गन्ना किसानों के लिए अलर्ट, Co-0238 किस्म छोड़ नई वैरायटी अपनाने की सलाह, लाल सड़न रोग से बढ़ रहा खतरा
Sugarcane Red Rot Disease: गन्ना किसानों को इस खरीफ सीजन में Co-0238 किस्म की जगह नई और रोग प्रतिरोधी किस्में अपनाने की सलाह दी गई है. विशेषज्ञों के अनुसार यह किस्म लाल सड़न (रेड रॉट) रोग के प्रति अधिक संवेदनशील हो गई है, जिससे उत्पादन और चीनी रिकवरी प्रभावित हो सकती है.
Sugarcane Farming Tips: भारत में गन्ना किसानों के बीच Co-0238 किस्म काफी समय से लोकप्रिय रही है, लेकिन पिछले पेराई सीजन में इस किस्म से चीनी उत्पादन कम होने की खबरों ने किसानों और चीनी मिलों की चिंता बढ़ा दी है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, इस किस्म में लाल सड़न रोग का खतरा तेजी से बढ़ रहा है. यह बीमारी गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचाती है और उत्पादन के साथ-साथ उसकी क्वालिटी पर भी असर डाल सकती है. ऐसे में किसानों को नुकसान से बचने के लिए नई और रोग प्रतिरोधी गन्ना किस्मों को अपनाने की सलाह दी जा रही है.
क्यों बढ़ी Co-0238 किस्म को लेकर चिंता?
Co-0238 गन्ने की एक समय बहुत ज्यादा उपज देने वाली किस्म मानी जाती थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसमें लाल सड़न (रेड रॉट) बीमारी का खतरा बढ़ गया है. इस बीमारी के कारण गन्ने में चीनी की मात्रा कम हो जाती है, जिससे किसानों को कम लाभ मिलता है और चीनी मिलों का उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है. इसी वजह से कृषि विशेषज्ञ किसानों को सलाह दे रहे हैं कि वे केवल Co-0238 पर निर्भर न रहें, बल्कि दूसरी नई और रोग प्रतिरोधी किस्मों को भी अपनाएं.
खासकर उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में, जो देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है, किसानों को Co-0238 की जगह नई और बीमारी सहन करने वाली किस्मों की खेती करने की सलाह दी जा रही है.
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क्या है लाल सड़न रोग?
लाल सड़न रोग को गन्ने का सबसे खतरनाक रोग माना जाता है. इसकी गंभीरता को देखते हुए इसे अक्सर ‘गन्ने का कैंसर’ भी कहा जाता है. यह बीमारी कोलेटोट्राइकम फलकेटम (Colletotrichum falcatum) नामक फफूंद के कारण फैलती है. यह फंगस गन्ने के तने के अंदर प्रवेश कर ऊतकों को नुकसान पहुंचाती है. धीरे-धीरे तना सड़ने लगता है और पौधे की वृद्धि रुक जाती है. रोगग्रस्त गन्ने से न केवल उत्पादन घटता है, बल्कि चीनी रिकवरी पर भी नकारात्मक असर पड़ता है.
कैसे करें रोग की पहचान?
किसानों के लिए लाल सड़न रोग की समय पर पहचान करना बहुत जरूरी है. इस बीमारी से प्रभावित गन्ने को काटने पर उसके अंदर लाल रंग के धब्बे या लाल धारियां दिखाई देती हैं. कई मामलों में गन्ने का अंदरूनी हिस्सा सड़ा हुआ भी नजर आता है. अगर खेत में कुछ पौधों में ऐसे लक्षण दिखें, तो उन्हें तुरंत खेत से अलग कर देना चाहिए, ताकि बीमारी बाकी फसल में न फैले. खेत का नियमित निरीक्षण करने से बीमारी का पता शुरुआती चरण में चल सकता है और समय रहते उस पर नियंत्रण पाया जा सकता है.
पश्चिमी यूपी के किसानों को विशेष सलाह
पश्चिमी उत्तर प्रदेश देश के कुल गन्ना उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देता है. यहां बड़ी संख्या में किसान Co-0238 किस्म की खेती करते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसान लगातार इसी किस्म की खेती करते रहेंगे, तो लाल सड़न रोग का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने और नई अनुशंसित किस्मों की बुवाई पर ध्यान देना चाहिए. इससे रोग का दबाव कम होगा और उत्पादन भी स्थिर बना रहेगा.
बुवाई के समय अपनाएं ये जरूरी उपाय
लाल सड़न रोग से बचने के लिए शुरुआत से ही सावधानी बरतना जरूरी है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि नर्सरी तैयार करते समय गन्ने के ऊपरी हिस्से का इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि यह हिस्सा आमतौर पर ज्यादा स्वस्थ होता है. इसके अलावा, बुवाई से पहले गन्ने के टुकड़ों को गर्म पानी में उपचारित करने की सलाह दी जाती है. इससे बीमारी फैलाने वाले जीवाणु और फफूंद कम हो जाते हैं, जिससे फसल में रोग लगने का खतरा घट जाता है.