कड़ाके की ठंड में फसलों की हिफाजत कैसे करें? सही देखभाल से बच सकती है किसानों की मेहनत

कई बार तो एक ही रात की कड़ाके की ठंड महीनों की मेहनत पर पानी फेर देती है. रबी सीजन की फसलें जैसे गेहूं, चना, सरसों के साथ-साथ सब्जियां टमाटर, मिर्च, बैंगन, मटर और धनिया ठंड के प्रति ज्यादा संवेदनशील होती हैं. ऐसे में अगर समय रहते सही कदम उठा लिए जाएं, तो फसल को भारी नुकसान से बचाया जा सकता है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 6 Jan, 2026 | 04:53 PM

Winter crop protection: सर्दियों का मौसम किसानों के लिए जितना जरूरी होता है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी. खासकर जब ठंड सामान्य से ज्यादा बढ़ जाए, शीतलहर चले और रात में पाला पड़ने लगे, तब खेतों में खड़ी फसल पर सबसे बड़ा खतरा मंडराने लगता है. कई बार तो एक ही रात की कड़ाके की ठंड महीनों की मेहनत पर पानी फेर देती है. रबी सीजन की फसलें जैसे गेहूं, चना, सरसों के साथ-साथ सब्जियां टमाटर, मिर्च, बैंगन, मटर और धनिया ठंड के प्रति ज्यादा संवेदनशील होती हैं. ऐसे में अगर समय रहते सही कदम उठा लिए जाएं, तो फसल को भारी नुकसान से बचाया जा सकता है.

ठंड और पाले से फसलों को क्यों होता है नुकसान

जब तापमान बहुत नीचे चला जाता है, तो पौधों की कोशिकाओं में मौजूद पानी जमने लगता है. इससे पौधों की अंदरूनी संरचना टूट जाती है और पत्तियां झुलसने लगती हैं. पाले का असर सबसे पहले सब्जियों और कोमल पौधों पर दिखाई देता है. कई बार पौधे बाहर से हरे दिखते हैं, लेकिन अंदर से पूरी तरह कमजोर हो चुके होते हैं, जिससे उपज और गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ता है.

हल्की सिंचाई बन सकती है ढाल

कड़ाके की ठंड में सिंचाई को अक्सर किसान टाल देते हैं, लेकिन यही सबसे बड़ी भूल हो सकती है. जब पाले की आशंका हो, तब खेत में हल्की सिंचाई करना बेहद फायदेमंद माना जाता है. नमी रहने से मिट्टी की गर्मी बनी रहती है और खेत का तापमान थोड़ा ऊपर चला जाता है. इससे पाले का असर कम होता है और पौधे सुरक्षित रहते हैं. ध्यान रहे कि पानी जमा न हो, सिर्फ हल्की नमी बनाए रखना ही काफी है.

धुआं बनाता है गर्माहट की चादर

पुराने किसान आज भी एक पारंपरिक लेकिन कारगर उपाय अपनाते हैं..धुआं करना. पाले वाली रात में खेतों के चारों ओर घास-फूस, सूखे पत्ते या कचरा जलाकर धुआं किया जाता है. यह धुआं खेत के ऊपर एक परत बना देता है, जिससे जमीन की गर्मी बाहर नहीं निकलती और ठंडी हवा का सीधा असर फसलों पर नहीं पड़ता. यह तरीका खासकर सब्जियों और बागवानी फसलों के लिए काफी उपयोगी माना जाता है.

पोषक तत्वों का सही छिड़काव

ठंड के मौसम में फसलों की सहनशक्ति बढ़ाने के लिए कुछ पोषक तत्व बहुत मददगार साबित होते हैं. गंधक और थायो यूरिया का हल्का छिड़काव पौधों को ठंड से लड़ने की ताकत देता है. इससे पौधों की कोशिकाएं मजबूत होती हैं और शीतलहर का असर कम पड़ता है. समय-समय पर सही मात्रा में किया गया छिड़काव फसल को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकता है.

फसलों को ढकना क्यों जरूरी है

सब्जियों और नर्सरी वाली फसलों के लिए ठंडी हवा सबसे बड़ा दुश्मन होती है. ऐसे में पौधों को पॉलीथीन शीट, भूसा या सूखी घास से ढकना काफी असरदार उपाय है. इससे पौधों के आसपास का तापमान स्थिर रहता है और ठंड सीधे संपर्क में नहीं आ पाती. कई किसान रात में फसल को ढकते हैं और सुबह धूप निकलते ही हटा देते हैं, जिससे पौधों को नुकसान नहीं होता.

खेत की मेड़ों पर हरियाली भी देती है सुरक्षा

लंबे समय के लिए ठंड से बचाव की सोच रहे किसानों के लिए खेत की मेड़ों पर वायुरोधी पेड़ लगाना बेहद फायदेमंद है. शहतूत, शीशम, खेजड़ी और बबूल जैसे पेड़ ठंडी हवाओं को रोकते हैं और खेत के अंदर का तापमान संतुलित रखते हैं. यह उपाय तुरंत असर भले न दिखाए, लेकिन भविष्य में हर सर्दी में फसलों की प्राकृतिक सुरक्षा बन जाता है.

सतर्कता ही सबसे बड़ा उपाय

कड़ाके की ठंड में सबसे जरूरी है मौसम की सही जानकारी. मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देना और समय रहते तैयारी करना किसान को बड़े नुकसान से बचा सकता है. छोटे-छोटे उपाय जैसे हल्की सिंचाई, धुआं करना, सही पोषण और ढकाव मिलकर फसलों को ठंड के कहर से सुरक्षित रख सकते हैं. सही समय पर लिया गया फैसला न सिर्फ फसल बचाता है, बल्कि किसान की आमदनी और भरोसे दोनों को मजबूत करता है.

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