ऑस्ट्रेलिया की डॉरपर-टेक्सेल से सुधरेगी देसी भेड़ों की नस्ल, कश्मीर पहुंचीं 900 भेड़ें.. बढ़ेगी किसानों की कमाई

जम्मू-कश्मीर सरकार ने मटन उत्पादन बढ़ाने के लिए ऑस्ट्रेलिया से 900 डॉरपर और टेक्सेल भेड़ें आयात की हैं. इन उच्च गुणवत्ता वाली नस्लों का उपयोग स्थानीय भेड़ों के साथ क्रॉस-ब्रीडिंग में किया जाएगा. इस पहल से मटन उत्पादन बढ़ेगा, किसानों की आय में सुधार होगा और बाहरी राज्यों से आने वाले मटन पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी.

नोएडा | Updated On: 17 Jun, 2026 | 01:25 PM

Sheep Farming: जम्मू-कश्मीर में स्थानीय मटन उत्पादन बढ़ाने और पशुपालन क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. इसी कड़ी में ऑस्ट्रेलिया से उच्च गुणवत्ता वाली भेड़ों की नस्लें आयात कर उन्हें सरकारी फार्मों में भेजा गया है. समग्र कृषि विकास कार्यक्रम के तहत लाई गई 900 डॉरपर और टेक्सेल भेड़ों से न केवल मटन उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी, बल्कि केंद्र शासित प्रदेश की बाहरी राज्यों से आने वाले मटन पर निर्भरता भी कम होने की उम्मीद है.

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, आयातित 900 विदेशी भेड़ें में 450 डॉरपर और 450 टेक्सेल नस्ल की हैं. इसका उद्देश्य पशुपालन क्षेत्र को मजबूत करना और जम्मू-कश्मीर में बाहर से आने वाले मटन पर निर्भरता कम करना है. डॉरपर नस्ल को जम्मू संभाग में रखा गया है, जबकि टेक्सेल नस्ल को कश्मीर में भेजा गया है. दोनों नस्लें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर मांस उत्पादन, तेज वृद्धि और अधिक उत्पादकता के लिए जानी जाती हैं, जो पारंपरिक भेड़ नस्लों  की तुलना में बेहतर मानी जाती हैं.

डॉरपर भेड़ की खासियत

डॉरपर भेड़, जो मूल रूप से दक्षिण अफ्रीका में विकसित की गई एक मांस उत्पादक नस्ल है, तेज बढ़वार और अधिक मांस उत्पादन  के लिए जानी जाती है. इसके मेमने सिर्फ चार महीनों में 35 से 40 किलोग्राम तक वजन हासिल कर लेते हैं, जबकि वयस्क भेड़ें 90 किलोग्राम से भी अधिक वजन तक पहुंच जाती हैं. वहीं टेक्सेल भेड़, जो नीदरलैंड से संबंधित नस्ल है, अपने दुबले और मजबूत मांस के लिए मशहूर है. इसके मेमने 4 से 5 महीनों में 35 से 40 किलोग्राम तक पहुंच जाते हैं. वयस्क मादा भेड़ का वजन आमतौर पर 65 से 75 किलोग्राम और नर भेड़ का वजन 90 से 110 किलोग्राम तक होता है. यही कारण है कि इसे दुनिया की सबसे अधिक उत्पादक मांस उत्पादक भेड़ की नस्लों में गिना जाता है.

भेड़ पालन से बढ़ेगा मांस उत्पादन

जम्मू-कश्मीर के कृषि उत्पादन मंत्री जावेद अहमद डार ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य राज्य में स्थानीय भेड़ों की आनुवंशिक क्षमता को बेहतर बनाना और मटन उत्पादन बढ़ाना है. उन्होंने कहा कि यह योजना वैज्ञानिक तरीके से प्रजनन के जरिए किसानों को फायदा पहुंचाएगी और समय के साथ बेहतर नस्लों का वितरण किया जाएगा. यह पहल समग्र कृषि विकास कार्यक्रम के तहत शुरू की गई है, जिसका लक्ष्य भेड़ पालन क्षेत्र को आधुनिक बनाना, किसानों की आय बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है.

60,000 टन मटन की खपत

आयातित डॉरपर और टेक्सेल नस्लों का उपयोग स्थानीय भेड़ों के साथ क्रॉस-ब्रीडिंग के लिए किया जाएगा, जिससे बेहतर वृद्धि दर, अधिक मांस उत्पादन और बेहतर अनुकूलन क्षमता वाले पशु विकसित किए जा सकें. मंत्री ने कहा कि यह पहल सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य जम्मू-कश्मीर को मटन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है. जम्मू-कश्मीर में मटन की मांग और स्थानीय उत्पादन के बीच बड़ा अंतर है. यहां हर साल करीब 55,000 से 60,000 टन मटन की खपत होती है, जबकि स्थानीय उत्पादन केवल 30,000 से 37,000 टन के बीच रहता है.

Published: 17 Jun, 2026 | 01:22 PM

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