किसान को भटकना नहीं पड़े.. शिकायत निपटान टॉप प्रायोरिटी, AI से कृषि को धार देने का ऐलान

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एआई, डेटा और डिजिटल गवर्नेंस से कृषि-ग्रामीण विकास को नई धार देने का ऐलान किया है. उन्होंने कृषि और ग्रामीण क्षेत्र के कार्यों और योजनाओं की मासिक समीक्षा और नतीजे जारी करने के निर्देश दिए हैं.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 22 May, 2026 | 08:17 PM

किसानों को अपनी परेशानियों और शिकायतों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एआई, डेटा और डिजिटल गवर्नेंस से कृषि-ग्रामीण विकास को नई धार देने का ऐलान किया है. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसानों और ग्रामीणों के विकास और उनतक सभी योजनाओं को आधुनिक तरीके से पहुंचाएं. उन्होंने नियम-प्रक्रिया को सरल बनाने के निर्देश दिए. हर महीने होगी समीक्षा होगी और जमीन पर समाधान चाहिए. कोर्ट केस, फाइल कल्चर और ड्राफ्टिंग पर तत्काल सुधार हो

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने दोनों मंत्रालयों के विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक लेकर साफ कहा कि सरकार का काम फाइलों में नहीं, जनता के जीवन में दिखना चाहिए.  उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसान, गरीब, ग्रामीण और आम नागरिक को योजनाओं का लाभ पाने या शिकायतों के समाधान के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए योजनाबद्ध, समयबद्ध और परिणाममुखी व्यवस्था तुरंत खड़ी की जाए.

किसान को दर-दर भटकना न पड़े

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आम आदमी और किसान को लड़ना न पड़े, उसे दर-दर भटकना न पड़े और उसे योजनाओं का लाभ सहज, सरल और समय पर मिलना चाहिए. इसी को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने कृषि, ग्रामीण विकास, भूमि संसाधन और आईसीएआर समेत संबंधित इकाइयों में शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत, प्रभावी और जवाबदेह बनाने के निर्देश दिए.

उन्होंने कहा कि अभी विभिन्न योजनाओं और विभागों में शिकायतों के निपटारे की अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं, जैसे अलग पोर्टल, अलग तंत्र और अलग प्रणाली, लेकिन अब इस व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी और परिणामकारी बनाने की जरूरत है. इसके लिए कृषि और ग्रामीण विकास, दोनों विभागों में कम से कम 10-10 अधिकारियों की टीम गठित करने को कहा गया, जो प्रतिदिन शिकायतों, जनसमस्याओं, पत्रों, और विभिन्न पोर्टलों पर आई समस्याओं की समीक्षा करे. यह देखा जाए कि लाभार्थी को राहत मिली या नहीं, योजना का लाभ पहुंचा या नहीं, और कहीं ऐसा तो नहीं कि रिकॉर्ड में वितरण दिख रहा हो लेकिन जमीन पर लाभार्थी को कुछ मिला ही न हो.

र महीने शिकायत निपटान की समीक्षा के निर्देश

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने अपने अनुभव का भी उल्लेख किया, जिसमें लाभार्थियों को फोन कर सत्यापन करने पर कुछ मामलों में कागज और वास्तविकता के बीच अंतर सामने आया था. उन्होंने साफ कहा कि यह समस्या आसान नहीं, बल्कि जटिल है, इसलिए शिकायतों की प्रकृति, क्षेत्रवार प्रवृत्ति और योजनावार अड़चनों की पहचान कर तंत्र में आवश्यक बदलाव करना होगा. हर महीने शिकायत निवारण व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी. महीने के पहले सोमवार को समीक्षा की जाएगी, हालांकि जून में खरीफ कार्यों की व्यस्तता को देखते हुए दूसरे सोमवार को विस्तृत समीक्षा की जाएगी, लेकिन तब तक तंत्र और अधिक व्यवस्थित, उत्तरदायी और प्रभावी हो जाना चाहिए.

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अब हर डिवीजन, हर योजना और हर विभाग अपने स्तर पर यह पहचाने कि आखिर कठिनाई कहां है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, सड़क योजना, कृषि योजनाएं, बागवानी, बीमा, विपणन या अन्य कार्यक्रमों में जहां कहीं लाभार्थी बेवजह चक्कर काट रहा है, वहां नियम, प्रक्रिया, तंत्र और कार्यप्रणाली को सरल बनाना ही होगा. प्रक्रियाओं को सरल किया जाए और पुराने रेगुलेशंस को खत्म करना जरूरी है.

एआई के जरिए कृषि और ग्रामीण विकास को रफ्तार दें

एआई और टेक्नोलॉजी के उपयोग पर कहा कि कृषि, ग्रामीण विकास, भूमि संसाधन और आईसीएआर सहित सभी क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल प्लेटफॉर्म, डेटा शेयरिंग, डेटा आधारित निर्णय, मॉनिटरिंग और इंटर-डिपार्टमेंटल समन्वय को और मजबूत किया जाना चाहिए. उन्होंने इसके लिए अलग टीम बनाकर अध्ययन करने और उपयोगी प्रस्ताव उनके सामने प्रस्तुत करने के निर्देश दिए. डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से पारदर्शिता और दक्षता दोनों बढ़ाई जा सकती हैं, लेकिन इसके लिए विभागों के बीच साझा कामकाज और डेटा इंटीग्रेशन जरूरी है. विभिन्न शिकायत डेटाबेस को जोड़ने की दिशा में काम चल रहा है, ताकि केवल एक पोर्टल की नहीं बल्कि समेकित शिकायत-प्रणाली के आधार पर विभागीय मूल्यांकन हो सके.

कृषि, पशुपालन, मत्स्य, फूड प्रोसेसिंग में समन्वय जरूरी

जो सुधार पहले ही किए जा चुके हैं, उनका “रिफॉर्म उत्सव” की तरह प्रचार-प्रसार होना चाहिए. आईसीएआर में पदोन्नति से जुड़ी नई व्यवस्था का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अब केवल शोध-पत्रों के आधार पर नहीं, बल्कि जमीन पर किए गए काम और उसके प्रभाव को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि असली काम राज्यों में होता है, इसलिए राज्यों के साथ रोडमैप आधारित साझेदारी, जोनल कॉन्फ्रेंस, योजनावार समन्वय और समस्या-आधारित संवाद को और मजबूत किया जाए.

उन्होंने कृषि, पशुपालन, मत्स्य, फूड प्रोसेसिंग और अन्य संबद्ध क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय की भी जरूरत बताई. उनका कहना था कि इंटीग्रेटेड फार्मिंग, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और क्षेत्रीय कृषि रोडमैप जैसे मुद्दों पर अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों को साथ बैठकर काम करना होगा. उन्होंने सरकारी भवनों और संस्थानों में पीएम सूर्य घर जैसी पहलों के अनुरूप सोलराइजेशन को भी आगे बढ़ाने की बात कही.

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Published: 22 May, 2026 | 08:15 PM

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