जेल में कैदियों ने जैविक खेती से उगाईं 661 क्विंटल सब्जियां, 21 एकड़ में खेती कर रहे 82 बंदी
Noida Jail Prisoners are opt Organic Farming: जेल अधीक्षक ने कहा कि पिछले एक साल में लुक्सर कारागार से 681 क्विंटल 90 किलोग्राम सब्जियां प्रदेश के अन्य जिलों की जेलों को भेजी गई हैं. उन्होंने बताया कि आलू, गोभी समेत अन्य मौसमी सब्जियों की जैविक खेती कैदी कर रहे हैं.
नोएडा की जिला जेल में बंद कैदी जैविक खेती करके सब्जियां उगा रहे हैं. इन सब्जियों को अन्य जिलों के जेलों में बिक्री किया जा रहा है. जिला कारागार प्रशासन ने विज्ञप्ति जारी कर बताया कि कैदियों ने एक साल में 681 क्विंटल से अधिक सब्जियां उगाई हैं, जिन्हें कैदियों के खाने में इस्तेमाल किया जा रहा है और अन्य शहरों की जेलों में भी सप्लाई कराया गया है. कैदियों को पुनर्वास की दिशा में इस पहल को सराहा जा रहा है.
जैविक तरीके से जेल में खेती कर रहे कैदी
गौतमबुद्ध नगर के लुक्सर स्थित जिला कारागार में कैदी सब्जियों की खेती कर आत्मनिर्भरता और पुनर्वास की दिशा में नई मिसाल पेश कर रहे हैं. जेल परिसर में उगाई जा रही ताजा सब्जियों का उपयोग जहां बंदियों के भोजन में किया जा रहा है, वहीं उनकी आपूर्ति प्रदेश के अन्य जिलों की जेलों में भी की जा रही है. यह सब्जियां पूरी तरह जैविक तरीके से उगाई जा रही हैं.
एक साल में कैदियों ने उगाई 681 क्विंटल सब्जियां
जेल अधीक्षक बृजेश कुमार ने शुक्रवार को मीडिया को बताया कि पिछले एक साल में लुक्सर जिला कारागार से 681 क्विंटल 90 किलोग्राम सब्जियां प्रदेश के अन्य जिलों की जेलों को भेजी गई हैं. उन्होंने बताया कि आलू, गोभी, पत्तागोभी, पालक, गाजर, मूली, गांठगोभी, लौकी, तोरई, भिंडी, कद्दू, अरबी, टमाटर, शलजम और बैंगन सहित विभिन्न मौसमी सब्जियों की खेती की जा रही है.
21 एकड़ जमीन पर रोजाना 4 क्विंटल सब्जियों का उत्पादन
जेल अधीक्षक ने बताया कि जिला जेल परिसर में 21.50 एकड़ भूमि पर सब्जियों की खेती की जा रही है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में 82 बंदी खेती और सब्जी उत्पादन के कार्य से जुड़े हुए हैं. यहां हर रोज लगभग चार कुंतल सब्जियों का उत्पादन हो रहा है. इस पहल के माध्यम से बंदियों को श्रम, अनुशासन और आत्मनिर्भरता का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जो उनके पुनर्वास और भविष्य में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.
कैदियों को भविष्य के लिए व्यावसायिक कौशल सिखा रहा जेल
जेल अधीक्षक के अनुसार उत्पादित ताजी सब्जियों का उपयोग सबसे पहले जेल में निरुद्ध बंदियों के भोजन के लिए किया जाता है. अतिरिक्त उत्पादन प्रदेश के अन्य कारागारों की जरूरत पूरी करने के लिए भेजा जाता है. उन्होंने कहा कि खेती से जुड़े कार्यों के माध्यम से बंदियों को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें व्यावसायिक कौशल भी सिखाया जा रहा है, जिससे वे भविष्य में आत्मनिर्भर जीवन की ओर अग्रसर हो सकें.