ब्रिक्स देशों में भारत के पास सबसे ज्यादा खेती की जमीन, प्रति हेक्टेयर अनाज उत्पादन चीन से कम

BRICS देशों में भारत के पास सबसे ज्यादा खेती योग्य जमीन है, लेकिन प्रति हेक्टेयर अनाज उत्पादन चीन से काफी कम है. 2025 में चीन ने भारत से दोगुने से ज्यादा अनाज पैदा किया. हालांकि, भारत में धान, गेहूं और मक्का की उत्पादकता लगातार बढ़ रही है. इनमें मक्का की पैदावार में सबसे ज्यादा 27 फीसदी सुधार दर्ज हुआ है.

नोएडा | Updated On: 11 Sep, 2026 | 02:13 PM

ब्रिक्स देशों में भारत के पास सबसे ज्यादा खेती योग्य जमीन है. इसके बावजूद भारत के खेतों में प्रति हेक्टेयर अनाज का उत्पादन चीन के मुकाबले काफी कम है. चीन ब्रिक्स देशों में सबसे बड़ा अनाज उत्पादक है. 18 अगस्त को जारी ब्रिक्स संयुक्त सांख्यिकीय प्रकाशन के आंकड़ों के विश्लेषण से यह जानकारी सामने आई है. इससे पता चलता है कि भारत के सामने खेती का रकबा बड़ा होने के बावजूद उत्पादकता बढ़ाने की चुनौती बनी हुई है.

भारत में प्रमुख अनाज फसलों की प्रति हेक्टेयर पैदावार लगातार बढ़ रही है. इसके बावजूद भारत की उत्पादकता  चीन के मुकाबले काफी कम है. कृषि मंत्रालय के 2025-26 के अनुमान के मुताबिक, भारत में धान की पैदावार 2,915 किलो प्रति हेक्टेयर, गेहूं की 3,591 किलो और मक्का की 3,824 किलो प्रति हेक्टेयर है. वहीं, चीन में 2025 के दौरान धान की पैदावार 7,205 किलो, गेहूं की 5,940 किलो और मक्का की 6,700 किलो प्रति हेक्टेयर रही.

चीन का अनाज उत्पादन भारत से दोगुने से ज्यादा

BRICS के आंकड़ों के मुताबिक, चीन ने 2025 में 6602 लाख टन अनाज का उत्पादन किया, जो भारत के 3248 लाख टन उत्पादन से दोगुने से भी ज्यादा है. पूर्व कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी ने एक बयान में कहा कि भारत में कम उत्पादकता के पीछे कोई एक कारण नहीं है. अलग-अलग फसलों में उत्पादकता कम होने की वजह अलग हो सकती है. उन्होंने कहा कि सभी फसलों पर एक ही कारण लागू नहीं किया जा सकता.

चीन की तुलना में भारत में धान-गेहूं की पैदावार कम

पूर्व कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी के मुताबिक, धान की कम उत्पादकता की एक बड़ी वजह सिंचाई की स्थिति है. चीन में ज्यादातर धान की खेती सुनिश्चित सिंचाई वाले क्षेत्रों में होती है. वहीं, भारत में कुछ इलाकों में अच्छी सिंचाई सुविधा है, जबकि कई क्षेत्र बारिश पर निर्भर हैं.उन्होंने कहा कि पंजाब जैसे अच्छी सिंचाई वाले इलाकों में भारत की धान उत्पादकता चीन के बराबर है. भारत में बासमती जैसी देसी धान की किस्में भी उगाई जाती हैं. इनकी पैदावार हाइब्रिड किस्मों से कम होती है, लेकिन किसानों को इनसे ज्यादा कीमत मिलती है.

धान-गेहूं फसल चक्र से गेहूं की बुवाई में देरी, बढ़ते तापमान से पैदावार प्रभावित

गेहूं की पैदावार पर तापमान का भी असर पड़ता है. चतुर्वेदी ने कहा कि भारत में धान-गेहूं फसल चक्र के कारण कई बार गेहूं की बुवाई देर से होती है. इसके बाद बढ़ते तापमान की चपेट में आने से गेहूं की पैदावार प्रभावित हो सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि चीन में उगाई जाने वाली कई फसलें जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) हैं, जिससे वहां कुछ फसलों की उत्पादकता अधिक होने में मदद मिल सकती है.

भारत में अनाज की उत्पादकता बढ़ी, मक्का की पैदावार में सबसे ज्यादा सुधार

भारत में प्रमुख अनाज फसलों की उत्पादकता में लगातार सुधार हो रहा है. 2019-20 से 2025-26 के बीच धान की पैदावार 2,722 से बढ़कर 2,915 किलो प्रति हेक्टेयर हो गई. इसी तरह गेहूं की उत्पादकता 3,440 से बढ़कर 3,591 किलो और मक्का की 3,006 से बढ़कर 3,824 किलो प्रति हेक्टेयर हो गई. इनमें मक्का की उत्पादकता में सबसे ज्यादा करीब 27 फीसदी का सुधार हुआ है. वहीं, धान की पैदावार करीब 7 फीसदी और गेहूं की करीब 4 फीसदी बढ़ी है.

Published: 11 Sep, 2026 | 02:12 PM

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