केन-बेतवा आंदोलन: 400 करोड़ के भ्रष्टाचार खुलासे से पहले कार्रवाई पर सवाल? अनशन नहीं तोड़ेंगे अमित
Protest against Ken Betwa link project: केन बेतवा नदी जोड़ो परियोजना में मुआवजा, पुनर्वास में अनियमितताओं को विरोध में आदिवासी और किसान अनशन कर रहे हैं. पुलिस की कार्रवाई के बाद भी किसान नेता अमित भटनागर ने अनशन नहीं तोड़ने का ऐलान किया है.
मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में केन-बेतवा लिंक परियोजना और अन्य सिंचाई परियोजनाओं के विरोध में पिछले 15 दिन से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे ग्रामीणों और प्रदर्शनकारियों को पुलिस और प्रशासन ने बरसाती मौसम और बढ़ते जलस्तर के खतरे का हवाला देते हुए रविवार सुबह प्रदर्शन स्थल से हटा दिया है. इससे ठीक पहले आमरण अनशन कर रहे जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर ने परियोजना के जरिए 400 करोड़ के घोटाले का खुलासा करने का ऐलान उन्होंने अपने वीडियो में किया था. वीडियो जारी होने के कुछ देर बाद ही तड़के सुबह पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया और प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर कर दिया. अमित भटनागर ने अनशन नहीं तोड़ने का ऐलान किया है और कुछ भी खाने-पीने और ड्रिप लगवाने से इनकार किया है.
मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में केन-बेतवा लिंक परियोजना और अन्य सिंचाई परियोजनाओं के विरोध में पिछले 15 दिनों से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे ग्रामीणों और प्रदर्शनकारियों को पुलिस और प्रशासन ने रविवार सुबह प्रदर्शन स्थल से हटा दिया. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर सहित कुछ अन्य लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. जबकि, प्रशासन ने इन आरोपों से इंकार करते हुए दावा किया कि स्वास्थ्य और सुरक्षा कारणों से सभी को प्रेम से व शांतिपूर्वक उनके घरों तक पहुंचा दिया गया है. मुआवजा और पुनर्वास से संबंधी वादे पूरे नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए 3 जुलाई को यह अनिश्चितकालीन अनशन कुपी गांव के पास बराना नदी के किनारे शरू किया था.
हिरासत में लेने की प्रशासन ने क्या वजह बताई
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आदित्य पटले ने पीटीआई को बताया ग्रामीण जिस जगह पर आंदोलन कर रहे थे, वहां पर पुल निर्माण का काम हो रहा है तथा बारिश के कारण नदी में पानी बढ़ रहा था, जो कि कभी भी खतरा बन सकता था. उन्होंने कहा कि लोग काफी दिनों से भूख हड़ताल पर थे, इसलिए उनका स्वास्थ्य भी गिर रहा था और कुछ की तबियत भी बिगड़ रही थी. पटले ने कहा कि पुलिस और प्रशासन की टीम चिकित्सकों के साथ यहां आई थी और सभी से स्वास्थ्य जांच कराने की अपील की गई. उन्होंने कहा कि अमित भटनागर भी भूख हड़ताल पर थे और उनका स्वास्थ लगातार गिर रहा था इसलिए उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है.
अफसरों ने फर्जी लोगों को निवासी दिखाकर मुआवजा जारी कराया- अमित भटनागर
किसान नेता अमित भटनागर ने जारी वीडियो में कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना, मजगांव डैम, रुझ, नैगुवां सिंचाई परियोजना और एनटीपीसी परियोजनाओं में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार किया गया है. इसमें संवैधानिक अधिकारों की लोगों की हत्या तो की गई है. अधिकारियों ने भ्रष्टाचार करके ग्राम सभाएं फर्जी दर्ज की हैं और अपने रिश्तेदारों को फर्जी तरीके से गांव का निवासी दिखाकर मुआवजा जारी करा लिया गया है. ग्रामीणों के हिस्से का 60 फीसदी से अधिक मुआवजा फर्जी तरीके से अपात्र लोगों के खाते में ट्रांसफर किया गया है.
400 करोड़ का भ्रष्टाचार और 50 हजार आदिवासियों को बर्बाद करने का आरोप
अमित भटनागर ने कहा कि इन परियोजनाओं से अधिकारियों और उनके रिश्तेदारों की चांदी हुई है. नेताओं और दलालों ने आदिवासियों किसानों का हक खा लिया है. उन्होंने कहा कि यह घोटाला इतना बड़ा है कि इसमें 400 करोड़ से ज्यादा का भ्रष्टाचार किया गया है. इससे 50,000 लोगों का जीवन पूरी तरीके से बर्बाद और उजाड़ कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि वह इस घोटाले में शामिल लोगों के नामों और दस्तावेजों का खुलासा करेंगे. लेकिन, सरकार इस पूरे आंदोलन को दबाने-कुचलने में जुट गई है.
1- कुपी गांव के पास बराना नदी पर आमने-सामने किसान और प्रशासन. 2- प्रदर्शनकारी दिव्या अहिरवार. 3- अमित भटनागर.
अमित भटनागर ने अनशन तोड़ने से इनकार किया
आंदोलनकारियों में शामिल उनकी एक अन्य प्रमुख नेता दिव्या अहिरवार ने कहा कि हमारा आंदोलन 3 जुलाई से लगातार अभी तक जारी है और अमित भटनागर का आमरण अनशन भी जारी है. उन्होंने कहा कि भटनागर ने अनशन तोड़ने से इनकार किया है और जबरदस्ती वह ड्रिप नहीं लगवाएंगे और कुछ भी खाएंगे-पियेंगे नहीं. दिव्या अहिरवार ने कहा कि आज केन-बेतवा में 400 करोड़ रुपये के एक कथित भ्रष्टाचार का मीडिया के समक्ष अमित खुलासा करने वाले थे, लेकिन पुलिस प्रशासन ने सुबह 5 बजे ही हजारों की संख्या में भटनागर सहित सभी आंदोलनकारियों को आंदोलन स्थल से गिरफ्तार कर लिया. उन्होंने कहा कि अमित भटनागर को कुछ भी होता है और हमारे आंदोलनकारियों में से एक भी व्यक्ति को खरोंच भी आती है तो उसका जिम्मेदार प्रशासन होगा, स्वयं मुख्यमंत्री होंगे.