6 लाख एकड़ पर मंंडराया खतरा, किसान नहीं कर पा रहे धान की खेती.. टेंशन में अन्नदाता

तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा में मेट्टूर बांध से पानी नहीं छोड़े जाने के कारण सांबा धान की खेती संकट में है. किसानों का कहना है कि यदि जल्द सिंचाई का पानी नहीं मिला, तो 6 लाख एकड़ में बुआई प्रभावित हो सकती है और 12 लाख टन तक धान उत्पादन का नुकसान हो सकता है. कृषि विभाग ने भी स्थिति को अनिश्चित बताया है.

नोएडा | Updated On: 13 Jul, 2026 | 09:23 AM

Tamil Nadu Paddy Farmers: तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा में इस साल सांबा धान की खेती पर संकट मंडरा रहा है. मेट्टूर बांध में पानी की कमी के कारण अब तक सिंचाई के लिए पानी नहीं छोड़ा गया है. इससे नहरों के पानी पर निर्भर लाखों किसान चिंतित हैं. किसानों का कहना है कि अगर जल्द पानी नहीं मिला, तो करीब 6 लाख एकड़ में सांबा धान की बुआई प्रभावित हो सकती है और 12 लाख टन तक धान उत्पादन का नुकसान हो सकता है.

दरअसल, ऐसे हर साल 12 जून को मेट्टूर बांध से सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाता है, लेकिन इस बार जल भंडारण कम होने की वजह से ऐसा नहीं हो सका. 12 जुलाई को बांध का जलस्तर 75.83 फीट और जल भंडारण 37.93 टीएमसी दर्ज किया गया. वहीं, बांध में पानी की आवक (इनफ्लो) सिर्फ 91 क्यूसेक रही, जो काफी कम है. किसानों को अब उम्मीद है कि कावेरी के जलग्रहण क्षेत्रों में अच्छी बारिश होगी, जिससे मेट्टूर बांध में पानी बढ़ेगा और सिंचाई के लिए जल्द पानी छोड़ा जा सकेगा. पिछले साल 12 जुलाई को मेट्टूर बांध पूरी तरह भरा हुआ था. उस समय बांध का जलस्तर 120 फीट और जल भंडारण 93.47 टीएमसी था. लेकिन इस साल हालात बिल्कुल अलग हैं. पानी की कमी के कारण नहरों पर निर्भर किसानों ने कुरुवई धान की खेती नहीं की और अब वे सांबा धान की फसल के लिए सिंचाई का इंतजार कर रहे हैं.

3 लाख किसान हर साल सांबा धान की खेती करते हैं

अनुमान के मुताबिक, तंजावुर, तिरुवरुर, मयिलादुथुरई, नागपट्टिनम और तिरुचिरापल्ली जिलों के करीब 3 लाख किसान हर साल सांबा धान की खेती  करते हैं. तमिलनाडु किसान संरक्षण संघ के सचिव एस. विमलनाथन ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि अगर मेट्टूर बांध से पानी छोड़ने में और देरी हुई, तो डेल्टा के करीब 6 लाख एकड़ क्षेत्र में सांबा धान की बुआई प्रभावित हो सकती है. इससे लगभग 12 लाख टन धान उत्पादन का नुकसान होने की आशंका है.

130 से 140 टीएमसी पानी की जरूरत होगी

तमिलनाडु किसान संरक्षण संघ के सचिव एस. विमलनाथन ने कहा कि सांबा धान की खेती करने वाले किसानों को भी कुरुवई धान की तरह विशेष राहत पैकेज दिया जाना चाहिए. उन्होंने सरकार से मांग की कि मंत्रियों, अधिकारियों और किसान संगठनों की बैठक बुलाकर मौजूदा स्थिति की समीक्षा की जाए और किसानों के लिए वैकल्पिक समाधान निकाला जाए. वहीं, सीनियर एग्रो टेक्नोलॉजिस्ट फोरम के पी. कलैवनन ने कहा कि यदि मेट्टूर बांध से सितंबर के पहले सप्ताह में भी पानी छोड़ा जाता है, तब भी डेल्टा क्षेत्र में सांबा और थलाडी धान की फसलों के लिए करीब 130 से 140 टीएमसी पानी की जरूरत होगी. वहीं, तंजावुर के किसान के.ए. कूथालिंगम ने कहा कि इस बार इलाके में पर्याप्त बारिश नहीं हुई है और भूजल स्तर भी लगातार नीचे जा रहा है.

फसल बचाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है

तंजावुर के ओरथानाडु के किसान आर. सुकुमारन ने बताया कि नहरों में पानी नहीं होने से भूजल का पुनर्भरण  (रीचार्ज) नहीं हो पा रहा है. ऐसे में जिन किसानों ने भूजल के सहारे कुरुवई धान लगाया है, उन्हें भी फसल बचाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. कृषि विभाग के अधिकारियों का भी कहना है कि मेट्टूर बांध में जलस्तर कम होने की वजह से अभी सिंचाई के लिए पानी नहीं छोड़ा गया है. अधिकारियों के मुताबिक, मौजूदा स्थिति को देखते हुए इस साल डेल्टा क्षेत्र में सांबा धान की खेती को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.

Published: 13 Jul, 2026 | 09:19 AM

Topics: