गुजरात में 62 शेरों की बीमारी से मौत, शावक सबसे ज्यादा प्रभावित.. कांग्रेस ने विधानसभा में दी जानकारी
Asiatic Lions: गुजरात में 31 जुलाई 2026 से पहले के एक साल में बीमारी और स्वास्थ्य संबंधी कारणों से 62 शेर, शेरनियां और शावकों की मौत दर्ज हुई. इनमें 28 शावक शामिल हैं, जो कुल मौतों का करीब 45 फीसदी है. सरकार ने निमोनिया, एनीमिया, किडनी-लिवर की समस्या, हार्ट अटैक और कई अन्य बीमारियों का जिक्र किया है.
Gujarat Lion Deaths 2026: गुजरात में एशियाई शेरों की सेहत को लेकर चिंता बढ़ाने वाली जानकारी सामने आई है. राज्य सरकार ने विधानसभा में बताया कि 31 जुलाई 2026 से पहले के एक साल में बीमारी और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के चलते 62 शेर, शेरनियां और शावकों की मौत दर्ज की गई. इनमें सबसे ज्यादा मौतें शावकों की हुईं. कुल 62 मौतों में 28 शावक शामिल हैं, यानी करीब 45 फीसदी मौतें इसी आयु वर्ग की रहीं.
शावकों की मौत का आंकड़ा सबसे ज्यादा
वन मंत्री की ओर से विधानसभा में दिए गए लिखित जवाब के मुताबिक, इस दौरान 17 नर शेर और 17 शेरनियों की भी मौत हुई. दोनों की हिस्सेदारी कुल मौतों में 27.4-27.4 फीसदी रही. इस तरह जहां 34 वयस्क शेरों की मौत हुई, वहीं अकेले शावकों की मौत का आंकड़ा 28 रहा. यानी रिपोर्ट की गई कुल मौतों में करीब आधी मौतें शावकों की हैं. यह जानकारी कांग्रेस विधायक शैलेश मनुभाई परमार के सवाल के जवाब में दी गई. उन्होंने शेरों में पाई जाने वाली बीमारियों, बीमारी से हुई मौतों और सरकार की ओर से उठाए जा रहे बचाव के कदमों के बारे में जानकारी मांगी थी.
कई तरह की बीमारियां बनीं वजह
वन विभाग ने शेरों में कई तरह की बीमारियां और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दर्ज की हैं. इनमें निमोनिया और हेमोरेजिक निमोनिया, एनीमिया, किडनी और लिवर से जुड़ी दिक्कत, शरीर के कई अंगों के ठीक से काम न करने की स्थिति, हार्ट अटैक, पैरालिसिस और गठिया जैसी समस्याएं शामिल हैं. इसके अलावा गैस्ट्रोएंटेराइटिस, राउंडवर्म संक्रमण, एन्सेफलाइटिस, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से जुड़ी परेशानियां, पेट में पानी भरना, ब्रोंकोनिमोनिया, गंभीर बीमारी और सेप्टिक शॉक जैसी स्थितियां भी सामने आईं. इससे साफ है कि शेरों की मौत के पीछे कोई एक बीमारी जिम्मेदार नहीं बताई गई है, बल्कि अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं का जिक्र किया गया है.
क्या किसी एक बीमारी से सबसे ज्यादा मौत हुई?
विधानसभा में दिए गए जवाब में अलग-अलग बीमारियों के कारण हुई मौतों की संख्या अलग से नहीं बताई गई है. इसलिए उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर यह कहना मुश्किल है कि इनमें से कौन सी बीमारी सबसे ज्यादा जानलेवा रही. इसी तरह यह भी साफ नहीं है कि सूची में शामिल हर बीमारी को हर मामले में मौत की सीधी वजह के तौर पर पुष्टि की गई थी या नहीं. इसलिए 62 मौतों के आंकड़े को किसी एक बीमारी के प्रकोप के तौर पर देखना सही नहीं होगा.
आंकड़ों को समझते समय सावधानी जरूरी
विधानसभा में सामने आए आंकड़े निश्चित तौर पर शेरों की मौत की संख्या बताते हैं, लेकिन इनसे यह साबित नहीं होता कि शेरों की मौत बढ़ रही है या घट रही है. इसकी वजह यह है कि जवाब में संबंधित इलाके में शेरों की कुल आबादी, अलग-अलग उम्र के हिसाब से मौत की दर और पिछले वर्षों के आंकड़ों की तुलना उपलब्ध नहीं है. इसलिए फिलहाल उपलब्ध जानकारी से इतना ही कहा जा सकता है कि 31 जुलाई 2026 से पहले के एक साल में गुजरात में बीमारी और स्वास्थ्य संबंधी कारणों से 62 शेरों की मौत दर्ज की गई, जिनमें 28 शावक सबसे ज्यादा प्रभावित रहे.