सुपर अल नीनो संकट से बचाएंगी 2 नई धान किस्में, धान रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर ने बताए फायदे
New Paddy Varieties to shield against Super El Nino crisis: अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान इरी वाराणसी के अंतरिम निदेशक डॉ. विकास सिंह ने कहा कि धान की नई दोनों किस्में कम पानी और जल्दी पैदावार देने में सक्षम हैं. उन्होंने कहा कि खेती में अल नीनो के प्रभाव को कम करने में DSR तकनीक बेहद कारगर है.
अल नीनो संकट से धान की खेती के सामने बड़े खतरे को देखते हुए दो नई धान की किस्में DRR धान 92 और CR धान 217 पेश की गई हैं. धान की यह दोनों किस्में सूखा स्थितियों से निपटने के लिए सक्षम बताई गई हैं. इन दोनों किस्मों में कम पानी की जरूरत होती है. ऐसे में कम बारिश की चिंताओं से निपटने के लिए धान की दो किस्में किसानों को बुवाई के लिए बताई गई हैं. आईसीएआर वाराणसी के अंतरिम डायरेक्टर डॉ. विकास सिंह ने कहा कि यह दोनों किस्में किसानों को लाभकारी साबित होंगी और कम पानी जरूरत के चलते सूखा स्थितियों में अच्छा उत्पादन देंगी.
अल नीनो का प्रभाव कम करने में DSR तकनीक कारगर
वाराणसी के हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में सुपर एल नीनो वर्ष 2026 में धान की सीधी बुआई और उन्नत खेती पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (International Rice Research Institute) इरी वाराणसी के अंतरिम निदेशक डॉ. विकास सिंह ने कहा कि धान की खेती में अल नीनो के प्रभाव को कम करने में DSR तकनीक बेहद कारगर है.
कई वर्षों के अनुसंधान के बाद दो नई धान किस्में आईं
उन्होंने कहा कि किसानों की लागत घटाने और आय बढ़ाने के लिए इरी अपने नेशनल पार्टनर्स के साथ मिलकर 2 नई वैरायटी लेकर आया है, जिससे कम पानी में अच्छा उत्पादन मिलता है. उन्होंने कहा कि यह दोनों धान की नई किस्में DRR धान 92 और CR धान 217 हैं. डॉ. विकास सिंह ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण यह है कि डायरेक्ट सीडेड परिस्थितियों में किसानों को बेहतर उत्पादन कैसे मिलेगा. इसी उद्देश्य से इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईआरआरआई) अपने राष्ट्रीय सहयोगी संस्थानों के साथ मिलकर कई वर्षों के अनुसंधान के बाद इस वर्ष दो नई धान किस्में लेकर आया है.
दो नई किस्में और उनकी खूबियां
पहली किस्म है डीआरआर धान-92 है और इसे भारतीय धान अनुसंधान संस्थान (आईआईआरआर) ने विकसित किया है. यह कम अवधि वाली किस्म है और मुख्य रूप से पूर्वोत्तर राज्यों के लिए जारी की गई है.
दूसरी किस्म सीआर धान-217 है और इसे केंद्रीय धान अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) कटक ने विकसित किया है. यह किस्म उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों के लिए जारी की गई है. इसकी अवधि लगभग 135 दिन है और यह मध्यम अवधि की किस्म है.
उत्पादन और किसानों की कमाई बढ़ाएंगी
डॉ. विकास सिंह ने कहा कि यह दोनों किस्में डायरेक्ट सीडेड परिस्थितियों के लिए विशेष रूप से विकसित की गई पहली बड़े स्तर की किस्में हैं. इसके अलावा कई अन्य किस्में भी परीक्षण के विभिन्न चरणों में हैं. उम्मीद है कि खेत स्तर पर परीक्षण पूरा होने और किसानों को इनका बीज उपलब्ध होने के बाद ये किस्में किसानों की उत्पादकता बढ़ाने और उनकी आय में वृद्धि करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी.