हरियाणा के खेतों में इजरायली तकनीक का असर, बागवानी में 37% का इजाफा

भारत और इजरायल की साझेदारी से साल 2010 से लेकर 2024 तक बागवानी उत्पादन में 37% की बढ़ोतरी हुई है, और खेती का क्षेत्र भी 13% बढ़ा है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 19 Apr, 2025 | 09:14 AM

हरियाणा में भारत और इजरायल की साझेदारी से बने “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” (CoE) का असर दिखाई देने लगा है. इसने हरियाणा में बागवानी यानी फल, सब्जी, फूल और मसाले की खेती को नया जीवन दिया है. साल 2010 से लेकर 2024 तक बागवानी उत्पादन में 37% की बढ़ोतरी हुई है, और खेती का क्षेत्र भी 13% बढ़ा है.

क्या हुआ है बदलाव?

2010 में हरियाणा में बागवानी का क्षेत्र 3.64 लाख हेक्टेयर था, जो अब 2024 में बढ़कर 4.12 लाख हेक्टेयर हो गया है. पहले प्रति हेक्टेयर उत्पादन 12.07 टन था, जो अब 16.56 टन तक पहुंच गया है.

यह जानकारी करनाल के घरौंदा स्थित इंडो-इजरायल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में हुई बैठक के दौरान दी गई, जिसमें इजरायल के कृषि मंत्री एवी डिचटर और हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा शामिल हुए.

दिल्ली के पास होने से किसानों को फायदा

हरियाणा की दिल्ली से नजदीकी होने के कारण यहां उगाई गई सब्जियां और फल आसानी से दिल्ली के बाजारों तक पहुंचते हैं. राज्य सरकार पिछले कुछ सालों से बीजिंग मॉडल की तर्ज पर ऐसा सिस्टम बना रही है जिससे दिल्ली को हरियाणा से ही ताजा फल, दूध और सब्जियां मिल सकें.

राज्य में 11 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

इन सेंटरों में किसानों को नई तकनीकों जैसे कि पॉलीहाउस, ड्रिप सिंचाई और अच्छी क्वालिटी वाले बीजों की जानकारी दी जाती है. इस साल तीन नए सेंटर अंबाला (लीची), यमुनानगर (स्ट्रॉबेरी) और हिसार (खजूर) में खोले जाएंगे.

खेती को नई दिशा

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा और इजरायल की जलवायु मिलती-जुलती है, इसलिए वहां की तकनीकें यहां बहुत उपयोगी साबित हो रही हैं. कुरुक्षेत्र के रामनगर में मधुमक्खी पालन के लिए सेंटर बनाया गया है और जल्द ही हाइड्रोपोनिक्स (बिना मिट्टी की खेती) के लिए भी एक सेंटर बनाया जाएगा.

अब सरकार योजना बना रही है कि कुछ युवाओं को इजरायल भेजा जाए ताकि वे वहां की आधुनिक खेती की तकनीकें सीख सकें और हरियाणा में लागू कर सकें.

140 पैक हाउस

राज्य में 510 करोड़ रुपये की लागत से 140 पैक हाउस बनाए जा रहे हैं, जहां फलों और सब्जियों को साफ, छांटकर और पैक किया जाएगा. हर क्लस्टर में 300 किसानों के साथ एक किसान उत्पादक संगठन (FPO) भी बनाया जा रहा है.

सब्सिडी और नई योजनाएं

फल और सब्जी की खेती के लिए किसानों को 50% से 85% तक सब्सिडी दी जा रही है. मशरूम की खेती पर भी 40% से 85% तक की सब्सिडी मिल रही है.

हरियाणा सरकार जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) की मदद से 2,700 करोड़ रुपये की लागत से 9 साल का एक बड़ा बागवानी प्रोजेक्ट शुरू करने जा रही है. इसमें 400 से ज़्यादा छोटे केंद्र बनाए जाएंगे. इसका मकसद है कि किसानों की आमदनी बढ़े और राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था मजबूत हो.

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