गायों में लंपी वायरस का कहर.. संक्रमित मवेशियों की संख्या तेजी से बढ़ रही, किसान ये उपाय करें
Lumpy Virus Attack: पशुपालन विभाग ने लंपी वायरस बीमारी को रोकने के लिए निगरानी और उपचार के प्रयास तेज कर दिए हैं. अधिकारियों ने कहा कि बीमारी से निपटने के लिए पशुपालन विभाग को करीब 13,500 टीके मिले हैं.
हिमाचल प्रदेश, हरियाणा समेत कई राज्यों में मवेशियों में लंपी वायरस का तेजी से संक्रमण देखा जा रहा है. हिमाचल प्रदेश में लंपी वायरस के लगातार मामलों में उछाल देखा जा रहा है. राज्य के हमीरपुर में लंपी रोग से एक बछड़े की मौत हो गई है और 33 मवेशी संक्रमित पाए गए हैं. इसी तरह सोलन और अन्य जिलों में भी मामले पाए गए हैं. पशुपालन विभाग ने बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए निगरानी और उपचार के प्रयास तेज कर दिए हैं. किसानों को भी सलाह जारी की गई है.
5 दिन में 33 मवेशी लंपी वायरस की चपेट में आए
हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में लंपी त्वचा रोग से एक बछड़े की मौत हो गई है और 33 मवेशी संक्रमित पाए गए हैं. पशुपालन विभाग के अधिकारियों के अनुसार पिछले चार-पांच दिनों में जिले के विभिन्न इलाकों से लंपी रोग के कम से कम 34 मामले सामने आए हैं. बरसार क्षेत्र में इससे एक बछड़े की मौत हो गई है. उन्होंने बताया कि नादौन क्षेत्र में सबसे अधिक 12 मामले सामने आए हैं, जबकि भोरंज और सुजानपुर में दो-दो मामले दर्ज किए गए हैं.अन्य प्रभावित क्षेत्रों में भी पशुओं में बीमारी के लक्षण पाए जाने के बाद पशुपालन विभाग ने निगरानी और उपचार के प्रयास तेज कर दिए हैं.
13 हजार से ज्यादा टीके लगाने की शुरुआत
हिमाचल प्रदेश पशुपालन विभाग ने बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए निगरानी और उपचार के प्रयास तेज कर दिए हैं. अधिकारियों ने बताया कि बीमारी से निपटने के लिए पशुपालन विभाग को करीब 13,500 टीके मिले हैं. इन टीकों को पशु चिकित्सालयों और संबंधित केंद्रों में भेज दिया गया है, ताकि संवेदनशील क्षेत्रों में पशुओं का समय पर टीकाकरण सुनिश्चित किया जा सके. पिछले वर्ष हमीरपुर में करीब 16,000 पशुओं को लंपी त्वचा रोग से बचाव का टीका लगाया गया था. वर्ष 2023 में बीमारी के बड़े प्रकोप के बाद बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया गया था.
कैसे फैलता है लंपी रोग और क्या करें पशुपालक
लंपी त्वचा रोग (एलएसडी) गायों और भैंसों को प्रभावित करने वाला संक्रामक रोग है. यह कैप्रिपॉक्स वायरस के कारण होता है. यह बीमारी मच्छरों, मक्खियों और किलनियों के जरिए फैलती है. इससे मवेशियों में तेज बुखार, त्वचा पर कठोर गांठें, आंखों और नाक से स्राव शुरू हो सकता है तथा उनके दूध देने की क्षमता काफी कम हो सकती है. हमीरपुर पशुपालन विभाग के सहायक निदेशक (परियोजना) डॉ. सतीश ने जारी सलाह में पशुपालकों को सतर्क रहने, अपने पशुओं की नियमित जांच करने और शरीर पर असामान्य गांठ, बुखार या कमजोरी के लक्षण दिखने पर तुरंत पशु चिकित्सक को सूचित करने की सलाह दी है.