थार रेगिस्तान में खजूर की नई किस्म को मिली सफलता, कच्चा फल कसैला होने की बजाय मीठा

New Date Palm Variety : आमतौर पर मौसम अनुकूल नहीं होने से खजूर की अधिकतर वैरायटी थार के रेगिस्तान में पनप नहीं पाती. ऐसे में राजस्थान के बाड़मेर कृषि विज्ञान केन्द्र की ओर से स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप तैयार की गई आनंद रेड खजूर किस्म उगाने में सफलता मिली है.

नोएडा | Published: 9 Jun, 2026 | 04:08 PM

थार रेगिस्तान में खजूर की नई किस्म को उगाने और उत्पादन हासिल करने में कृषि वैज्ञानिकों को सफलता मिली है. बाड़मेर जिले के सूखे रेगिस्तान में स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने खजूर की नई किस्म रेड आनंद का उत्पादन हासिल करने में कामयाबी पाई है. इसके अलावा इसका कच्चा फल भी मीठा है, जबकि सामान्य खजूर का कच्चा फल कसैला होता है. वैज्ञानिक खजूर उत्पादन की दिशा में इसे बड़ी उपलब्धि बता रहे हैं.

आमतौर पर मौसम अनुकूल नहीं होने से खजूर की अधिकतर वैरायटी थार के रेगिस्तान में पनप नहीं पाती. ऐसे में राजस्थान के बाड़मेर कृषि विज्ञान केन्द्र की ओर से स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप तैयार की गई आनंद रेड खजूर किस्म उगाई गई. इसके उत्साहजनक नतीजों के साथ इन दिनों पैदावार भी शुरू हो चुकी है. जबकि, खजूर की दूसरी किस्में में जून के आखिरी सप्ताह तक कटाई के लिए तैयार होती हैं.

कच्चा फल कसैला होने की बजाय मीठा

कृषि विज्ञान केन्द्र दांता के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ विनय कुमार ने मीडिया को बताया कि जुलाई में मानसून आने से पहले आनंद रेड खजूर किस्म अच्छी तरह से पक जाती है. इससे आर्द्रता के कारण इसके खराब होने की आशंका नहीं रहती. उन्होंने कहा कि आमतौर पर कच्चे खजूर कसैले होते होते हैं लेकिन आनंद रेड के फल शुरुआती अवस्था में भी बहुत मीठे होते हैं. ऐसे में कच्चे फल को ही तोड़कर खाया जा सकता है.

गुजरात, राजस्थान के गर्म इलाकों के लिए अनुकूल

डॉ. विनय कुमार ने कहा कि यह खास किस्म विशेष तौर पर राजस्थान और गुजरात में उगाए जाने के लिए अनुकुल है. उन्होंने कहा कि शुष्क गर्म जलवायु और रेतीले मिट्टी वाले क्षेत्र जैसे बाड़मेर, जैसलमेर और कच्छ के लिए में इसकी खेती किसानों को बंपर पैदावार दे सकती है. उन्होंने कहा कि इच्छुक किसान स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करके इसकी खेती का तरीका सीख सकते हैं.

कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारी डॉ. विनय कुमार ने नई किस्म की जानकारी दी.

टिश्यू कल्चर से तैयार किया गया बीज

कृषि वैज्ञानिक ने कहा कि आनंद रेड खजूर किस्म को टिशू कल्चर विधि से तैयार किया गया है. इसके बीजों को प्रयोगशाला से सीधे खेतों में बोया गया है. इसकी वजह से इसके पौधे रोग मुक्त होते हैं. टिश्यू कल्चर से तैयार पौधे रोपण से उसे 2 वर्षों के भीतर फल देना शुरू कर देते हैं और एक परिपक्व पेड़ से हर साल भारी मात्रा में खजूर का उत्पादन मिलना शुरू हो जाता है. ऐसे में स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूलता के कारण किसानों के लिए यह वरदान साबित हो सकती है.

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