यूपी में गन्ना किसानों का फूटा गुस्सा, बकाया भुगतान को लेकर किया प्रदर्शन, सरकार को दी चेतावनी
पीलीभीत में गन्ना भुगतान में देरी से नाराज किसानों ने प्रदर्शन कर बकाया राशि और मझोला चीनी मिल को दोबारा शुरू करने की मांग की. वहीं, चीनी उद्योग का कहना है कि उत्पादन लागत के मुकाबले चीनी की कम कीमतों से मिलों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है, जिससे भुगतान प्रभावित हो रहा है.
Sugarcane Farmers: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में गन्ना किसानों को समय पर भुगतान नहीं हो रहा है. ऐसे में नाराज गन्ना किसानों ने बकाया भुगतान की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया. कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार के नेतृत्व में हजारों किसान गन्ना राज्य मंत्री संजय सिंह गंगवार की कोठी पहुंचे और सरकार व चीनी मिलों के खिलाफ नारेबाजी की. किसानों का कहना है कि समय पर भुगतान न मिलने से वे आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं. साथ ही उन्होंने बंद पड़ी मझोला चीनी मिल को दोबारा शुरू करने की मांग भी उठाई.
वहीं, सिटी मजिस्ट्रेट विजय वर्धन तोमर ने कहा कि नवाबगंज क्षेत्र के कुछ किसान मंत्री के आवास के पास एकत्र हुए थे. किसानों की मुख्य मांग कई वर्षों से बंद पड़ी एक चीनी मिल से जुड़े बकाया भुगतान को जारी कराने की थी. प्रशासन के अनुसार, संबंधित कंपनी की नीलामी प्रक्रिया पूरी होने के बाद किसानों के लंबित गन्ना भुगतान का निपटारा किया जाएगा.
इस बीच, इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन का कहना है कि चालू चीनी सीजन 2025-26 में देश का चीनी उत्पादन बढ़ा है. 15 अप्रैल तक देश में 274.8 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ, जो पिछले वर्ष इसी अवधि के 254.96 लाख टन उत्पादन की तुलना में करीब 8 प्रतिशत अधिक है. वहीं, उत्तर प्रदेश में 15 अप्रैल तक 89.26 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ. हालांकि यह पिछले साल इसी अवधि के 91.10 लाख टन उत्पादन से थोड़ा कम है. इसके बावजूद राज्य देश के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में बना हुआ है.
क्या बोले दीपक बल्लानी
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने ‘इकोनॉमिक टाइम्स’ से कहा कि चीनी उद्योग की आय बढ़ाने की अभी भी गुंजाइश है. उनका कहना है कि प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में मिलों से बिकने वाली चीनी (एक्स-मिल) की मौजूदा कीमतें उत्पादन लागत से कम बनी हुई हैं. ऐसे में चीनी मिलों को पर्याप्त लाभ नहीं मिल पा रहा है और उद्योग पर आर्थिक दबाव बना हुआ है. उन्होंने संकेत दिया कि यदि चीनी की कीमतों में सुधार होता है, तो इससे चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और किसानों के गन्ना भुगतान जैसी समस्याओं के समाधान में भी मदद मिल सकती है.
क्या कीमत में हो सकती है बढ़ोतरी
दीपक बल्लानी ने कहा कि देश में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी की अभी गुंजाइश है. उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में मिलों से बिकने वाली चीनी (एक्स-मिल) की कीमत करीब 41 से 41.50 रुपये प्रति किलो है, जबकि महाराष्ट्र में यह लगभग 39 रुपये प्रति किलो है. दूसरी ओर, चीनी उत्पादन की अनुमानित लागत करीब 42 रुपये प्रति किलो पड़ रही है. ऐसे में कई चीनी मिलों को उत्पादन लागत के मुकाबले कम कीमत मिल रही है. उन्होंने कहा कि जब तक चीनी मिलों को उनकी चीनी का उचित मूल्य नहीं मिलेगा, तब तक किसानों को समय पर गन्ना भुगतान करना मुश्किल बना रहेगा. उनका कहना है कि निर्यात पर प्रतिबंध जैसे कदमों के बावजूद चीनी की कीमतें काफी हद तक स्थिर बनी हुई हैं और पिछले एक दशक में चीनी की महंगाई अन्य कई वस्तुओं की तुलना में काफी कम रही है.
अभी कितनी है चीनी की कीमत
बल्लानी के अनुसार, वर्तमान में खुदरा बाजार में चीनी की कीमत लगभग 46.50 से 47 रुपये प्रति किलो है. उन्होंने यह भी कहा कि जब-जब गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) बढ़ाया जाता है, तब चीनी की बिक्री से मिलने वाली आय में भी उसी अनुपात में वृद्धि होनी चाहिए. इससे चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जा सकेगा.