Mango Fruit Cracking: उत्तर भारत में आम की खेती किसानों की आय का एक प्रमुख स्रोत है, लेकिन हाल के वर्षों में आम के फलों के फटने (Fruit Cracking) की समस्या तेजी से बढ़ी है. बदलते मौसम और असंतुलित खेती प्रबंधन के कारण यह समस्या किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है. इससे न केवल उत्पादन घटता है, बल्कि फलों की गुणवत्ता भी खराब हो जाती है, जिससे बाजार में उचित दाम नहीं मिल पाता.
बिहार स्थित डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.के. सिंह ने किसान इंडिया (Kisan India) को बताया कि, आम के फल फटने के कई कारण होते हैं. उन्होंने बताया कि, अगर ऐसे में किसान समय रहते सही प्रबंधन नहीं करते हैं तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
क्या है आम में फल फटने की समस्या?
डॉ. एस.के. सिंह के अनुसार फल फटने की समस्या एक शारीरिक विकार है, जिसमें आम का छिलका अचानक फट जाता है. यह समस्या खासतौर पर फलों के पकने के समय अधिक देखने को मिलती है. जब फल के अंदरूनी भाग तेजी से बढ़ते हैं और बाहरी छिलका उतनी तेजी से नहीं फैल पाता, तो फल में दरार आ जाती है.
आम में फल फटने के मुख्य कारण
आम के फलों के फटने के पीछे कई वैज्ञानिक कारण होते हैं.
- सबसे बड़ा कारण जलवायु परिवर्तन है, जिसमें दिन में तेज गर्मी और अचानक बारिश फल की त्वचा पर दबाव डालती हैं.
- लंबे समय तक सूखा रहने के बाद अचानक अधिक पानी देने से भी यह समस्या बढ़ जाती है.
- मिट्टी में नमी का असंतुलन फल के अंदर तेजी से वृद्धि करता है, लेकिन छिलका कमजोर होने के कारण फट जाता है.
- पोषक तत्वों की कमी, खासकर कैल्शियम और बोरॉन की कमी, भी इस समस्या को बढ़ाती है.
- इसके साथ ही, अत्यधिक नाइट्रोजन उर्वरकों का उपयोग और हार्मोनल असंतुलन भी फल फटने के लिए जिम्मेदार होते हैं.
किसानों को होने वाला नुकसान
आम के फटने से किसानों को 20 से 60 फीसदी तक उत्पादन का नुकसान हो सकता है. इससे फलों की गुणवत्ता गिर जाती है और वे बाजार में कम कीमत पर बिकते हैं. साथ ही, निर्यात के लिए योग्य फल भी कम हो जाते हैं, जिससे किसानों की आय पर सीधा असर पड़ता है.
आम के फटने से बचाव के उपाय
- संतुलित सिंचाई प्रबंधन: फल विकास के दौरान मिट्टी में समान नमी बनाए रखें. 5-7 दिन के अंतराल पर हल्की सिंचाई करें और सूखे के बाद अचानक अधिक पानी देने से बचें.
- बोरॉन का छिड़काव: विशेषज्ञों के अनुसार, 15 अप्रैल तक बोरॉन (0.2-0.4 फीसदी) का छिड़काव करना बेहद जरूरी है. इससे फल की त्वचा मजबूत होती है और फटने की संभावना कम होती है.
- पोषक तत्वों का सही उपयोग: कैल्शियम नाइट्रेट और पोटाश का संतुलित उपयोग करें. ये तत्व फल की गुणवत्ता और मजबूती बढ़ाते हैं.
- मल्चिंग तकनीक अपनाएं: पेड़ों के चारों ओर भूसा या पुआल बिछाने से मिट्टी की नमी बनी रहती है और तापमान नियंत्रित रहता है.
- समय पर तुड़ाई करें: फलों को अधिक पकने से पहले तोड़ लें और सुबह या शाम के समय ही तुड़ाई करें, ताकि फटने की संभावना कम हो.
इन गलतियों से बचें
अत्यधिक नाइट्रोजन का उपयोग न करें और केवल यूरिया पर निर्भर न रहें. अनियमित सिंचाई से बचें और मौसम के बदलाव को नजरअंदाज न करें. जरूरत से ज्यादा रसायनों का छिड़काव भी नुकसानदायक हो सकता है.
आम में फल फटने की समस्या गंभीर जरूर है, लेकिन सही समय पर उचित कदम उठाकर इसे नियंत्रित किया जा सकता है. संतुलित सिंचाई, पोषक तत्वों का सही उपयोग और मौसम के अनुसार प्रबंधन अपनाकर किसान न केवल नुकसान कम कर सकते हैं, बल्कि अपनी आय में भी अच्छी बढ़ोतरी कर सकते हैं.