40 करोड़ रुपये खर्च, फिर भी नहीं पूरा हुआ लक्ष्य.. केवल 3.41 लाख एकड़ में धान की सीधी बुवाई
पंजाब सरकार 40 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि देने के बावजूद धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) का लक्ष्य हासिल नहीं कर सकी. 5 लाख एकड़ के लक्ष्य के मुकाबले केवल 3.41 लाख एकड़ में ही डीएसआर हुई. हालांकि, पिछले साल की तुलना में क्षेत्र और किसानों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
Paddy Sowing: पंजाब में धान की बुवाई का काम लगभग पूरा होने वाला है, लेकिन इस बार भी धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) को लेकर कृषि विभाग अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर सका. सरकार ने खरीफ सीजन में 5 लाख एकड़ क्षेत्र में डीएसआर के तहत धान की खेती का लक्ष्य रखा था, लेकिन अब तक केवल 3.41 लाख एकड़ क्षेत्र में ही इसकी बुवाई हो पाई है. इससे विभाग लक्ष्य से करीब 32 फीसदी पीछे रह गया है.
कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुदियां ने द ट्रिब्यून से कहा है कि इस वर्ष 26,896 किसानों ने डीएसआर तकनीक अपनाई, जबकि पिछले साल यह संख्या 25,853 थी. उन्होंने कहा कि डीएसआर के तहत खेती का रकबा पिछले साल के 2.93 लाख एकड़ से बढ़कर इस सीजन में 3.41 लाख एकड़ हो गया है, जो करीब 16 फीसदी की वृद्धि दर्शाता है. उन्होंने कहा कि किसानों को इस तकनीक के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार ने 40 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता का प्रावधान किया है, जबकि पिछले साल यह राशि 35.16 करोड़ रुपये थी. योजना के तहत किसानों को प्रति एकड़ 1,500 रुपये की सहायता सीधे उनके बैंक खाते में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से दी जाती है.
किसानों के लिए विशेष शिविर लगाए जाएं
कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुदियां ने कहा कि राज्य में धान की रोपाई का काम अभी जारी है और यह प्रक्रिया जुलाई के मध्य तक चलने की संभावना है. ऐसे में डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस) के तहत खेती का रकबा और बढ़ सकता है. उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसानों के लिए विशेष शिविर लगाए जाएं, जहां उनका मौके पर ही पंजीकरण किया जाए और बैंक खातों का सत्यापन किया जाए, ताकि प्रोत्साहन राशि का भुगतान बिना किसी परेशानी के हो सके.
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कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, डीएसआर तकनीक के लिए मई के तीसरे सप्ताह से जून की शुरुआत तक का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है. इस तकनीक में धान की नर्सरी तैयार करने और खेत में पानी भरकर रोपाई करने की जरूरत नहीं पड़ती. इससे सिंचाई के पानी की खपत 15 से 20 प्रतिशत तक कम हो जाती है और मजदूरी खर्च में भी कमी आती है.
सरकार और किसानों के लिए बड़ी चिंता
पंजाब में लगातार गिरता भूजल स्तर सरकार और किसानों के लिए बड़ी चिंता बना हुआ है. यही वजह है कि पानी बचाने वाली खेती तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है. आंकड़ों के मुताबिक, पंजाब हर साल जितना भूजल प्राकृतिक रूप से रिचार्ज करता है, उससे 156.36 प्रतिशत अधिक पानी जमीन से निकाल रहा है. यही कारण है कि राज्य के 153 प्रशासनिक ब्लॉकों में से 111 ब्लॉक ‘अतिदोहित’ (ओवरएक्सप्लॉइटेड) श्रेणी में पहुंच चुके हैं, जहां भूजल का अत्यधिक दोहन हो रहा है.
1 किलो चावल पैदा करने में 5,000 लीटर पानी की जरूरत
विशेषज्ञों के अनुसार, पारंपरिक तरीके से धान की खेती में 1 किलोग्राम चावल पैदा करने के लिए 3,000 से 5,000 लीटर तक पानी की जरूरत पड़ती है. पानी की यह खपत मिट्टी की प्रकृति और बुवाई के समय पर भी निर्भर करती है. ऐसे में डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस) जैसी तकनीकों को पंजाब के जल संकट से निपटने का एक महत्वपूर्ण उपाय माना जा रहा है, क्योंकि इससे सिंचाई के पानी की खपत में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है.