राष्ट्रीय गोकुल मिशन को केंद्र ने बढ़ाया, KCC लाभ लेने वाले डेयरी किसानों की संख्या 4 साल में 3 गुना बढ़ी

Rashtriya Gokul Mission : केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री ने कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं और वित्तीय सहायता कार्यक्रमों के कारण डेयरी क्षेत्र लगातार मजबूत हो रहा है, जिसका असर देश के दूध उत्पादन पर भी दिखाई दे रहा है.

नोएडा | Updated On: 11 Aug, 2026 | 08:57 PM

पशु नस्ल सुधार, दूध उत्पादन बढ़ोत्तरी के 2014 से चलाई जा रही गोकुल मिशन योजना को केंद्र सरकार ने आगे भी जारी रखने का फैसला किया है. केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री ने कहा कि डेयरी सेक्टर में तेज ग्रोथ देखी जा रही है. घरेलू खपत के मुकाबले दूध उत्पादन में भारी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. वहीं, दूध कारोबार बढ़ाने, डेयरी खोलने या पशुओं की खरीद के लिए पशुपालकों ने किसान क्रेडिट कार्ड योजना का जमकर लाभ लिया है और 4 साल में लाभार्थी डेयरी किसानों की संख्या 3 गुना बढ़ गई है.

डेयरी किसानों ने खूब लिया केसीसी का लाभ

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने मंगलवार को बताया कि किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना के तहत संस्थागत ऋण पाने वाले पशुपालन और डेयरी किसानों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. वर्ष 2021-22 में जहां 15.08 लाख पशुपालक किसान इस योजना से लाभान्वित हो रहे थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 50.42 लाख पहुंच गई है. इससे स्पष्ट है कि पशुपालन क्षेत्र के किसानों की औपचारिक बैंकिंग और ऋण सुविधाओं तक पहुंच तेजी से बढ़ी है.

जरूरत से ज्यादा दूध का उत्पादन में सफलता

केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री ने कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं और वित्तीय सहायता कार्यक्रमों के कारण डेयरी क्षेत्र लगातार मजबूत हो रहा है, जिसका असर देश के दूध उत्पादन पर भी दिखाई दे रहा है. वर्ष 2024-25 में भारत का कुल दूध उत्पादन 2470.87 लाख टन तक पहुंच गया, जो देश की अनुमानित 2430 लाख टन की घरेलू मांग से अधिक है. इससे भारत की डेयरी आत्मनिर्भरता और उत्पादन क्षमता का पता चलता है. उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय डेयरी उत्पादों की वैश्विक मांग बढ़ रही है. वित्त वर्ष 2025-26 में डेयरी उत्पादों का कुल निर्यात 407.18 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो इस क्षेत्र की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता को दर्शाता है.

नस्ल सुधार के लिए जारी रहेगा राष्ट्रीय गोकुल मिशन

राजीव रंजन सिंह ने आगे कहा कि दूध उत्पादन और पशुधन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार राष्ट्रीय गोकुल मिशन (आरजीएम) का विस्तार कर रही है. दिसंबर 2014 से संचालित इस योजना को आगे भी जारी रखने का फैसला किया गया है. योजना का उद्देश्य देशी पशु नस्लों का संरक्षण, आनुवंशिक सुधार और दूध उत्पादन बढ़ाना है. सरकार का मानना है कि बेहतर नस्लों के विकास से प्रति पशु दूध उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में भी वृद्धि होगी. इसके साथ ही देशी नस्लों के संरक्षण से दीर्घकालिक पशुधन सुरक्षा और जैव विविधता को भी मजबूती मिलेगी.

राष्ट्रीय पशुधन मिशन से छोटे पशुओं के उत्पादन पर जोर

पशुपालन क्षेत्र में वैज्ञानिक प्रजनन और बेहतर चारे की उपलब्धता पक्का करने के लिए सरकार राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) भी चला रही है. यह योजना वर्ष 2014-15 से लागू है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य रोजगार सृजन, उद्यमिता विकास और प्रति पशु उत्पादकता बढ़ाना है. इसके तहत मांस, बकरी के दूध, अंडों और ऊन के उत्पादन में वृद्धि पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि एनएलएम का मुख्य लक्ष्य असंगठित क्षेत्र में उपलब्ध पशुधन उत्पादों को संगठित बाजार से जोड़ना और उद्यमियों के लिए आगे एवं पीछे दोनों प्रकार की आपूर्ति श्रृंखला तैयार करना है.

पशु स्वास्थ्य सुधार के लिए अभियान तेज

केंद्र सरकार पशुओं को गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए भी व्यापक कदम उठा रही है. पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एलएचडीसीपी) के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 100 फीसदी वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है. इस योजना के तहत फुट एंड माउथ डिजीज (एफएमडी), ब्रुसेलोसिस, पेस्ट डेस पेटिट्स रूमिनेंट्स (पीपीआर) और क्लासिकल स्वाइन फीवर (सीएसएफ) जैसी आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण बीमारियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है.

राज्यों को अन्य पशु रोगों के टीकाकरण, उभरती बीमारियों की रोकथाम, प्रयोगशालाओं को मजबूत बनाने, रोग निगरानी, प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों के लिए भी साझा वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है.

Published: 11 Aug, 2026 | 06:52 PM

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