48 डिग्री तापमान से झुलसने लगी आम की फसल, एक्सपर्ट ने बताए फल बचाने के उपाय

Mango Farming Heatwave Management: उत्तर भारत में बढ़ती हीट वेव आम किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है. तेज गर्मी के कारण आम के फलों में सनबर्न, समय से पहले गिरना, आकार छोटा रहना और क्वालिटी खराब होने जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं. कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.के. सिंह के अनुसार, सही बाग प्रबंधन से किसान उत्पादन, क्वालिटी और बाजार मूल्य बेहतर बनाए रख सकते हैं

नोएडा | Updated On: 25 May, 2026 | 07:32 PM

Mango Farming: उत्तर भारत में अप्रैल से जून के बीच पड़ने वाली तेज गर्मी अब आम उत्पादकों के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है. पिछले कुछ वर्षों में कई इलाकों में तापमान 45 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है. लगातार बढ़ती हीट वेव का असर आम की फसल पर साफ दिखाई देने लगा है. ऐसे में बिहार स्थित डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.के. सिंह ने किसान इंडिया (Kisan India) को बताया कि, मौसम विभाग ने साल 2026 में भी गंभीर हीट वेव की चेतावनी जारी की है. ऐसे में केवल सिंचाई करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि वैज्ञानिक तरीके से बाग प्रबंधन अपनाना बेहद जरूरी है.

हीट वेव का आम की फसल पर असर

जब तापमान लगातार 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना रहता है और गर्म हवाएं चलती हैं, तब आम के पेड़ों और फलों पर कई तरह के दुष्प्रभाव दिखाई देते हैं.

कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.के. सिंह के अनुसार, तेज धूप के कारण ‘सनबर्न’ की समस्या बढ़ रही है, जिससे बाजार में फलों की कीमत भी प्रभावित होती है.

बाग में नमी बनाए रखना है सबसे जरूरी

हीट वेव के दौरान मिट्टी में नमी की कमी आम के फलों के गिरने का बड़ा कारण बनती है. अगर जड़ों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंचे तो पौधे जल तनाव का शिकार हो जाते हैं.

क्या करें?

ड्रिप सिंचाई से मिट्टी का तापमान नियंत्रित रहता है और पानी की बचत भी होती है.

मल्चिंग से मिलेगी गर्मी से राहत

हीट वेव यानी तेज गर्मी से फसलों को बचाने के लिए मल्चिंग एक बहुत असरदार तरीका माना जाता है. इस तकनीक में पौधों के आसपास की मिट्टी को ढक दिया जाता है, जिससे मिट्टी ज्यादा गर्म नहीं होती और उसमें मौजूद नमी लंबे समय तक बनी रहती है.

मल्चिंग के लिए किसान धान का पुआल, सूखी घास, गन्ने की पत्तियां या सिल्वर और काली प्लास्टिक मल्च का इस्तेमाल कर सकते हैं. डॉ. एस.के. सिंह बताते हैं कि, सिल्वर मल्च का इस्तेमाल करने से मिट्टी का तापमान करीब 3 से 5 डिग्री तक कम किया जा सकता है, जिससे पौधों की बढ़वार बेहतर होती है और गर्मी का असर कम पड़ता है.

फलों को सीधे धूप से बचाना जरूरी

तेज धूप और ज्यादा गर्मी की वजह से फलों में सनबर्न की समस्या बढ़ जाती है. इसमें फल की ऊपरी सतह झुलस जाती है, दाग पड़ जाते हैं और उसकी क्वालिटी खराब हो जाती है. इसका सीधा असर बाजार कीमत पर पड़ता है और किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है.

इससे बचाव के लिए पेड़ों की जरूरत से ज्यादा छंटाई नहीं करनी चाहिए, ताकि फलों के ऊपर पर्याप्त पत्तियां बनी रहें और उन्हें धूप से सुरक्षा मिल सके. छोटे बागों में शेड नेट का इस्तेमाल करना भी फायदेमंद माना जाता है. इसके अलावा दक्षिण-पश्चिम दिशा में लगे फलों पर धूप का असर ज्यादा होता है, इसलिए उन्हें ज्यादा सुरक्षा देने की सलाह दी जाती है.

काओलिन स्प्रे बन रहा किसानों का सहारा

हीट वेव से बचाव के लिए काओलिन स्प्रे काफी प्रभावी माना जा रहा है. यह सूर्य की किरणों को परावर्तित कर पौधों का तापमान कम करने में मदद करता है.

इसके फायदे

विशेषज्ञ 5 प्रतिशत काओलिन घोल का छिड़काव अप्रैल के अंत से मई तक 15-20 दिन के अंतराल पर करने की सलाह देते हैं.

संतुलित पोषण भी है जरूरी

हीट वेव के दौरान पौधों को ज्यादा पोषण की जरूरत होती है. पोटाश, कैल्शियम, जिंक और बोरॉन जैसे तत्व पौधों की सहनशीलता बढ़ाने में मदद करते हैं. इसके अलावा जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट और ह्यूमिक एसिड का इस्तेमाल मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ाता है, जिससे पेड़ अधिक समय तक नमी बनाए रख पाते हैं.

किन गलतियों से बचना चाहिए?

Published: 25 May, 2026 | 04:49 PM

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