3 लाख एकड़ में होगी धान की बुवाई, फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा.. किसानों से DSR तकनीक अपनाने की अपील

हरियाणा में खरीफ सीजन 2026 के दौरान धान की बुवाई तेजी से बढ़ रही है. सोनीपत और पानीपत में DSR तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे पानी की बचत और लागत में कमी आती है. वहीं, ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना के तहत फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित कर भूजल संरक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है.

नोएडा | Updated On: 27 Jun, 2026 | 01:20 PM

Agriculture News: हरियाणा में धान की रोपाई तेज हो गई है. खरीफ सीजन 2026 के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने सोनीपत में 3.40 लाख एकड़ और पानीपत में 1.82 लाख एकड़ क्षेत्र में धान की खेती का लक्ष्य तय किया है. हालांकि, धान के बढ़ते रकबे को देखते हुए विभाग ने डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस (DSR) तकनीक से धान की बुवाई को भी बढ़ावा देने का फैसला किया है. इसके तहत सोनीपत में 20,000 एकड़ और पानीपत में 30,000 एकड़ क्षेत्र में DSR तकनीक अपनाने का लक्ष्य रखा गया है. इस तकनीक से पानी की बचत होगी और खेती की लागत भी कम होगी.

वहीं, भूजल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार की ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ (MPMV) योजना के तहत फसल विविधीकरण पर भी जोर दिया जा रहा है. योजना के तहत धान की जगह दलहन, तिलहन और कपास जैसी फसलों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा. राज्य में एक लाख एकड़ क्षेत्र को फसल विविधीकरण के दायरे में लाने का लक्ष्य रखा गया है. इसमें सोनीपत को 2,600 एकड़ और पानीपत को 3,500 एकड़ का लक्ष्य दिया गया है.

3.40 लाख एकड़ में धान की खेती

सोनीपत के उप कृषि निदेशक (DDA) वीरेंद्र आर्य ने ‘द ट्रिब्यून’ को बताया कि जिले में करीब 4.02 लाख एकड़ कृषि भूमि है, जिसमें से लगभग 3.40 लाख एकड़ क्षेत्र में धान की खेती की जाती है. इसी वजह से धान जिले की सबसे प्रमुख खरीफ फसल बन गई है. उन्होंने कहा कि धान के अलावा जिले में करीब 25,000 एकड़ में गन्ना, 10,000 एकड़ में बाजरा, 4,000 एकड़ में पशु चारा और लगभग 2,000 एकड़ में कपास की खेती होती है.

करीब 50,000 एकड़ क्षेत्र में कपास की खेती

वीरेंद्र आर्य के अनुसार, एक समय सोनीपत में करीब 50,000 एकड़ क्षेत्र में कपास की खेती होती थी. लेकिन पिछले 12 से 15 वर्षों के दौरान गुलाबी सुंडी (पिंक बॉलवर्म) और विल्ट रोग के लगातार प्रकोप से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा. इसके चलते किसानों ने धीरे-धीरे कपास की खेती छोड़कर अन्य फसलों की ओर रुख कर लिया. सोनीपत के उप कृषि निदेशक वीरेंद्र आर्य ने कहा कि किसानों को ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ (MPMV) योजना से जोड़ने के लिए विभाग ने जागरूकता अभियान शुरू किया है. पिछले एक महीने में कृषि अधिकारियों ने करीब 80 गांवों का दौरा कर किसानों को फसल विविधीकरण और भूजल संरक्षण के फायदे बताए हैं.

वहीं, पानीपत और करनाल के उपमंडल कृषि अधिकारी (SDO) देवेंद्र कुहार ने कहा कि किसान बदलती जलवायु परिस्थितियों  और अल नीनो के कारण कमजोर मॉनसून की आशंका को लेकर जागरूक हैं. इसी वजह से इस साल अधिक किसान धान की खेती के लिए डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस (DSR) तकनीक अपना रहे हैं. उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों की तुलना में इस सीजन DSR तकनीक अपनाने वाले किसानों की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है. कृषि विभाग का मानना है कि यह तकनीक पानी बचाने के साथ-साथ खेती की लागत कम करने में भी मददगार साबित होगी.

पानीपत जिले में कुल कृषि योग्य क्षेत्र करीब 2.42 लाख एकड़

पानीपत जिले में कुल कृषि योग्य क्षेत्र करीब 2.42 लाख एकड़ है. कृषि विभाग ने खरीफ सीजन  2026 के लिए 1.82 लाख एकड़ क्षेत्र में धान की खेती का लक्ष्य तय किया है. पानीपत के उप कृषि निदेशक (DDA) बलवंत सिंह ने कहा कि पिछले खरीफ सीजन 2025-26 में जिले में 1.84 लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र में धान की खेती हुई थी. उन्होंने बताया कि पिछले साल 28,500 एकड़ में गन्ने की खेती की गई थी, जबकि इस सीजन इसका लक्ष्य बढ़ाकर 29,000 एकड़ कर दिया गया है.

SR के दायरे में आया 6,000 एकड़ क्षेत्र

बलवंत सिंह के अनुसार, पिछले साल इसी अवधि तक किसानों ने केवल 1,731 एकड़ क्षेत्र में डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस (DSR) तकनीक अपनाई थी, जबकि इस बार अब तक लगभग 6,000 एकड़ क्षेत्र DSR के दायरे में आ चुका है. इससे स्पष्ट है कि किसानों का रुझान इस तकनीक की ओर तेजी से बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ (MPMV) योजना के तहत पिछले सीजन में किसानों ने 564 एकड़ क्षेत्र में फसल विविधीकरण अपनाया था. वहीं, इस वर्ष अब तक करीब 1,200 एकड़ क्षेत्र में धान की जगह अन्य फसलें बोई जा चुकी हैं.

 

Published: 27 Jun, 2026 | 01:18 PM

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