महंगी खाद से छुटकारा! डिप्टी सीएम ने बताया प्राकृतिक खेती से मुनाफा पाने का तरीका

Madhya Pradesh News : मध्य प्रदेश में प्राकृतिक खेती किसानों के लिए नई उम्मीद बन रही है. प्रधानमंत्री मोदी के एक एकड़, एक मौसम मंत्र से किसान कम जोखिम में खेती आजमा रहे हैं. देसी खाद और तरीकों से लागत घट रही है, फसल बेहतर हो रही है और आमदनी में बढ़ोतरी देखी जा रही है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 6 Jan, 2026 | 11:30 PM

Natural Farming : कभी महंगी खाद, दवाइयों और बढ़ती लागत से परेशान रहने वाला किसान अब खेती को नए नजरिए से देखने लगा है. खेत में प्रयोग छोटा है, लेकिन असर बड़ा दिख रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक एकड़, एक मौसम मंत्र ने किसानों को बिना डर खेती आजमाने का हौसला दिया है. मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला का कहना है कि प्राकृतिक खेती आज सिर्फ विकल्प नहीं, बल्कि किसानों की आमदनी बढ़ाने और मिट्टी की सेहत सुधारने का मजबूत रास्ता बन रही है.

प्राकृतिक खेती से घट रही लागत, बढ़ रहा भरोसा

उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला के अनुसार, रासायनिक खेती  पर बढ़ती निर्भरता ने किसानों की लागत तो बढ़ाई ही, मिट्टी और पानी को भी नुकसान पहुंचाया. प्राकृतिक खेती ने इस सोच को बदलने का काम किया है. गोबर, गोमूत्र और देसी तरीकों से तैयार खाद और कीटनाशकों  से किसान अब कम खर्च में खेती कर पा रहे हैं. उन्होंने बताया कि कई जिलों में किसान पहले एक एकड़ में प्रयोग कर रहे हैं. नतीजे अच्छे आने पर धीरे-धीरे खेती का रकबा बढ़ा रहे हैं. इससे किसानों को न तो बड़ा जोखिम उठाना पड़ रहा है और न ही कर्ज का दबाव बढ़ रहा है.

गौ-आधारित खेती से मिट्टी भी स्वस्थ, फसल भी बेहतर

राजेन्द्र शुक्ला कहते हैं कि भारत की खेती  की असली ताकत उसकी परंपरा में है. गौ-आधारित प्राकृतिक खेती इसी परंपरा का आधुनिक रूप है. गोबर और गोमूत्र से बने जीवामृत, बीजामृत और पंचगव्य से मिट्टी में जान लौट रही है. खेतों में सूक्ष्म जीव सक्रिय हो रहे हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता  बेहतर हो रही है. उन्होंने बताया कि मल्चिंग जैसी तकनीकें मिट्टी की नमी बनाए रखने में मदद कर रही हैं. इससे पानी की बचत हो रही है और मौसम की मार का असर भी कम पड़ रहा है. किसान अब खुद कह रहे हैं कि उनकी जमीन पहले से ज्यादा उपजाऊ हो गई है.

सहकारिता और FPO से किसानों को मिल रहा बाजार

प्राकृतिक खेती  को आगे बढ़ाने में सहकारिता की बड़ी भूमिका है. किसान उत्पादक संगठन (FPO) के जरिए छोटे किसानों को जोड़ा जा रहा है. इससे उन्हें सस्ते दाम पर प्राकृतिक खाद-बीज मिल रहे हैं और अपने उत्पाद बेचने के लिए सही बाजार भी. उन्होंने कहा कि सहकारिता से समृद्धि का विचार किसानों को अकेले की बजाय समूह में मजबूत बना रहा है. प्राकृतिक खेती से उगा अनाज अब बाजार में बेहतर दाम पा रहा है, क्योंकि लोग रसायन-मुक्त भोजन की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं.

स्वस्थ भोजन से स्वस्थ जीवन की ओर कदम

राजेन्द्र शुक्ला का मानना है कि प्राकृतिक खेती का असर सिर्फ खेत तक सीमित नहीं है. इसका सीधा संबंध आम लोगों की सेहत से है. रसायन मुक्त अनाज से पाचन बेहतर होता है और बीमारियों का खतरा कम होता है. यही वजह है कि प्राकृतिक खेती, योग और आयुष एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का एक एकड़, एक मौसम  मंत्र किसानों के लिए सबसे व्यावहारिक रास्ता है. छोटे प्रयोग से बड़ा बदलाव लाया जा सकता है. मध्य प्रदेश सरकार इस दिशा में पूरी मजबूती से काम कर रही है, ताकि किसान, मिट्टी और उपभोक्ता-तीनों का भविष्य सुरक्षित रह सके.

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Published: 6 Jan, 2026 | 11:30 PM

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