसे सही माना जाता है

कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसके सिंह ने कहा कि फल के विकास के लिए आम और लीची में लगभग 35-38°C तापमान सबसे सही माना जाता है. लेकिन जब तापमान 40°C से ज्यादा हो जाता है, तो पौधों की सामान्य क्रियाएं प्रभावित होने लगती हैं. इस स्थिति में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया कम हो जाती है, क्योंकि स्टोमाटा बंद हो जाते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण घट जाता है. साथ ही पौधों की श्वसन दर बढ़ जाती है, जिससे वे ज्यादा ऊर्जा खर्च करने लगते हैं और फल का विकास रुक जाता है. उन्होंने कहा कि तेज गर्मी के कारण मिट्टी में नमी भी कम हो जाती है, जिससे पौधों की कोशिकाओं का विकास प्रभावित होता है. इसके परिणामस्वरूप फल झड़ने लगते हैं और जो फल बचते हैं उनमें गुठली बड़ी और गूदा कम विकसित होता है.

लीची में समस्या: गुठली का असामान्य विकास

  • लीची एक अत्यंत संवेदनशील फल है, जिस पर उच्च तापमान का सीधा असर पड़ता है.
  • 40°C से अधिक तापमान पर कोशिका विभाजन की प्रक्रिया धीमी हो जाती है.
  • फल के गूदे (अरिल) का विकास रुक जाता है, जबकि गुठली तेजी से बढ़ने लगती है.
  • इसके कारण फल छोटे, हल्के और कम रसदार हो जाते हैं.
  • कम आर्द्रता के कारण फल फटने (Fruit Cracking) की समस्या भी बढ़ जाती है, जो 10-25 फीसदी तक हो सकती है.
  • इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका रहती है.

अधिक तापमान के कारण फल झड़ने लगते हैं

डॉ. एसके सिंह ने बताया कि आम की फसल भी तेज गर्मी के प्रति बहुत संवेदनशील होती है. मटर और लौंग अवस्था में अधिक तापमान के कारण फल झड़ने लगते हैं. तेज धूप से फलों पर सनबर्न यानी काले धब्बे पड़ सकते हैं, जिससे उनकी गुणवत्ता खराब हो जाती है. इसके अलावा गर्मी बढ़ने से फलों में शर्करा का सही तरीके से संचय नहीं हो पाता, जिससे उनका स्वाद भी प्रभावित होता है. इसका असर अगले साल की फल उत्पादन क्षमता पर भी पड़ सकता है. हालिया अध्ययनों के अनुसार, 39- 42°C तापमान में आम की फसल में 15 से 30 प्रतिशत तक उत्पादन घट सकता है, खासकर तब जब सिंचाई का सही प्रबंधन न हो.

गर्मी से बचाने के लिए करें ये उपाय

कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसके सिंह ने कहा कि हालांकि, किसान कुछ वैज्ञानिक तरीके अपनाकर बागों को गर्मी से बचा सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले सिंचाई प्रबंधन पर ध्यान देना होगा, जिसमें गहरी और नियमित सिंचाई करनी चाहिए. ड्रिप सिंचाई  से 30- 40 फीसदी तक पानी की बचत होती है, जबकि लीची में स्प्रिंकलर लगाने से 3- 4 घंटे चलाने पर तापमान 4-5°C तक कम किया जा सकता है और फल फटने की समस्या भी घटती है.

पैदावार भी बेहतर होगी

उन्होंने कहा कि लू और गर्मी से फसल को बचाने के लिए मल्चिंग तरीका भी बेस्ट है. इस विधि में भूसा, पुआल या प्लास्टिक मल्च का उपयोग किया जाता है. इससे मिट्टी में नमी बनी रहती है, तापमान नियंत्रित रहता है और खरपतवार भी कम होते हैं. जबकि, तीसरा उपाय छायांकन और वायु अवरोध है. इसके लिए 35-50 फीसदी शेड नेट का इस्तेमाल किया जा सकता है और बाग के चारों ओर पेड़ लगाकर हवा को रोका जा सकता है. इससे खासकर छोटे पौधों को गर्मी से सुरक्षा मिलती है. यानी अगर किसान अपने बाग में ये तीनों तरीके अपनाते हैं, तो गर्मी का असर आम-लीची पर नहीं पड़ेगा और पैदावार भी बेहतर होगी.

 

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Published: 25 Apr, 2026 | 06:52 PM
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