वैज्ञानिकों ने विकसित की स्मार्ट सीड कोटिंग टेक्नोलॉजी, फसलों की पैदावार में 37 फीसदी उछाल का दावा

हैदराबाद के IIOR ने बायोपॉलीमर आधारित स्मार्ट सीड कोटिंग तकनीक विकसित की है, जिससे फसल उत्पादन में 12 फीसदी से 37 फीसदी तक वृद्धि देखी गई. ICAR के अनुसार यह तकनीक बीज की गुणवत्ता, अंकुरण और शुरुआती वृद्धि सुधारती है. इसे वर्षा आधारित खेती और विभिन्न फसलों के लिए उपयोगी माना गया है और इसका पेटेंट भी हो चुका है.

नोएडा | Updated On: 19 Jun, 2026 | 11:51 AM

हैदराबाद स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ऑयलसीड्स रिसर्च (IIOR) ने एक नई बायोपॉलीमर आधारित ‘स्मार्ट सीड कोटिंग टेक्नोलॉजी’ विकसित और प्रदर्शित की है. सरकार के अनुसार यह तकनीक बीज की गुणवत्ता सुधारने, फसल की बेहतर स्थापना और कीट-रोग व खराब मौसम जैसी चुनौतियों से लड़ने में मदद करेगी. ICAR के मुताबिक, इस तकनीक में बीजों पर एक बायोडिग्रेडेबल (जैव-अपघटनीय) परत चढ़ाई जाती है, जिसमें लाभकारी सूक्ष्मजीव, पोषक तत्व और फसल सुरक्षा से जुड़े तत्व शामिल होते हैं. यह परत सीधे बीज और मिट्टी के संपर्क में काम करती है, जिससे अंकुरण बेहतर होता है और शुरुआती पौधों की वृद्धि तेज होती है.

सरकारी बयान के अनुसार, इस तकनीक से फसल उत्पादन  में मौजूदा स्तर की तुलना में 37 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की संभावना है. ICAR के अनुसार इस तकनीक का परीक्षण सात फसलों- सोयाबीन, मक्का, मूंगफली, चना, कपास, सरसों और अरहर में किया गया. नतीजों में पाया गया कि बिना ट्रीटमेंट वाले बीजों की तुलना में उत्पादन में 12 फीसदी से 37 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई. तेलंगाना में किए गए प्रदर्शन परीक्षणों में मूंगफली और सोयाबीन की पैदावार में करीब 30 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई.

मूंगफली की उपज प्रति हेक्टेयर 1.8 टन होगी

2025-26 के आंकड़ों के अनुसार मूंगफली की प्रति हेक्टेयर उपज गर्मी के मौसम में 1.8 टन, खरीफ में 2.26 टन और रबी में 2.4 टन रही. सोयाबीन (केवल खरीफ फसल) की उपज 1.02 टन, सरसों (रबी फसल) 1.46 टन, सूरजमुखी 1 से 1.35 टन, अरंडी 1.98 टन और तिल 0.5 से 0.9 टन दर्ज की गई. ICAR ने बिजनेसलाइन से कहा है कि इस तकनीक का भारत में पेटेंट भी कराया जा चुका है. इसे खास तौर पर कृषि की एक बड़ी समस्या को दूर करने के लिए विकसित किया गया है, जिसमें फसल की शुरुआती अवस्था में कमजोर स्थापना के कारण उत्पादन पर असर पड़ता है, भले ही बाकी खेती की परिस्थितियां अच्छी हों.

दालें, सब्जियां और बागवानी फसलें शामिल हैं

ICAR के अनुसार, ‘स्मार्ट सीड्स’ इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं, क्योंकि यह बीजों को ठीक वहीं पर सुरक्षा, पोषण और लाभकारी सूक्ष्मजीव उपलब्ध कराते हैं जहां उनकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है. ICAR के अनुसार यह बीज कोटिंग तकनीक  कई तरह की फसलों के लिए तैयार की जा सकती है, जिनमें अनाज, मोटे अनाज (मिलेट्स), दालें, सब्जियां और बागवानी फसलें शामिल हैं. यह तकनीक खास तौर पर वर्षा आधारित खेती (rainfed farming) के लिए उपयोगी है, जहां खेती पूरी तरह मॉनसून और बारिश पर निर्भर रहती है और सूखा या अनियमित बारिश का खतरा ज्यादा रहता है.

छोटे किसानों को भी फायदा

ICAR का कहना है कि वह इस तकनीक को आगे बढ़ाने के लिए राज्य बीज निगमों, किसान उत्पादक संगठनों  (FPOs) और निजी बीज कंपनियों के साथ साझेदारी करना चाहता है, ताकि इसे छोटे किसानों तक अलग-अलग कृषि क्षेत्रों में आसानी से पहुंचाया जा सके.

Published: 19 Jun, 2026 | 11:25 AM

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