पोल्ट्री फार्म खोलकर तीन युवतियों ने बदली तस्वीर, अच्छी कमाई और मिला लखपति दीदी सम्मान
Poultry Farming Business : जबलपुर की तीन युवतियों ने सरकारी योजना के तहत लोन लेकर मुर्गी पालन की शुरुआत की आज बेहतर कमाई करते हुए आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है. युवतियों को लखपति दीदी सम्मान से भी नवाजा गया है.
Madhya Pradesh Women Farmers Success Story: मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार नए आयाम स्थापित कर रहा है. मिशन से जुड़कर जबलपुर जिले की कई महिलाओं ने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी हैं. ऐसी ही तीन पार्वती, दीपिका और मुस्कान की प्रेरक कहानियां कुण्डम विकासखंड से सामने आई हैं, इन तीनों महिलाओं ने अपने साहस, मेहनत और सरकारी योजनाओं के सहयोग से सफलता की नई इबारत लिखी है.
आर्थिक तंगी से आत्मनिर्भरता तक का सफर
मध्य प्रदेश के पशुपालन विभाग के अनुसार जबलपुर जिले के कुण्डम तहसील की ग्राम पंचायत मड़ई के अंतर्गत छोटे से गांव हंसपुर निवासी पार्वती आर्मो की कहानी संघर्ष और सफलता का उदाहरण है. वर्ष 2023 में उन्होंने मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के स्व-सहायता समूह के माध्यम से सामुदायिक निवेश निधि एवं सीसीएल के तहत 1 लाख रुपये का ऋण प्राप्त कर ‘गीता कृषि केंद्र’ की स्थापना की. इसके बाद कृषि कार्यों के लिए अतिरिक्त ऋण भी लिया.
पार्वती ने सिंजेंटा फाउंडेशन के माध्यम से 40 दिवसीय कृषि उद्यमी प्रशिक्षण प्राप्त किया तथा आजीविका मिशन से तकनीकी कौशल हासिल किया. प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता के बल पर उन्होंने सीसीएल से 6 लाख रुपये का ऋण लेकर 4 हजार वर्गफीट क्षेत्र में आधुनिक पोल्ट्री फार्म स्थापित किया. वर्तमान में उनके पोल्ट्री फार्म में लगभग 3 हजार चूजे हैं.
पार्वती बताती हैं कि वर्ष 2023 से पहले उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी, लेकिन आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद उनके जीवन में आमूलचूल परिवर्तन आया. आज वे सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर रही हैं, परिवार का बेहतर ढंग से पालन-पोषण कर रही हैं और गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं. उनकी उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें शासन द्वारा ‘लखपति दीदी’ के सम्मान से भी नवाजा गया है.
मुर्गी पालन से लिखी सफलता की नई कहानी
इसी तरह कुण्डम तहसील के ग्राम पड़रिया की दीपिका गोटिया और मुस्कान ने भी आजीविका मिशन के सहयोग से आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है. दीपिका ने सबसे पहले दुकान संचालन के लिए ऋण प्राप्त किया. इसके बाद प्रशिक्षण हासिल कर मुर्गी पालन व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया. दोनों महिलाओं ने साझेदारी में देशी नस्ल की मुर्गियों के पालन के लिए पोल्ट्री फार्म स्थापित किया. इस उद्यम के लिए उन्हें कुल 2.80 लाख रुपये का ऋण मिला, जिसमें दीपिका और मुस्कान ने 1.40-1.40 लाख रुपये की राशि प्राप्त की.
अपने मुर्गीपालन केंद्र पर दीपिका गोटिया.
लखपति दीदी के नाम से जानते हैं लोग
दीपिका और मुस्कान बताती हैं कि पहले वे घर से सिलाई का कार्य कर सीमित आय अर्जित करती थीं, लेकिन आज वे गांव में एक सफल उद्यमी के रूप में पहचानी जाती हैं और लोग उन्हें सम्मानपूर्वक ‘लखपति दीदी’ के नाम से जानते हैं. आज दोनों सफलतापूर्वक मुर्गी पालन का कार्य कर रही हैं और प्रतिमाह 10 से 12 हजार रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं.
महिलाओं के सशक्तिकरण की बन रही मिसाल
मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से मिल रहे प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान किया है. पार्वती, दीपिका और मुस्कान जैसी महिलाओं की सफलता यह साबित करती है कि यदि सही मार्गदर्शन और संसाधन उपलब्ध हों तो ग्रामीण महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदल सकती हैं, बल्कि समाज में सशक्त नेतृत्व की भूमिका भी निभा सकती हैं.
Published: 11 Jun, 2026 | 06:33 PM