खाने की पैकिंग पर कड़े नियम, अब स्टेपलर के पिन और तार का इस्तेमाल पूरी तरह बंद, FSSAI ने दिए सख्त निर्देश

Food Packaging Safety: FSSAI ने सभी रेस्टोरेंट, ढाबों और फूड डिलीवरी सेवाओं को निर्देश दिया है कि खाने की पैकिंग में अब किसी भी तरह के स्टेपलर के पिन, तार या नुकीली चीजों का इस्तेमाल तुरंत बंद किया जाए. ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि इससे खाने में चोट लगने या नुकसान का खतरा रहता है.

नोएडा | Updated On: 13 Jun, 2026 | 06:24 PM

FSSAI Food Packaging Rules: भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सभी फूड बिजनेस ऑपरेटरों को सख्त निर्देश जारी किए हैं. इसमें कहा गया है कि अब किसी भी खाने की चीज को पैक, सील या बांधने में स्टेपलर के पिन, तार या किसी भी नुकीली या खतरनाक चीज का इस्तेमाल तुरंत बंद किया जाए. यह नियम खाने की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लागू किया गया है, ताकि लोगों को चोट लगने या सेहत को नुकसान होने का खतरा न रहे.

क्यों लिया गया यह फैसला?

अक्सर देखा जाता है कि कई छोटे-बड़े रेस्टोरेंट, ढाबे और फूड डिलीवरी सेवाएं खाने के पैकेट को बंद करने के लिए स्टेपलर के पिन या तार का इस्तेमाल करते हैं. यह तरीका सस्ता और आसान तो है, लेकिन इससे कई खतरे जुड़े होते हैं:

इन्हीं कारणों को देखते हुए FSSAI ने यह कदम उठाया है.

किन चीजों पर लागू होगा यह नियम?

यह आदेश सिर्फ किसी एक प्रकार के फूड आइटम पर नहीं बल्कि सभी तरह के खाने पर लागू होगा, जैसे:

सीधे शब्दों में कहें तो अब खाने को बंद करने या पैक करने में किसी भी तरह के स्टेपलर के पिन या तार का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा.

नियम नहीं माना तो क्या होगा?

FSSAI ने साफ कहा है कि अगर कोई फूड बिजनेस ऑपरेटर इस निर्देश का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. इसमें जुर्माना, लाइसेंस पर असर या अन्य कानूनी कदम शामिल हो सकते हैं.

अब क्या इस्तेमाल करना होगा?

स्टेपलर के पिन और तार की जगह अब फूड सेक्टर को सुरक्षित विकल्प अपनाने होंगे, जैसे:

इनसे न सिर्फ सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि पर्यावरण को भी फायदा होगा.

FSSAI का यह नया नियम खाने की सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है. इससे न सिर्फ ग्राहकों की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि फूड पैकिंग सिस्टम भी ज्यादा सुरक्षित और आधुनिक बनेगा. आने वाले समय में यह बदलाव पूरे देश के फूड सेक्टर में बड़ा असर डाल सकता है.

Published: 13 Jun, 2026 | 07:00 PM

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