Mushroom Farming : मशरूम फार्मिंग आज खेती का सबसे आकर्षक और तेजी से बढ़ता क्षेत्र बन चुका है. जब पारंपरिक फसलों में मौसम और लागत के चलते मुनाफा सीमित हो जाता है, तब मशरूम जैसी फसल किसानों और युवाओं के लिए कम जगह, कम समय और अधिक लाभ का विकल्प पेश करती है. मशरूम न तो बहुत जमीन मांगता है और न ही बड़ी मेहनत. इसे घर के शेड, गोदाम या खाली कमरे में भी उगाया जा सकता है. इसके अलावा, हेल्थ और प्रोटीन के प्रति बढ़ती जागरूकता ने इसे सिर्फ सब्जी नहीं बल्कि सुपरफूड और हेल्थ सप्लीमेंट का दर्जा दे दिया है. इसलिए छोटे किसान, महिलाएं, युवा और स्टार्टअप लगातार इसे अपनाने लगे हैं.
मशरूम फार्मिंग क्या है और क्यों है यह भविष्य की खेती
मशरूम एक प्रकार का कवक (फंगस) है, जो पारंपरिक फसलों की तरह मिट्टी में नहीं उगता. इसे भूसे, लकड़ी के बुरादे, धान की भूसी और कम्पोस्ट जैसे माध्यम पर उगाया जाता है. इसका उत्पादन कम जगह में, नियंत्रित तापमान वाले वातावरण में किया जा सकता है. खास बात यह है कि मशरूम की फसल लगभग 20-30 दिन में तैयार हो जाती है, जबकि अन्य फसलें महीनों में तैयार होती हैं. आज की बदलती दुनिया में, जब लोग सेहत के प्रति जागरूक हो रहे हैं, मशरूम प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स और फाइबर का अच्छा स्रोत बन गया है. यही कारण है कि इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. स्वास्थ्य के साथ-साथ होटल, रेस्तरां और सुपरमार्केट भी इस उत्पाद को बड़ी मात्रा में खरीद रहे हैं.

मशरूम उगाने का पूरा सेटअप प्लान.
मशरूम फार्मिंग शुरू करने का सही तरीका
मशरूम फार्मिंग शुरू करने के लिए आपको सबसे पहले एक सही जगह चुननी होगी. यह जगह सीधी धूप से दूर, ठंडी और हवादार होनी चाहिए. छोटे स्तर पर यह घर के किसी कमरे, गोदाम या शेड में भी शुरू की जा सकती है. शुरू करने वालों के लिए सबसे आसान किस्म ऑयस्टर मशरूम है, जबकि बटन मशरूम की मांग अधिक है लेकिन तकनीकी रूप से इसे उगाना थोड़ा कठिन है. स्पॉन यानी बीज खरीदने के लिए आप सरकारी कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि विश्वविद्यालय या प्रमाणित निजी सप्लायर से खरीद सकते हैं. इसके बाद सब्सट्रेट तैयार करना होता है, जो गेहूं के भूसे, लकड़ी के बुरादे या धान की भूसी को काटकर, भिगोकर और उबालकर बनाया जाता है.
यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि हानिकारक कीटाणु या अन्य सूक्ष्मजीव सब्सट्रेट में न रहें. तैयार सब्सट्रेट को पॉलीथीन बैग या ट्रे में भरकर उसमें स्पॉन मिलाया जाता है और बैग में छोटे-छोटे छेद किए जाते हैं. इसे उगाने के लिए तापमान और नमी का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. ऑयस्टर मशरूम के लिए 20-30 डिग्री सेल्सियस तापमान और 70-80 फीसदी नमी उपयुक्त रहती है. सही तापमान और नमी मिलने पर लगभग 15-20 दिन में मशरूम निकलने लगते हैं और कटाई शुरू हो जाती है.
मशरूम फार्मिंग के लिए आवश्यक सामग्री
मशरूम उगाने के लिए सामग्री बहुत साधारण होती है. सबसे पहले आपको मशरूम स्पॉन (बीज) की जरूरत होती है. इसके अलावा सब्सट्रेट के लिए भूसा, लकड़ी का बुरादा, धान की भूसी और कम्पोस्ट का इस्तेमाल किया जाता है. कम्पोस्ट में भूसे और पोषक तत्व मिलाकर इसे तैयार किया जाता है. उगाने के लिए उपकरण भी जरूरी हैं, जैसे प्लास्टिक बैग/ट्रे, स्प्रेयर, थर्मामीटर, हाइग्रोमीटर, पंखा और एयर स्टोन. सफाई और सुरक्षा का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण है, इसलिए डिस्पोजेबल दस्ताने और अल्कोहल का उपयोग करना चाहिए. सब्सट्रेट के pH स्तर की जांच के लिए pH मीटर का उपयोग किया जा सकता है. कुल मिलाकर, मशरूम उत्पादन के लिए तीन चीजें सबसे महत्वपूर्ण हैं- सही बीज, पौष्टिक सब्सट्रेट और स्वच्छ, नियंत्रित वातावरण.

मशरूम फार्मिंग.
मशरूम की प्रमुख किस्में और उनका लाभ
मशरूम की कई किस्में बाजार में उपलब्ध हैं, लेकिन सभी किस्में हर किसान के लिए उपयुक्त नहीं हैं. शुरुआती किसानों के लिए ऑयस्टर मशरूम सबसे आसान विकल्प है. इसे कम समय और कम लागत में उगाया जा सकता है. बटन मशरूम सबसे लोकप्रिय है और इसकी मांग होटल और रेस्तरां में अधिक है, लेकिन इसे उगाने की तकनीक थोड़ी कठिन है. विदेशी मशरूम जैसे शिटाके, लायन मेन और रेइशी हेल्थ सेक्टर में लोकप्रिय हैं और इनके दाम उच्च होते हैं. पैरा मशरूम गर्म इलाकों के लिए उपयुक्त है और अच्छी बिक्री होती है. ऑयस्टर मशरूम की कीमत 150-250 रुपये प्रति किलो, बटन मशरूम 200-300 रुपये प्रति किलो और शिटाके/लायन मेन 600-2000 रुपये प्रति किलो तक हो सकती है.
मशरूम फार्मिंग मार्केट- अवसर और बिक्री
मशरूम का बाजार लगातार बढ़ रहा है. वैश्विक स्तर पर एशिया-प्रशांत क्षेत्र सबसे बड़ा उत्पादक है. भारत में भी इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है. ताजा मशरूम होटल, रेस्तरां और स्थानीय मंडियों में बेचे जाते हैं, जबकि वैल्यू-एडेड उत्पाद जैसे पाउडर, सूप और कैप्सूल हेल्थ सप्लीमेंट और बेकरी में इस्तेमाल होते हैं. वैश्विक मशरूम मार्केट में 9.7 फीसदी की सालाना वृद्धि अनुमानित है और भारत इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है. बिक्री के लिए स्थानीय मंडी, होटल, सुपरमार्केट या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा सकता है. वैल्यू-एडेड उत्पाद से ताजा मशरूम की तुलना में 3-4 गुना अधिक मुनाफा होता है.
भारत में मशरूम मार्केट की मांग (2026 अनुमान)
| किस्म | अनुमानित कीमत (रुपये/किलो) | मांग स्तर (High/Medium/Low) |
|---|---|---|
| ऑयस्टर | 150-250 | High |
| बटन | 200-300 | High |
| शिटाके/लायन मेन | 600-2000 | Medium |
| पैरा | 150-200 | Medium |
निवेश और मुनाफा
मशरूम फार्मिंग में निवेश अपेक्षाकृत कम होता है और मुनाफा उच्च होता है. छोटे स्तर पर 30,000-50,000 रुपये से शुरू किया जा सकता है. प्रति किलो उत्पादन लागत लगभग 25-30 रुपये होती है और बिक्री कीमत 150-300 रुपये प्रति किलो तक होती है. 100 वर्ग फुट से 30-50 किलो प्रति चक्र उत्पादन संभव है और साल में 4-5 चक्र हो सकते हैं. इस प्रकार 1 लाख रुपये निवेश करके 8-10 लाख रुपये तक कमाई करना संभव है. यदि सीधे ग्राहक, होटल या रेस्तरां को बेचा जाए तो मुनाफा और बढ़ जाता है.

कम निवेश और मुनाफे की जानकारी.
मशरूम फार्मिंग का निवेश बनाम मुनाफा ( रुपये में)
| निवेश स्तर (रुपये) | संभावित मुनाफा (रुपये) |
|---|---|
| 30,000 | 2,50,000 |
| 50,000 | 4,00,000 |
| 1,00,000 | 8,00,000-10,00,000 |
सरकारी मदद और ट्रेनिंग
सरकार ने मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं. किसान कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), राज्य कृषि विभाग या राष्ट्रीय बागवानी मिशन से मुफ्त/सस्ती ट्रेनिंग और तकनीकी मार्गदर्शन ले सकते हैं. इसके अलावा, सब्सिडी और मशीनरी सहायता भी उपलब्ध है. सरकारी ट्रेनिंग से किसान न केवल उत्पादन बढ़ा सकते हैं बल्कि उच्च गुणवत्ता वाले मशरूम भी उगा सकते हैं. इसके अलावा, नई किस्मों और वैल्यू-एडेड उत्पादों के बारे में जानकारी भी मिलती है.
सफलता के लिए टिप्स और सुझाव
मशरूम फार्मिंग में सफलता पाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. सबसे पहले, सफाई और स्वच्छता का ध्यान रखें. शुरुआती किसानों के लिए ऑयस्टर मशरूम सबसे अच्छा विकल्प है. सीधे होटल या ग्राहक को बेचने से मुनाफा बढ़ता है. समय-समय पर तापमान और नमी की जांच करें. धीरे-धीरे वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट जोड़कर कमाई बढ़ाई जा सकती है. सही जानकारी, थोड़ी मेहनत और नियमित निगरानी से मशरूम फार्मिंग किसी भी किसान के लिए सपनों का बिजनेस साबित हो सकता है.

कड़ाके की ठंड में मशरूम का ख्याल.
कड़ाके की ठंड में मशरूम को कैसे बचाएं
सर्दियों का मौसम मशरूम उत्पादन के लिए अच्छा तो माना जाता है, लेकिन हाड़ कंपाने वाली ठंड किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है. मशरूम एक ऐसी नाजुक फसल है जो तापमान में जरा सा भी बदलाव होने पर अपना उत्पादन कम कर देती है. खासकर बटन मशरूम के लिए तापमान का सटीक होना बेहद आवश्यक है.
तापमान और नमी का गणित
मशरूम की खेती को दो चरणों में समझा जा सकता है. शुरुआत में जब मशरूम का बीज (स्पॉन) डाला जाता है, तब कमरे का तापमान 22°C से 25°C के बीच होना चाहिए. लेकिन जब मशरूम बाहर निकलने लगते हैं (फ्रूटिंग स्टेज), तो तापमान को घटाकर 15°C से 18°C पर लाना सबसे बेहतर होता . यदि तापमान 15°C से नीचे गिर जाए, तो मशरूम की ग्रोथ रुक जाती है.
ठंड से बचाव और नमी बनाए रखने के उपाय
पारा गिरने पर किसान भाई अपने कमरों में 100 वाट के बल्ब, हीटर या धुआं रहित अंगीठी का उपयोग कर सकते हैं. इसके अलावा, कमरे की दीवारों और फर्श पर हल्का पानी छिड़क कर 80 फीसदी नमी बनाए रखना जरूरी है. सही नमी और गर्माहट मिलने से फसल की गुणवत्ता बनी रहती है और बाजार में किसान भाइयों को इसकी अच्छी कीमत मिलती है.