Garlic Farming: अगर आप सोचते हैं कि लहसुन की अच्छी खेती सिर्फ बड़े खेत में ही हो सकती है, तो यह खबर आपकी सोच बदल देगी. थोड़ी सी जमीन, सही तरीका और थोड़ा धैर्य-बस इतना काफी है. घर के आंगन या छोटी क्यारी में भी 6 से 7 किलो तक लहसुन उगाया जा सकता है. खास बात यह है कि इसके लिए महंगे खाद या दवाइयों की जरूरत नहीं पड़ती. कुछ आसान देसी उपाय अपनाकर मोटी कलियां और मजबूत जड़ें पाई जा सकती हैं.
मिट्टी तैयार करें और राख का सही इस्तेमाल करें
लहसुन की अच्छी पैदावार के लिए सबसे पहले मिट्टी पर ध्यान देना जरूरी है. मिट्टी भुरभुरी और अच्छी जल निकासी वाली होनी चाहिए. जब पौधे थोड़े बड़े होने लगें, तब हर 10 दिन के अंतराल पर हल्की मात्रा में राख डालें. राख किसी भी लकड़ी या चूल्हे की हो सकती है. इसे मिट्टी में मिलाने की बजाय ऊपर से ही छिड़कें, ताकि सतह पर दिखाई दे. राख डालने से मिट्टी की ताकत बढ़ती है और जड़ें मजबूत होती हैं. इससे कीड़े भी कम लगते हैं और अलग से कीटनाशक की जरूरत नहीं पड़ती.
पानी देने में न करें गलती
लहसुन की फसल में सबसे बड़ी गलती लोग ज्यादा पानी देकर करते हैं. जरूरत से ज्यादा पानी देने पर जड़ें गलने लगती हैं और पौधा खराब हो जाता है. ध्यान रखें कि जब मिट्टी की नमी लगभग सूख जाए, तभी पानी दें. आमतौर पर दो या तीन दिन में एक बार हल्का और सही मात्रा में पानी देना काफी होता है. पानी हमेशा जड़ों तक पहुंचे, लेकिन खेत या क्यारी में पानी जमा नहीं होना चाहिए. संतुलित सिंचाई से ही पौधा स्वस्थ रहता है और बाद में कलियां अच्छी बनती हैं.
देसी खाद से बढ़ेगी कलियों की मोटाई
अगर आप चाहते हैं कि लहसुन की कलियां मोटी और भरी-भरी आएं, तो बीच-बीच में देसी खाद डाल सकते हैं. खासकर बकरी का अपशिष्ट बहुत फायदेमंद माना जाता है. इसमें कई जरूरी पोषक तत्व होते हैं जो जड़ों को मजबूत बनाते हैं. इसे हल्की मात्रा में पौधों के पास डालें. ज्यादा मात्रा में डालने से नुकसान भी हो सकता है, इसलिए संतुलन जरूरी है. देसी खाद से पौधों को प्राकृतिक ताकत मिलती है और उत्पादन भी बढ़ता है.
धूप है सबसे जरूरी
लहसुन की खेती में धूप की अहम भूमिका होती है. कोशिश करें कि क्यारी ऐसी जगह हो जहां सुबह से शाम तक अच्छी धूप आती रहे. छांव वाली जगह पर पौधे कमजोर रह जाते हैं और कलियां छोटी बनती हैं. खुली जगह पर लगे पौधे ज्यादा मजबूत होते हैं. लगातार धूप मिलने से पौधे तेजी से बढ़ते हैं और तीन महीने में अच्छी पैदावार देने लगते हैं. सही धूप, संतुलित पानी और देसी खाद-इन तीन बातों का ध्यान रख लिया जाए तो छोटी सी क्यारी भी भरपूर उत्पादन दे सकती है.