Odisha Kalajeera Rice: ओडिशा में देसी धान की पुरानी किस्मों को अब आधुनिक खेती और बड़े बाजार से जोड़ने की तैयारी हो रही है. इसके लिए राज्य सरकार ने फिलीपींस स्थित इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट (IRRI) के साथ मिलकर काम करने की पहल की है. इस योजना में खास तौर पर कालाजीरा धान पर ध्यान दिया जा रहा है. इसका मकसद सिर्फ इसकी खेती बढ़ाना नहीं, बल्कि इसकी शुद्धता और खास पहचान को बचाते हुए किसानों को बेहतर दाम दिलाना भी है.
कालाजीरा धान को मिलेगा बढ़ावा
कालाजीरा ओडिशा की खास देसी धान की किस्मों में शामिल है. कोरापुट के आदिवासी किसान लंबे समय से इसकी खेती करते आ रहे हैं. अपनी अलग खुशबू और पारंपरिक पहचान के कारण इसे खास माना जाता है. इसे जीआई टैग भी मिला हुआ है. ओडिशा सरकार और IRRI के बीच हुई बैठक में कालाजीरा की खेती का दायरा बढ़ाने, किसानों को आधुनिक तकनीकी मदद देने और इसे बड़े स्तर पर बाजार से जोड़ने पर चर्चा हुई. सरकार इसे एक प्रमुख प्रदर्शन परियोजना के रूप में आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है.
1,800 से ज्यादा किसानों ने की खेती
कालाजीरा की खेती को बढ़ावा देने की कोशिश पहले से चल रही है. 2024 के खरीफ सीजन में कोरापुट के आठ ब्लॉकों में 1,800 से ज्यादा किसानों ने करीब 1,365 एकड़ जमीन पर इसकी खेती की थी. इसके बाद 2025 में कालाजीरा समेत देसी धान की खेती का कुल क्षेत्र बढ़कर करीब 2,000 एकड़ तक पहुंच गया. इससे पता चलता है कि किसानों के बीच इस पारंपरिक धान की मांग और रुचि बढ़ रही है.
In a meeting with Dr. Nese Sreenivasul, Principal Scientist, IRRI Philippines at LSB Chamber. pic.twitter.com/LwBFYQ1IOs
— Kanak Vardhan Singh Deo (Modiji Ka Parivar) (@KVSinghDeo1) September 8, 2026
किसान सीधे बाजार से जुड़ेंगे
इस पहल का एक बड़ा उद्देश्य किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है. आमतौर पर किसान अपनी फसल बेचने के बाद उसके अंतिम बाजार मूल्य का पूरा फायदा नहीं उठा पाते. ऐसे में कालाजीरा को सीधे बाजार, ब्रांड और बेहतर पैकेजिंग से जोड़ने पर किसानों की कमाई बढ़ सकती है. 2024 में किसान समूहों की ओर से बनाई गई स्वतंत्र मंडियों के जरिए करीब 1,900 क्विंटल धान की सीधे खरीद भी की गई थी. आगे इस तरह की व्यवस्था को और मजबूत करने की कोशिश की जा सकती है.
फूड प्रोसेसिंग से बढ़ेंगे कमाई के रास्ते
योजना में सिर्फ धान बेचने पर निर्भर रहने के बजाय उससे अलग-अलग खाद्य उत्पाद तैयार करने पर भी जोर है. टूटे हुए चावल से मूल्य बढ़ाने वाले उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं. इसके लिए स्थानीय राइस मिलों और क्षेत्रीय फूड प्रोसेसिंग सुविधाओं को मजबूत करने की योजना है. इससे गांवों में छोटे कारोबार शुरू होने के अवसर बढ़ सकते हैं. किसान समूहों के साथ महिला समूह भी ऐसे माइक्रो-एंटरप्राइज और एग्री-बिजनेस से जुड़ सकते हैं. भंडारण और कोल्डचेन जैसी सुविधाओं को बेहतर करने से भी पूरी सप्लाई चेन को फायदा मिल सकता है.
350 रुपये किलो तक बिकता है कालाजीरा
कालाजीरा की कीमत इसकी क्वालिटी, ब्रांड, प्रोसेसिंग और पैकेजिंग के हिसाब से काफी अलग हो सकती है. बाजार में यह करीब 150 से 350 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिकता है. ऐसे में अगर किसानों को बेहतर तकनीक, अच्छी प्रोसेसिंग और सीधे बाजार से जोड़ा जाए तो इस धान की आर्थिक कीमत और बढ़ सकती है.
देसी धान की विरासत को बचाने की कोशिश
IRRI के साथ साझेदारी का मकसद कालाजीरा जैसी पारंपरिक किस्मों को सिर्फ खेत तक सीमित रखना नहीं है. कोशिश है कि इनकी पहचान और शुद्धता को बचाते हुए इन्हें आधुनिक तकनीक, फूड प्रोसेसिंग, बेहतर पैकेजिंग और बाजार से जोड़ा जाए. साथ ही, महिला उद्यमिता और किसान समूहों को बढ़ावा देकर गांवों में कमाई के नए रास्ते तैयार किए जा सकते हैं. इससे कालाजीरा ओडिशा की कृषि विरासत के साथ-साथ किसानों के लिए अच्छी आमदनी वाली फसल के रूप में भी अपनी पहचान मजबूत कर सकता है.