Duck Fish Farming: अगर आपसे कहा जाए कि एक ही खर्च में बत्तख पालन के साथ मछली पालन भी हो सकता है, तो शायद यकीन करना मुश्किल लगे. लेकिन यह तरीका पूरी तरह संभव है और किसान इसे अपनाकर अच्छी कमाई कर रहे हैं. इस तकनीक में बत्तख और मछली दोनों को एक ही तालाब में पाला जाता है. खास बात यह है कि इसमें ज्यादा मशीन, बड़ी तकनीक या भारी खर्च की जरूरत नहीं होती. यह तरीका छोटे और मध्यम किसानों के लिए कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाला साबित हो सकता है.
कैसे काम करता है यह तरीका?
जब बत्तखों को मछलियों से भरे तालाब में छोड़ा जाता है, तो वे पानी में तैरती रहती हैं और तालाब की गंदगी खा लेती हैं. इससे तालाब की सफाई अपने आप होती रहती है. बत्तखों के तैरने से पानी में हलचल होती है, जिससे ऑक्सीजन का स्तर बना रहता है. इसका सीधा फायदा मछलियों को मिलता है और उनका विकास तेजी से होता है. इतना ही नहीं, बत्तखों का मल मछलियों के लिए प्राकृतिक भोजन का काम करता है. इससे मछलियों को अलग से ज्यादा दाना देने की जरूरत कम पड़ती है. यानी फीड और साफ-सफाई पर होने वाला खर्च काफी घट जाता है.
पालन करते समय किन बातों का रखें ध्यान
अगर आप बत्तख और मछली पालन का यह मॉडल अपनाना चाहते हैं, तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखें. तालाब में बहुत छोटे स्पॉन डालने की बजाय फिंगरलिंग डालें, क्योंकि छोटे बच्चे बत्तख खा सकती हैं. एक एकड़ तालाब में लगभग 4 से 5 हजार फिंगरलिंग डालना सही रहता है. बत्तखों के लिए घास, बरसीम, जई, सब्जियों के छिलके, धान की भूसी और मिनरल मिक्सचर अच्छा आहार है. जरूरत पड़े तो बाजार का तैयार दाना भी दे सकते हैं. साफ पानी, संतुलित आहार और नियमित देखभाल से मछली और बत्तख दोनों की बढ़त तेज होती है.
सालभर होगी अच्छी आमदनी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, तकनीक में मछलियां 6 से 9 महीने में करीब डेढ़ किलो तक की हो जाती हैं. एक एकड़ तालाब से 20 से 25 क्विंटल मछली उत्पादन संभव है, जिससे 5 से 6 लाख रुपये तक की कमाई हो सकती है. वहीं बत्तख पालन से भी सालाना 3 से 4 लाख रुपये की आमदनी हो सकती है. यानी दोनों को मिलाकर किसान साल में 10 से 12 लाख रुपये तक कमा सकते हैं. कम खर्च, कम मेहनत और ज्यादा फायदा-यही इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत है. अगर सही तरीके से योजना बनाकर काम किया जाए, तो यह मॉडल किसानों की आय बढ़ाने में बड़ा सहारा बन सकता है.