खाना पकाने के लिए LPG की जरूरत खत्म होगी.. कुकिंग गैस के रूप में इस्तेमाल होगा इथेनॉल? केंद्र को भेजी चिट्ठी
Ethanol alternative to LPG: गन्ना, मक्का समेत अन्य कई अनाजों से इथेनॉल बनाया जाता है और इसका इस्तेमाल पेट्रोल में मिश्रण कर किया जा रहा है, जो पूरी तरह सफल है. अब इथेनॉल का इस्तेमाल खाना पकाने के लिए एलपीजी की जगह करने का प्रस्ताव दिया गया है.
मौजूदा वैश्विक हालातों के मद्देनजर खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाली एलपीजी गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है. ऐसे में इसके विकल्प के रूप में इथेनॉल को पेश किया गया है. इथेनॉल इंडस्ट्री ने केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखकर बताया है कि टारगेट से ज्यादा इथेनॉल का प्रोडक्शन होने वाला है और ई-20 मिश्रण टारगेट को पहले ही पूरा किया जा चुका है. ऐसे में देश में इथेनॉल की मात्रा सरप्लस रहने वाली है, जिसका इस्तेमाल कुकिंग गैस की तरह खाना पकाने में किया जा सकता है.
ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (एआईडीए) ने एलपीजी के राष्ट्रव्यापी विकल्प के रूप में इथेनॉल आधारित खाना पकाने की शुरुआत करने के लिए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय को चिट्ठी भेजी है. केंद्र सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव डॉ. नीरज मित्तल (आईएएस) को भेजी गई चिट्ठी में कहा गया है कि सरप्लस इथेनॉल के लिए वैकल्पिक घरेलू उपयोग के रास्ते तलाशना जरूरी है और इसमें एलपीजी की जगह इथेनॉल को इस्तेमाल किया जा सकता है. कहा गया है कि इथेनॉल आधारित खाना पकाने के समाधानों को बढ़ावा देना होगा.
एलपीजी के विकल्प के रूप में इथेनॉल
इथेनॉल निर्माताओं, बायोएनर्जी उत्पादक क्षेत्र के स्टेकहोल्डर्स का प्रतिनिधित्व करने वाले शीर्ष उद्योग निकाय ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (एआईडीए) की ओर से केंद्र सरकार से कहा गया है कि हम भारत में सरप्लस इथेनॉल के लिए वैकल्पिक घरेलू इस्तेमाल का रास्ता विकसित करने की बढ़ती जरूरत पर ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं.
हाल के भू-राजनीतिक व्यवधानों ने एलपीजी आपूर्ति को सख्त कर दिया है, जिससे घरेलू खपत को प्राथमिकता दी गई है. लेकिन कमर्शियल यूजर्स को आपूर्ति बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है. खाना पकाने के ईंधन एलपीजी पर अत्यधिक निर्भरता की बजाय इसके ऊर्जा विकल्पों में विविधता लाने की तत्काल जरूरत है. इसके लिए इथेनॉल सही विकल्प बन सकता है.
टारगेट से ज्यादा होगा इथेनॉल उत्पादन
एसोसिएशन ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में किए गए लगभग 40,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ घरेलू इथेनॉल इंडस्ट्री ने पर्याप्त उत्पादन क्षमता विकसित की है. 28 फरवरी 2026 (ESY 2025-26) तक 353 करोड़ लीटर से अधिक इथेनॉल पहले ही मिश्रित किया जा चुका है. इससे पेट्रोल में 20 फीसदी का औसत मिश्रण किया जा रहा है. वर्तमान में सालाना इथेनॉल उत्पादन क्षमता लगभग 2000 करोड़ लीटर है, जिसे 2026-27 तक 2400+ करोड़ लीटर तक बढ़ाने की क्षमता है. ऐसे में इथेनॉल का उत्पादन जरूरत से ज्यादा होगा. सरप्लस इथेनॉल से खाना पकाने के समाधान के रूप में इस्तेमाल किया जाए. यह शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के घरों के साथ-साथ छोटे फूड बिजनेस और कमर्शियल प्रतिष्ठानों के लिए एलपीजी का विकल्प मिलेगा.
ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (एआईडीए) की चिट्ठी.
इथेनॉल से खाना पकाने के लाभ
- ऊर्जा सुरक्षा: आयात की जा रही एलपीजी पर निर्भरता कम होगी और घरेलू खपत के लिए ऊर्जा विकल्प मिलेगा.
- सरप्लस का इस्तेमाल: अतिरिक्त इथेनॉल उत्पादन को इस्तेमाल करने के लिए एक व्यवहार्य रास्ता मिलेगा.
- क्लीनर दहन: कम कण उत्सर्जन, इनडोर वायु प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी.
- लागत लाभ: कमर्शियल एलपीजी की तुलना में अधिक किफायती साबित होगा.
- ऊर्जा स्रोत: स्थानीय स्तर पर उत्पादन और आपूर्ति करने में आसानी होगी.
- किसानों को समर्थन: चावल, मक्का जैसे कृषि आधारित फीडस्टॉक की मांग को मजबूती मिलेगी.
- अपनाने में आसानी: घरेलू और छोटे कमर्शियल प्रतिष्ठानों को खाना पकाने के लिए जरूरी हीट देने में सक्षम.
- इथेनॉल स्टोव -1.5-3 किलोवाट गर्मी उत्पन्न करते हैं, जो सामान्य भारतीय खाना पकाने की जरूरतों के लिए पर्याप्त है.
केंद्र इथेनॉल कुकस्टोव के लिए मानक तय करे
ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (एआईडीए) ने कहा कि खाना पकाने के ईंधन के रूप में इथेनॉल को चरणबद्ध तरीके से अपनाने का समर्थन करने के लिए केंद्र सरकार एक सक्षम नीति और नियामक ढांचा बनाएं. इसके साथ ही इथेनॉल कुकस्टोव के लिए सुरक्षा, क्वालिटी और प्रदर्शन मानक तय किए जाएं. एसोसिएशन ने कहा कि वर्तमान में एक विस्तृत श्वेत पत्र और इथेनॉल से खाना पकाने के समाधान पर एक प्रोटोटाइप विकसित करने के लिए एक प्रमुख संस्थान के साथ प्रारंभिक चर्चा में है. इस पहल का उद्देश्य ऐसे स्केलेबल अपनाने का समर्थन करने के लिए तकनीकी सत्यापन, डिजाइन अनुकूलन और कार्यान्वयन मार्ग प्रदान करना है.