कीटनाशक बिल पर बवाल! संसद से पहले ही उद्योग में ‘डेटा वॉर’, किसानों पर पड़ सकता है सीधा असर

Pesticide Bill India: केंद्र सरकार जल्द ही नया कीटनाशक कानून लाने वाली है, लेकिन इसको लेकर कंपनियों और संगठनों के बीच ही मतभेद शुरू हो गए हैं. कुछ कंपनियां चाहती हैं कि उनके रिसर्च और डेटा को सुरक्षा मिले (यानी कोई दूसरा उसे आसानी से इस्तेमाल न कर सके), ताकि वे नई तकनीक और बेहतर प्रोडक्ट बनाने में ज्यादा निवेश करें. उनका मानना है कि इससे खेती में नए और अच्छे कीटनाशक आएंगे. वहीं दूसरी तरफ, कुछ संगठन इसका विरोध कर रहे हैं.

नोएडा | Updated On: 30 Apr, 2026 | 06:21 PM

Pesticide Bill: कीटनाशक बिल को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि सरकार जल्द ही नया कीटनाशक बिल संसद के अगले सत्र में पेश करेगी. इस ऐलान के बाद कृषि रसायन से जुड़े उद्योग में बहस तेज हो गई है, और खास बात यह है कि कंपनियों के बीच ही इस बिल को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है.

उद्योग में दो गुट, अलग-अलग मांगें

कीटनाशक सेक्टर के दो प्रमुख संगठन आमने-सामने खड़े हैं.

यह टकराव अब किसानों और कंपनियों दोनों के भविष्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है.

क्या है रेगुलेटरी डेटा प्रोटेक्शन?

जब कोई कंपनी नया कीटनाशक बनाती है, तो उसे रिसर्च, ट्रायल और परीक्षण में काफी निवेश करना पड़ता है. इस प्रक्रिया में जो डेटा तैयार होता है, उसे सरकार को जमा किया जाता है.

समर्थकों का कहना है कि इससे कंपनियों को नई खोज (Innovation) के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और नए उत्पाद विकसित होंगे.

विरोध क्यों हो रहा है?

PMFAI का मानना है कि:

संगठन के अनुसार, इसका सीधा असर किसानों की लागत और मुनाफे पर पड़ेगा.

भारतीय कंपनियों पर खतरा?

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर डेटा प्रोटेक्शन लागू हुआ, तो इसका ज्यादा फायदा बड़ी विदेशी कंपनियों (MNCs) को मिल सकता है।

PMFAI के मुताबिक:

क्या नवाचार सच में बढ़ेगा?

डेटा प्रोटेक्शन के समर्थक इसे नवाचार के लिए जरूरी बताते हैं, लेकिन विरोध करने वाले आंकड़ों के साथ इस दावे पर सवाल उठाते हैं.

PMFAI के अनुसार:

भारत का बढ़ता कृषि रसायन बाजार

भारत का कृषि रसायन क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है:

यह दिखाता है कि बिना अतिरिक्त डेटा सुरक्षा के भी देश इस क्षेत्र में मजबूत स्थिति में है.

संसद और वैश्विक नजरिया

इस मुद्दे पर पहले भी चर्चा हो चुकी है. कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2020 पर विचार करते समय संसदीय समिति ने कहा था कि, 20 साल का पेटेंट ही पर्याप्त है, अतिरिक्त डेटा सुरक्षा की जरूरत नहीं. वैश्विक स्तर पर भी इसे TRIPS-Plus नियम माना जाता है, जो विश्व व्यापार संगठन के मानकों से भी ज्यादा सख्त है. कीटनाशक बिल पर चल रही यह बहस सिर्फ कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर किसानों की लागत और आय पर पड़ेगा. अगर डेटा प्रोटेक्शन लागू होता है, तो नवाचार बढ़ सकता है, लेकिन साथ ही कीटनाशकों की कीमतें भी बढ़ने का खतरा है.

Published: 30 Apr, 2026 | 07:44 PM

Topics: