खेत परीत छोड़ने पर भी किसान को मिलेंगे प्रति एकड़ 8 हजार रुपये, गजब की है ये सरकारी योजना

हरियाणा सरकार ने ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना के तहत 1 लाख एकड़ में फसल विविधीकरण का लक्ष्य तय किया है. किसानों को धान की जगह वैकल्पिक फसलें उगाने पर 8,000 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन और 2,000 रुपये बोनस मिलेगा. योजना का उद्देश्य भूजल संरक्षण और कम पानी वाली खेती को बढ़ावा देना है.

नोएडा | Updated On: 24 May, 2026 | 07:49 AM

Haryana News: हरियाणा में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने और ज्यादा पानी की खपत वाली धान की खेती का रकबा कम करने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने इस साल ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ (MPMV) योजना के तहत 1 लाख एकड़ क्षेत्र को शामिल करने का लक्ष्य तय किया है. इस योजना के तहत किसानों को प्रति एकड़ 8,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी. इसके अलावा, जो किसान धान की जगह दलहन, तिलहन (तिल, अरंडी, मूंगफली) और कपास की खेती करेंगे, उन्हें 2,000 रुपये प्रति एकड़ का अतिरिक्त बोनस भी मिलेगा. सरकार की इस प्रमुख योजना के लिए सभी 22 जिलों के लिए अलग-अलग लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं.

योजना के तहत पात्र किसानों को धान की खेती के स्थान पर वैकल्पिक फसलें अपनाने पर प्रति एकड़ 8,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि  दी जाएगी. इसमें मक्का, कपास, अरहर, मूंग, मोठ, उड़द, ग्वार, सोयाबीन, खरीफ तिलहन फसलें (तिल, अरंडी और मूंगफली), चारा फसलें, खरीफ प्याज, बागवानी और सब्जियों की खेती शामिल है. इसके अलावा, पॉपलर और यूकेलिप्टस जैसे कृषि वानिकी (एग्रो-फॉरेस्ट्री) पौधों को लगाने वाले किसान भी इस लाभ के पात्र होंगे. यदि किसान अपनी जमीन को परती (खाली) छोड़ते हैं, तो उस स्थिति में भी उन्हें योजना के तहत प्रोत्साहन राशि का लाभ मिलेगा.

8,000 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि

कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, योजना के लाभार्थी किसानों को प्रति एकड़ 8,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि और चयनित फसलों पर मिलने वाला 2,000 रुपये प्रति एकड़ का अतिरिक्त बोनस डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए एकमुश्त किस्त में सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जाएगा. वर्ष 2026-27 के लिए फसल विविधीकरण और जल संरक्षण कार्यक्रम  के तहत सबसे बड़ा लक्ष्य सिरसा जिले को दिया गया है, जहां 18,000 एकड़ क्षेत्र को योजना में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके बाद यमुनानगर (12,000 एकड़), जींद (11,500 एकड़), फतेहाबाद (9,000 एकड़), कैथल (7,200 एकड़), करनाल (6,400 एकड़) और हिसार (6,000 एकड़) का स्थान है. सरकार का उद्देश्य किसानों को धान की जगह कम पानी वाली फसलें अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना और भूजल संरक्षण को बढ़ावा देना है.

किस जिले में कितनी खेती

इसी तरह अंबाला जिले को 5,000 एकड़, पलवल को 4,000 एकड़, पानीपत को 3,500 एकड़, हांसी को 2,800 एकड़ और सोनीपत को 2,600 एकड़ का लक्ष्य दिया गया है. अन्य जिलों के लिए उनकी कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुसार 100 से 2,200 एकड़ तक के लक्ष्य तय किए गए हैं. अंबाला के उप कृषि निदेशक डॉ जसविंदर सैनी ने ‘द ट्रिब्यून’ को बताया कि विभाग ने ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ (MPMV) योजना के लक्ष्य जारी कर दिए हैं और किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में धान की खेती का रकबा कम करना और भूजल स्तर के संरक्षण को बढ़ावा देना है.

जल स्तर को लेकर किसान चिंतित

भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के प्रवक्ता राकेश बैंस ने कहा कि किसान भी गिरते भूजल स्तर  को लेकर चिंतित हैं, लेकिन सरकार की ओर से दी जा रही प्रोत्साहन राशि किसानों को फसल बदलने के लिए पर्याप्त नहीं है. उन्होंने कहा कि सरकार को वैकल्पिक फसलों की पूरी उपज की एमएसपी पर खरीद सुनिश्चित करनी चाहिए और नुकसान की स्थिति में उचित मुआवजा भी देना चाहिए. उनका कहना है कि किसान वही फसल उगाएंगे, जिससे उन्हें बेहतर आय मिले. फिलहाल धान के मुकाबले वैकल्पिक फसलों से किसानों को उतना अच्छा मुनाफा नहीं मिल रहा है.

Published: 24 May, 2026 | 07:15 AM

Topics: