लखनऊ से निकलेगा खेती-किसानी का नया रोडमैप, केसीसी लोन और दलहन पर कई घोषणाएं होंगी
Agriculture Conference Lucknow: कृषि सम्मेलन में उत्तर प्रदेश गन्ने के साथ इंटर क्रॉपिंग और धान की सीधी बुवाई जैसी महत्वपूर्ण पहलों को पेश करेगी. हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सर्वोत्तम पद्धतियों पर भी प्रस्तुतियां होंगी, जिससे उत्तर भारत में कृषि सुधार और अनुभव-साझेदारी की एक सकारात्मक दिशा मजबूत होती दिख रही है.
केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अगुवाई में कृषि विकास को नई रफ्तार देने के लिए उत्तर क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन 24 अप्रैल को लखनऊ में होने जा रहा है. इस दौरान सीएम योगी और शिवराज सिंह की मौजूदगी में खेती-किसानी का नया रोडमैप जारी किया जाएगा. यहां पर खेती से बाजार तक समग्र सुधार पर फोकस के साथ ही किसान समृद्धि के नए मॉडल पर मंथन होगा. जबकि, किसान क्रेडिट कार्ड, कृषि लोन, बागवानी, दलहन, तिलहन और डिजिटल कृषि पर कई बड़ी घोषणाएं संभव हैं. देशभर से किसान, एफपीओ और कृषि क्षेत्र से जुड़े दिग्गज हिस्सा ले रहे हैं. वहीं, 6 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों के कृषि एवं बागवानी मंत्रियों के साथ ही वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक भी मौजूद रहेंगे.
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ शुक्रवार को कृषि नीति और किसान हित के साथ ही समग्र कृषि विकास के बड़े विमर्श का केंद्र बनने जा रही है, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी पूरे आयोजन को राष्ट्रीय महत्व देगी. उत्तर क्षेत्र सम्मेलन का आयोजन होटल सेंट्रम, लखनऊ में 24 अप्रैल को किया जा रहा है, जहां शुरुआत केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के उद्घाटन भाषण और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संबोधन से होगी. इस सम्मेलन को केवल खेती को नई सोच, नई तकनीक और नए बाजारों से जोड़ने वाले मंच के रूप में देखा जा रहा है.
नवाचारों को फाइलों से जमीन पर उतारने पर फोकस
दिनभर चलने वाले विषयगत सत्रों में किसान क्रेडिट कार्ड, एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड, बागवानी की संभावनाएं, दलहन आत्मनिर्भरता मिशन, राष्ट्रीय खाद्य तेल-तिलहन मिशन और डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत किसान रजिस्ट्री जैसे विषयों पर चर्चा होगी. इन सत्रों में छह राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों (उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) के कृषि तथा बागवानी मंत्री शामिल होंगे, वहीं प्रगतिशील किसानों, केवीके, स्टार्टअप, एफपीओ, वैज्ञानिकों, नाबार्ड, बैंक भी जुटेंगे. सम्मेलन का फोकस केवल फाइलों तक सीमित नहीं, बल्कि जमीन से जुड़ी चुनौतियों और समाधान पर रहेगा.
यूपी, हरियाणा, पंजाब समेत कई राज्य खेती मॉडल पेश करेंगे
उत्तर प्रदेश सरकार गन्ने के साथ इंटर क्रॉपिंग और धान की सीधी बुवाई जैसी अपनी महत्वपूर्ण पहलों को प्रस्तुत करेगी, जो राज्य की कृषि नवाचार क्षमता को राष्ट्रीय मंच पर रेखांकित करेगी. साथ ही हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सर्वोत्तम पद्धतियों पर भी प्रस्तुतियां होंगी, जिससे उत्तर भारत में कृषि सुधार और अनुभव-साझेदारी की एक सकारात्मक दिशा मजबूत होती दिख रही है.
कीटनाशक, खाद के इस्तेमाल पर सटीक जानकारी देंगे वैज्ञानिक
सम्मेलन में नकली कीटनाशकों और उर्वरकों पर नियंत्रण, उर्वरकों की कालाबाजारी रोकना, प्रभावी वितरण व्यवस्था और संतुलित उपयोग बढ़ाने जैसे मुद्दे भी शामिल हैं. आईसीएआर की ओर से एकीकृत कृषि प्रणाली पर प्रस्तुति आयोजन को महत्वपूर्ण बनाती है, क्योंकि इससे छोटे और सीमांत किसानों के लिए टिकाऊ और बहुआयामी खेती मॉडल पर जोर मिलने की उम्मीद है. समापन सत्र में उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री श्री सूर्यप्रताप शाही सहित विभिन्न राज्यों के कृषि और बागवानी मंत्रियों के संबोधन के बाद केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का मुख्य समापन वक्तव्य होगा.