सस्ती और घटिया विदेशी चाय पर लगेगा ब्रेक, अब हर खेप की होगी 100 फीसदी गुणवत्ता जांच

बोर्ड के अनुसार नेपाल और वियतनाम जैसे देशों से सस्ती और कम गुणवत्ता वाली चाय भारत में पहुंच रही है. ये चाय कीमत में भले ही सस्ती हो, लेकिन गुणवत्ता के लिहाज से भारतीय मानकों पर खरी नहीं उतरती. ऐसी चाय के कारण घरेलू उत्पादकों को नुकसान उठाना पड़ता है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 4 Jan, 2026 | 08:41 AM

Imported tea: देश की चाय उद्योग को लंबे समय से जिस समस्या ने परेशान कर रखा था, उस पर अब सख्ती से कार्रवाई की तैयारी हो गई है. भारत में सस्ती और घटिया गुणवत्ता वाली आयातित चाय की बढ़ती आवक को रोकने के लिए टी बोर्ड ऑफ इंडिया ने बड़ा फैसला लिया है. बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि अब विदेश से आने वाली चाय की हर खेप की 100 प्रतिशत गुणवत्ता जांच की जाएगी, ताकि देश के बाजार में खराब गुणवत्ता की चाय न पहुंच सके और घरेलू चाय उद्योग को नुकसान से बचाया जा सके.

उद्योग की शिकायतों के बाद सख्त कदम

चाय उद्योग लंबे समय से यह शिकायत कर रहा था कि पड़ोसी देशों से सस्ती और कम गुणवत्ता वाली चाय बिना पर्याप्त जांच के भारत में आ रही है. इससे न केवल बाजार में भारतीय चाय की कीमतों पर दबाव पड़ रहा है, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाली भारतीय चाय, खासकर दार्जिलिंग जैसी प्रीमियम चाय की पहचान भी प्रभावित हो रही है. इन्हीं चिंताओं को देखते हुए बोर्ड ने अब आयात नीति को और कड़ा करने का निर्णय लिया है.

डिप्टी चेयरमैन ने दी स्पष्ट जानकारी

बिजनेस साइन की खबर के अनुसार, चाय बोर्ड के उपाध्यक्ष सी. मुरुगन ने कोलकाता में आयोजित टी एसोसिएशन ऑफ इंडिया (TAI) की द्विवार्षिक आम बैठक के दौरान यह भरोसा दिलाया कि अब गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा. उन्होंने कहा कि बोर्ड आयातित चाय की 100 प्रतिशत जांच के लिए जरूरी प्रक्रिया को अंतिम रूप दे रहा है. इसके लिए आवश्यक ढांचा तैयार किया जा रहा है, जिसमें करीब 15 से 20 दिन का समय लगेगा. इसके बाद कानूनी राय ली जाएगी और फिर वाणिज्य मंत्रालय से अंतिम मंजूरी प्राप्त की जाएगी.

किन देशों से आ रही है सस्ती चाय

बोर्ड के अनुसार नेपाल और वियतनाम जैसे देशों से सस्ती और कम गुणवत्ता वाली चाय भारत में पहुंच रही है. ये चाय कीमत में भले ही सस्ती हो, लेकिन गुणवत्ता के लिहाज से भारतीय मानकों पर खरी नहीं उतरती. ऐसी चाय के कारण घरेलू उत्पादकों को नुकसान उठाना पड़ता है और किसानों व बागान मालिकों की आय पर भी असर पड़ता है.

नीलामी व्यवस्था में बोर्ड की बदली भूमिका

डिप्टी चेयरमैन ने यह भी साफ किया कि चाय बोर्ड नीलामी प्रणाली में सीधे हस्तक्षेप नहीं करेगा, बल्कि एक सुविधादाता की भूमिका निभाएगा. इसका मकसद उद्योग को ज्यादा स्वतंत्रता देना और अनावश्यक नियंत्रण कम करना है. बोर्ड का फोकस अब नियमन से ज्यादा सहयोग और मार्गदर्शन पर रहेगा, ताकि उद्योग अपने स्तर पर मजबूत हो सके.

विदेशी बाजारों में भारतीय चाय का प्रचार

चाय बोर्ड अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय चाय के प्रचार पर भी जोर देगा. बोर्ड की योजना है कि अलग-अलग देशों में भारतीय चाय की ब्रांडिंग और सामान्य प्रचार को बढ़ाया जाए, ताकि निर्यात को मजबूती मिले और वैश्विक बाजार में भारतीय चाय की पहचान और मजबूत हो.

छोटे चाय उत्पादकों को भी मिलेगा लाभ

चाय विकास और संवर्धन योजना 2026 के तहत अगले पांच वर्षों के लिए करीब 1,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इस योजना का लाभ छोटे चाय उत्पादकों तक भी पहुंचाया जाएगा. इससे छोटे किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर पौध सामग्री और उत्पादन सुधार में मदद मिलेगी.

पश्चिम बंगाल में चाय उद्योग की चुनौतियां

बैठक में पश्चिम बंगाल के श्रम सचिव अवनिंद्र सिंह ने भी चाय उद्योग की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि नेपाल से आने वाली घटिया चाय खासकर दार्जिलिंग चाय उद्योग को नुकसान पहुंचा रही है. उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में कई बंद और बीमार चाय बागानों की जमीन बेहद सस्ते दामों पर ऐसे लोग खरीद रहे हैं, जिन्हें चाय उद्योग का कोई अनुभव नहीं है.

श्रमिकों की भागीदारी से बचेगा उद्योग

अवनिंद्र सिंह ने सुझाव दिया कि बंद पड़े चाय बागानों को उद्योग से जुड़े लोग ही आगे आकर संभालें और श्रमिकों को इक्विटी देकर प्रबंधन में भागीदार बनाएं. इससे श्रमिकों में स्वामित्व की भावना आएगी और बागानों का भविष्य सुरक्षित होगा. उन्होंने यह भी कहा कि मजदूरी और वैधानिक बकाया भुगतान में हो रही देरी को जल्द दूर किया जाना चाहिए.

उद्योग की एकजुट मांग

टीएआई के अध्यक्ष संदीप सिंघानिया ने कहा कि शुल्क-मुक्त सस्ती चाय का आयात तेजी से बढ़ा है और इसे नियंत्रित करना दार्जिलिंग सहित पूरे भारतीय चाय उद्योग के अस्तित्व के लिए बेहद जरूरी है. उनके अनुसार, 100 प्रतिशत गुणवत्ता जांच का फैसला उद्योग के लिए राहत भरा कदम है.

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