Dairy Farming: पशुपालकों की आय बढ़ाने और गांवों में दूध उत्पादन मजबूत करने के लिए मध्य प्रदेश पशुपालन विभाग ने क्षीर धारा ग्राम योजना शुरू की है. इस योजना के तहत जिले के 195 गांवों को चुना गया है, जहां पशुओं का 100 प्रतिशत टीकाकरण, टैगिंग और कृत्रिम गर्भाधान कराया जाएगा. इसके साथ ही लावारिस और बेसहारा पशुओं को पास की गोशालाओं तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि उन्हें सही देखभाल, भोजन और इलाज मिल सके. पशुपालन विभाग इन गांवों में पशुओं की सेहत, चारा, पोषण और आधुनिक पशुपालन को लेकर सर्वे कर रहा है. अब तक 167 गांवों में करीब 10 हजार परिवारों का ऑनलाइन सर्वे पूरा किया जा चुका है. योजना को तीन चरणों में लागू किया जाएगा.
जिन गांवों में ज्यादा दूध उत्पादन, वहां बनेगी दुग्ध समिति
मध्य प्रदेश की इस योजना के पहले चरण में उन गांवों को शामिल किया गया है, जहां पहले से 70 प्रतिशत तक टीकाकरण, टैगिंग और आधुनिक पशुपालन का काम हो रहा है. अब इसे बढ़ाकर 100 प्रतिशत किया जाएगा. सर्वे पूरा होने के बाद गांवों में बड़े स्तर पर टीकाकरण, टैगिंग और कृत्रिम गर्भाधान अभियान शुरू होगा. जिन गांवों में रोजाना 200 लीटर से ज्यादा दूध उत्पादन हो रहा है, वहां नई दुग्ध समितियां बनाने की तैयारी की जा रही है. इससे गांवों में दूध की खरीद और बिक्री आसान होगी. साथ ही पशुपालकों को दूध का सही दाम मिलने में भी मदद मिलेगी. विभाग का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी व्यवसाय को नई मजबूती मिलेगी.
उन्नत नस्ल के पशुओं पर रहेगा फोकस
योजना के तहत उन्नत नस्ल और सेक्स सॉर्टेड सीमेन के जरिए कृत्रिम गर्भाधान कराया जा रहा है. इससे ज्यादा दूध देने वाली बछिया और पाड़िया तैयार होंगी. पशुपालन विभाग का कहना है कि इससे आने वाले समय में दूध उत्पादन तेजी से बढ़ेगा. इसके साथ ही पशुओं की बीमारियों को रोकने और बांझपन की समस्या दूर करने के लिए गांवों में विशेष शिविर भी लगाए जा रहे हैं. जिले में 54 सर्वेयर और 22 पशु चिकित्सकों को ग्राम नोडल अधिकारी बनाया गया है. ये अधिकारी गांवों में जाकर पशुपालकों को जानकारी देने और योजना को सही तरीके से लागू करने का काम कर रहे हैं.
हर पशु की जानकारी रहेगी ऑनलाइन
उप संचालक पशुपालन और विभागीय अधिकारियों ने गांवों में चल रहे सर्वे का निरीक्षण भी किया. अधिकारियों के अनुसार सर्वे पूरा होने के बाद बड़े स्तर पर काम शुरू किया जाएगा. योजना के तहत सभी पशुओं के कानों में टैग लगाए जाएंगे. इस टैग में पशु और पशुपालक की पूरी जानकारी ऑनलाइन दर्ज रहेगी. टैग के जरिए यह पता लगाया जा सकेगा कि पशु ने कितनी बार गर्भधारण किया, किस नस्ल से कृत्रिम गर्भाधान हुआ और उसका मेडिकल रिकॉर्ड क्या है. इससे पशुओं की देखभाल और इलाज में आसानी होगी. पशुपालन विभाग का मानना है कि यह योजना गांवों में दूध उत्पादन बढ़ाने के साथ पशुपालकों की आय बढ़ाने में भी मदद करेगी.