हीटस्ट्रोक से पक्षियों के बेहोश होने और मरने के मामले बढ़े, चील-कबूतर और गायों पर संकट
hydrated birds fall from skies: वेटेरिनेरियन ने कहा कि उनके यहां रोजाना गर्मी से जुड़ी बीमारियों से जुड़े लगभग 20 पक्षियों के मामले आ रहे हैं, जो हाल के हफ्तों में लगभग 50 परसेंट बढ़ गए हैं. पिजनपॉक्स और पिग फीवर की बीमारी का संक्रमण भी तेजी से बढ़ा है.
दिल्ली के कई इलाकों में भयंकर गर्मी देखी जा रही है. इस दौरान पानी की कमी से परेशान पक्षी हीटस्ट्रोक का शिकार होकर खिड़कियों और बालकनी से गिर रहे हैं. जबकि, आवारा पशुओं में पेट में इंफेक्शन देखा जा रहा है. एनीमल एक्सपर्ट ने बढ़ते मामलों पर गहरी चिंता जताई है. जानवरों के डॉक्टरों और जानवरों को बचाने वालों का कहना है कि थके हुए कबूतर आसमान से बेहोश होकर गिर रहे हैं, पानी की कमी से परेशान चील सड़कों के किनारे से बेहोशी की हालत उठाए जा रहे हैं.
दिल्ली पिछले कुछ दिनों से हीटवेव की हालत में है, कई इलाकों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया है, जिससे हीट स्ट्रोक, बहुत ज्यादा सूखे और रातें गर्म हो रही हैं. इसके चलते गर्म मौसम पशु पक्षियों पर बुरा असर देखा जा रहा और उनकी मौत का कारण बन गया है. जानवरों के डॉक्टरों और बचाने वालों का कहना है कि पिछले कुछ हफ्तों में पानी की कमी, हीट स्ट्रोक और इंफेक्शन से परेशान पक्षियों और आवारा जानवरों से जुड़ी शिकायतें और फोन कॉल तेजी से बढ़ी हैं.
पक्षियों के साथ गाय और घोड़ों के मामले 50 फीसदी बढ़े
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली-NCR इलाके में अभय दानम बर्ड एंड एनिमल हॉस्पिटल के एक वेटेरिनेरियन ने कहा कि उनके यहां रोजाना गर्मी से जुड़ी बीमारियों से जुड़े लगभग 20 पक्षियों के मामले आ रहे हैं, जो हाल के हफ्तों में लगभग 50 परसेंट बढ़ गए हैं. उन्होंने PTI को बताया कि हमारे पास आने वाले ज्यादातर पक्षी कबूतर हैं. उनमें से ज्यादातर पिजन पॉक्स से पीड़ित हैं. यह एक इंफेक्शन है जो बहुत ज्यादा गर्मी और खराब मौसम में फैलता है. हमें घोड़ों और गायों के अलावा दूसरी तरह के पक्षी भी मिल रहे हैं, जिन्हें डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और हिलने-डुलने में दिक्कत हो रही है.
पिजनपॉक्स की बीमारी का संक्रमण बढ़ा
पिजन पॉक्स एक वायरल बीमारी है जो कबूतरों और दूसरे पक्षियों को प्रभावित करती है और इससे घाव, कमजोरी और खाने में दिक्कत होती है. एक्सपर्ट्स ने कहा कि बहुत ज्यादा गर्मी, स्ट्रेस और गंदा माहौल अक्सर ऐसे इंफेक्शन को और बढ़ा देता है. शाहदरा और चांदनी चौक इलाकों में काम करने वाले एक वेटेरिनेरियन ने पीटीआई से कहा कि उन्हें अभी हर दिन लगभग 70 से 80 मामले आ रहे हैं, जिनमें डिहाइड्रेशन, सांस लेने में तकलीफ और गर्मी से जुड़ी परेशानी वाले पक्षी शामिल हैं.
उन्होंने कहा ज्यादातर मामले कबूतरों, चील के हैं. हीटवेव की वजह से कई पक्षी बेहोशी की हालत में हमारे पास लाए जाते हैं. हम उन्हें होश में लाने और ठीक होने में मदद के लिए ORS और फ्लूइड दे रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि कुछ पक्षी बहुत गंभीर हालत में आते हैं और हम उन्हें बचा नहीं पाते.
पिग फीवर भी बड़ी समस्या बना
पीपुल फॉर एनिमल्स की मंता सिद्धू ने कहा कि ऑर्गनाइजेशन गर्मियों में डिहाइड्रेशन और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इन्फेक्शन से परेशान कई आवारा कुत्तों, बिल्लियों और दूसरे सड़क के जानवरों को भी बचा रहा है. उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में कचरा बहुत तेजी से सड़ता है. जब जानवर कचरे के ढेर या ट्रक से खाना खाते हैं, तो उन्हें टॉक्सिसिटी और गैस्ट्रो इन्फेक्शन हो जाता है. पिग फीवर भी एक बड़ी समस्या बन रहा है.
हीटस्ट्रोक के शिकार पक्षियों में सबसे ज्यादा चील
विद्यासागर जीव दया परिवार NGO के अभिषेक जैन अपने भाई अमित जैन के साथ दिल्ली-NCR में चौबीसों घंटे बर्ड एम्बुलेंस सर्विस चलाते हैं. उन्होंने कहा कि ऑर्गनाइजेशन को अभी हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन से प्रभावित पक्षियों से जुड़े रोजाना लगभग 40 डिस्ट्रेस कॉल आ रहे हैं. अभिषेक जैन ने कहा कि हमने गर्मी से जुड़े मामलों में लगभग 30 परसेंट की बढ़ोतरी देखी है. कई पक्षी डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक के कारण बेहोश पाए जाते हैं. हम उन्हें बचाते हैं और तुरंत इलाज देते हैं. उन्होंने कहा कि चल रही हीटवेव के दौरान बचाए जा रहे पक्षियों में एक बड़ा हिस्सा चील का है.
जीवों को बचाने के लिए आउटरीच कैंपेन शुरू
NGO के चेयरपर्सन अमित जैन ने कहा कि ऑर्गनाइजेशन ने जानवरों को भयंकर गर्मी में जिंदा रहने में मदद करने के लिए बड़े पैमाने पर एक आउटरीच कैंपेन शुरू किया है. उन्होंने कहा कि हमने पानी के 10,000 बर्तन मुफ्त बांटना शुरू कर दिया है ताकि लोग उन्हें अपने घरों के बाहर पक्षियों और आवारा जानवरों के लिए रख सकें. एक बार जब ये पक्षी बेहोश हो जाते हैं, तो वे दूसरे जानवरों के हमलों का भी शिकार हो सकते हैं, जिससे उन्हें चोटें लग सकती हैं जिनके लिए एक्स्ट्रा इलाज की जरूरत होती है.
वेटलैंड और सिकुड़ता ग्रीन कवर और घटता पानी बना संकट
बर्ड काउंट इंडिया के पंकज गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में पक्षी ज्यादा तापमान के हिसाब से ढल जाते हैं, लेकिन तेजी से शहरीकरण और वेटलैंड्स में कमी से जिंदा रहना मुश्किल होता जा रहा है. उन्होंने कहा कि दिल्ली में ज्यातार रहने वाले पक्षी हजारों सालों से यहां रह रहे हैं, इसलिए वे गर्मी के हिसाब से ढल गए हैं. असली समस्या तेजी से शहरीकरण, वेटलैंड्स में कमी और सिकुड़ता ग्रीन कवर है, जिसकी वजह से पक्षियों को काफी पानी नहीं मिल पा रहा है.
एक्सपर्ट ने बताया लोग पक्षियों को बचाने के लिए क्या करें
एक्सपर्ट ने लोगों से अपने आस-पड़ोस में जानवरों के लिए पीने के पानी के कटोरे रखने और आराम करने की छायादार जगह बनाने की अपील की. उन्होंने कहा कि हर किसी की गलियों में कुत्ते और दूसरे जानवर होते हैं. लोगों को उनके लिए पानी और कुछ छायादार जगह रखनी चाहिए. हम लोगों को सलाह देते हैं कि वे साफ पानी का एक कटोरा छायादार जगह पर रखें और उसे दिन में कम से कम दो बार भरें. पक्का करें कि कटोरे साफ हों. पक्षियों को दाना डालने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि वे पानी ढूंढ सकते हैं.