पपीता की फसल पर रिंग स्पॉट वायरस और जड़ गलन रोग का खतरा, एक्सपर्ट से जाने कैसे बचाएं फसल

Papite Ki Kheti: पपीता की खेती में सबसे बड़ी चुनौती रिंग स्पॉट वायरस (PRSV) और जड़ गलन (Root Rot) जैसे रोग हैं. अप्रैल में रोपण करने से रोगों का खतरा कम होता है और फसल तेजी से बढ़ती है. वायरस के लिए नीम तेल का छिड़काव, रोगग्रस्त पौधों को हटाना और खेत में खरपतवार नियंत्रण जरूरी है. जड़ गलन से बचाव के लिए हेक्साकोनाजोल की मिट्टी में ड्रेंचिंग करनी चाहिए.

नोएडा | Published: 8 Apr, 2026 | 12:11 PM

Papaya Farming Tips: पपीता एक ऐसी फसल है जो जल्दी फल देती है और खाने में भी बहुत फायदेमंद है. इसे खाने से शरीर को पोषण मिलता है और साथ ही यह किसानों के लिए आय का अच्छा जरिया भी बन सकती है. लेकिन पपीता उगाने में सबसे बड़ी दिक्कत इसके रोग हैं. खासकर पपाया रिंग स्पॉट वायरस (PRSV) और जड़ गलन (Root Rot) जैसी बीमारियाँ फसल को बहुत नुकसान पहुंचा सकती हैं और किसानों की कमाई पर असर डाल सकती हैं.

बिहार स्थित डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.के. सिंह ने किसान इंडिया (Kisan India) को बताया कि, बिहार में पपीता लगभग 1,900 हेक्टेयर में उगाया जाता है. यहां औसत उपज 22.45 टन प्रति हेक्टेयर है, जबकि देश का औसत 43.30 टन प्रति हेक्टेयर है. इसका कारण मुख्य रूप से रोग प्रबंधन की कमी और सही समय पर रोपण न होना है.

अप्रैल में रोपण क्यों सबसे उपयुक्त है?

कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.के. सिंह के अनुसार, अप्रैल में रोपण करने से रोगों का असर काफी कम हो जाता है और फसल की उपज भी बेहतर होती है. इसका मतलब है कि सही समय और रोग प्रबंधन से किसान अपनी पपीता फसल से ज्यादा लाभ कमा सकते हैं. इस समय:

  1. संक्रामक रोगों का कम प्रकोप: अप्रैल में तापमान ज्यादा और वातावरण गर्म होता है. ऐसे में एफिड (aphid) जैसे कीट कम सक्रिय रहते हैं, जो पपाया रिंग स्पॉट वायरस के मुख्य कारण हैं. इसका सीधा फायदा यह है कि वायरस का संक्रमण देर से या कम मात्रा में होता है.
  2. अनुकूल तापमान और तेज वृद्धि: अप्रैल में तापमान लगभग 25-35 डिग्री सेल्सियस रहता है और तेज धूप तथा कम नमी फसल के लिए अनुकूल होती है. इससे पौधों की प्रारंभिक वृद्धि तेज होती है और वे रोगों के प्रति अधिक सहनशील बनते हैं.
  3. फसल चक्र का बेहतर तालमेल: अप्रैल में रोपण करने से फसल का चक्र इस प्रकार तय होता है:

इस तालमेल से फसल बाजार में बेहतर मूल्य दिलाने में मदद करती है.

पपाया में रिंग स्पॉट वायरस (PRSV)

पपाया रिंग स्पॉट वायरस (PRSV) एक विषाणुजनित रोग है जो पपीता के पौधों को प्रभावित करता है. यह वायरस मुख्य रूप से एफिड (aphid) कीटों के माध्यम से फैलता है और पौधों के पत्तों और फलों में धारीदार या रिंग जैसे धब्बे पैदा करता है. इससे पौधों की ग्रोथ रुक जाती है और उपज कम हो जाती है, जिससे किसानों की आय पर नकारात्मक असर पड़ता है.

रोग के लक्षण

नियंत्रण के लिए करें ये उपाय

जड़ गलन (Root Rot) का प्रबंधन

जड़ गलन या रूट रॉट एक फफूंदजनित रोग है जो पपीता के पौधों की जड़ों को प्रभावित करता है. इस रोग में पौधे अचानक मुरझाने लगते हैं और उनकी जड़ें सड़ने लगती हैं, जिससे पौधे कमजोर हो जाते हैं और उपज घट जाती है. इसके नियंत्रण के लिए आप:

पपीता की खेती में सफलता का राज है सही समय पर रोपण और रोगों का सही प्रबंधन. अगर किसान अप्रैल में पपीता लगाते हैं और समय-समय पर पौधों पर छिड़काव और ड्रेंचिंग करते हैं, तो फसल रोगमुक्त रहती है और अच्छी उपज देती है. इससे न केवल उत्पादन बढ़ता है, बल्कि बाजार में पपीते का बेहतर दाम भी मिलता है. सही तकनीक अपनाकर किसान अपनी मेहनत का पूरा फायदा उठा सकते हैं.

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